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बैंक बंद होने से और बिगड़े हालात
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Mon, 14 Nov 2016 11:40 PM IST
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सोमवार को बैंकों के बंद होने से हालात और बिगड़ गए। अभी तक बैंकों में धक्कामुक्की के बाद किसी तरह लोग चार हजार तक के नोट बदल ले रहे थे, लेकिन सोमवार को बैंकों के बंद होने के कारण लोगों को एक रुपये भी नहीं मिले। एटीएम ने लगातार चौथे दिन भी धोखा दिया। शहर के सभी एटीएम बंद पड़े थे। एकमात्र एसबीआई के एटीएम से कुछ देर के लिए धन निकासी हुई।
सोमवार को अवकाश होने के कारण फुटकर रुपये को लेकर हालात और बिगड़ गए। अभी तक बैंकों में लंबी लाइन लगाने पर ग्राहकों को थोड़े बहुत जो रुपये मिलते भी थे, सोमवार को वह भी ठप हो गए। इससे ग्राहक दिन भर फुटकर रुपये के लिए इधर-उधर भटकते रहे। दूध, ब्रेड, फल और चाय के लिए लोगों को फुटकर पैसे खोजने पर भी नहीं मिल रहे थे। शनिवार और रविवार को बैंकों के खुलने से ग्राहकों को भले ही लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ा, मगर थोड़ा बहुत जो कुछ भी भुगतान मिला, उससे उनका काम चल रहा था। मगर सोमवार की बंदी ने आम लोगों की समस्याएं बढ़ा दीं। जिले के एटीएम पहले से ही ठप पड़े हैं। सोमवार को सिर्फ एसबीआई की मुख्य शाखा में स्थित एटीएम से ही रुपये निकल रहे थे। सड़क तक लगी लंबी लाइन का आलम यह रहा कि चार घंटे के बाद भी उसका नंबर आता था। हां इतना अवश्य था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद एटीएम से ग्राहकों को अधिकतम ढाई हजार रुपये मिलने प्रारंभ हो गए थे। मगर जिन ग्राहकों के पास एटीएम कार्ड नहीं है, उनकी समस्या और बढ़ गई है। इधर, आम लोगों को अवकाश की जानकारी नहीं होने पर वह बैंक पहुंच गए। इससे बैंक का ताला देखकर उनके हाथ मायूसी लगी।
एक सप्ताह न रहें एटीएम के भरोसे
एटीएम से अगले एक सप्ताह तक रुपये मिलने की उम्मीद न रखिए। दरअसल में जिले में पांच सौ रुपये के नए नोट अभी आए नहीं हैं। सौ रुपये के नए नोट हैं नहीं, और शहर और ग्रामीण इलाकों में लगे एटीएम दो हजार रुपये के नए नोट स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इससे जब तक साफ्टवेयर अपडेट नहीं होता है, तब तक एटीएम से रुपये नहीं मिलेंगे।
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शहर और ग्रामीण इलाकों में लगे एटीएम अभी एक सप्ताह तक खिलौना बने रहेंगे। इससे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना होगा। जिले की बैंकों में एक सौ रुपये और पांच सौ रुपये के नए नोट नहीं हैं। एक हजार रुपये के नोट बंद हो चुके हैं। दो हजार रुपये के नए नोटों को एटीएम स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसी स्थिति में एटीएम में रुपये लगाने के लिए नोट नहीं है। जब तक एटीएम का साफ्टवेयर अपडेट नहीं होगा, तब तक दो हजार रुपये के नए नोट एटीएम स्वीकार नहीं करेगा। इससे ग्राहकों को रुपये निकालने के लिए बैंकों में लंबी लाइन लगानी होगी।
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सोमवार को अवकाश होने के कारण फुटकर रुपये को लेकर हालात और बिगड़ गए। अभी तक बैंकों में लंबी लाइन लगाने पर ग्राहकों को थोड़े बहुत जो रुपये मिलते भी थे, सोमवार को वह भी ठप हो गए। इससे ग्राहक दिन भर फुटकर रुपये के लिए इधर-उधर भटकते रहे। दूध, ब्रेड, फल और चाय के लिए लोगों को फुटकर पैसे खोजने पर भी नहीं मिल रहे थे। शनिवार और रविवार को बैंकों के खुलने से ग्राहकों को भले ही लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ा, मगर थोड़ा बहुत जो कुछ भी भुगतान मिला, उससे उनका काम चल रहा था। मगर सोमवार की बंदी ने आम लोगों की समस्याएं बढ़ा दीं। जिले के एटीएम पहले से ही ठप पड़े हैं। सोमवार को सिर्फ एसबीआई की मुख्य शाखा में स्थित एटीएम से ही रुपये निकल रहे थे। सड़क तक लगी लंबी लाइन का आलम यह रहा कि चार घंटे के बाद भी उसका नंबर आता था। हां इतना अवश्य था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद एटीएम से ग्राहकों को अधिकतम ढाई हजार रुपये मिलने प्रारंभ हो गए थे। मगर जिन ग्राहकों के पास एटीएम कार्ड नहीं है, उनकी समस्या और बढ़ गई है। इधर, आम लोगों को अवकाश की जानकारी नहीं होने पर वह बैंक पहुंच गए। इससे बैंक का ताला देखकर उनके हाथ मायूसी लगी।
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एक सप्ताह न रहें एटीएम के भरोसे
एटीएम से अगले एक सप्ताह तक रुपये मिलने की उम्मीद न रखिए। दरअसल में जिले में पांच सौ रुपये के नए नोट अभी आए नहीं हैं। सौ रुपये के नए नोट हैं नहीं, और शहर और ग्रामीण इलाकों में लगे एटीएम दो हजार रुपये के नए नोट स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इससे जब तक साफ्टवेयर अपडेट नहीं होता है, तब तक एटीएम से रुपये नहीं मिलेंगे।
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शहर और ग्रामीण इलाकों में लगे एटीएम अभी एक सप्ताह तक खिलौना बने रहेंगे। इससे ग्राहकों को परेशानी का सामना करना होगा। जिले की बैंकों में एक सौ रुपये और पांच सौ रुपये के नए नोट नहीं हैं। एक हजार रुपये के नोट बंद हो चुके हैं। दो हजार रुपये के नए नोटों को एटीएम स्वीकार नहीं कर रहा है। ऐसी स्थिति में एटीएम में रुपये लगाने के लिए नोट नहीं है। जब तक एटीएम का साफ्टवेयर अपडेट नहीं होगा, तब तक दो हजार रुपये के नए नोट एटीएम स्वीकार नहीं करेगा। इससे ग्राहकों को रुपये निकालने के लिए बैंकों में लंबी लाइन लगानी होगी।