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हाउसिंग स्कीम तो दूर, नहीं मिला समाजवादी आवास
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Mon, 18 Jul 2016 12:33 AM IST
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शहर के लोगों को सस्ता आवास मुहैया कराने के लिए हाउसिंग स्कीम तो दूर रही, समाजवादी आवास भी नसीब नहीं हुआ है। लंबे समय से किश्तों में मिलने वाले आवास की प्रतीक्षा कर रहे लोगों को आवास विकास की चुप्पी से गहरा झटका लगा है। जिले के लोगों को सस्ता और किश्तों पर आवास मुहैया कराने के लिए 1980 में आवास विकास परिषद कार्यालय की स्थापना की गई थी। 1982 में मीराभवन चौराहे पर कालोनी एलाट करने के बाद से विभाग ऐसे शिथिल हुआ कि कालोनी निर्माण की दिशा में सोचना ही बंद कर दिया।
आवास विकास परिषद की असफलता देखकर हाउसिंग स्कीम चलाने वाले प्राइवेट संस्थानों ने भी जिले में कालोनी निर्माण से तौबा कर लिया। जिले के लोगों का दुर्भाग्य ही है कि समाजवादी आवास की योजना भी नहीं पहुंची। आवास बनाने को लेकर अगर जिले में कोई मालामाल हुआ है तो वह हैं लेखपाल और डीलर। इन लोगों की सांठ-गांठ से शहर के विभिन्न मोहल्लों में खाली पड़ी जमीन में सोना उगाया जा रहा है। सर्किल रेट से दस गुना महंगी जमीन बेचकर भूमाफिया मालामाल हो रहे हैं। अगर जिला प्रशासन शहर के आसपास पड़ी सरकारी जमीन को खाली कराने का अभियान चलाए तो इन भूमाफिया की पोल खुल सकती है। इन माफिया की नजर अभी भी आवास विकास के अगले कदम पर होती है।
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आवास विकास परिषद की असफलता देखकर हाउसिंग स्कीम चलाने वाले प्राइवेट संस्थानों ने भी जिले में कालोनी निर्माण से तौबा कर लिया। जिले के लोगों का दुर्भाग्य ही है कि समाजवादी आवास की योजना भी नहीं पहुंची। आवास बनाने को लेकर अगर जिले में कोई मालामाल हुआ है तो वह हैं लेखपाल और डीलर। इन लोगों की सांठ-गांठ से शहर के विभिन्न मोहल्लों में खाली पड़ी जमीन में सोना उगाया जा रहा है। सर्किल रेट से दस गुना महंगी जमीन बेचकर भूमाफिया मालामाल हो रहे हैं। अगर जिला प्रशासन शहर के आसपास पड़ी सरकारी जमीन को खाली कराने का अभियान चलाए तो इन भूमाफिया की पोल खुल सकती है। इन माफिया की नजर अभी भी आवास विकास के अगले कदम पर होती है।
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