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किश्तों में जमा हो रहे हैं नकल कराने के रुपये
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 23 Feb 2015 10:49 PM IST
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यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल माफिया हावी हैं। वे परीक्षार्थियों से नकल के बदले धड़ल्ले से रुपये वसूल रहे हैं। कॉपी दूसरे से लिखाने और बोलकर नकल कराने के लिए उनके रेट निर्धारित हैं। नकल माफिया के इस खेल के आगे अधिकारियों की दाल नहीं गल रही है।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में साइलेंट नकल हो रही है। सचल दस्ते के हाथ भले ही कुछ न लगे, मगर अंदर सब कुछ वही हो रहा है जो हमेशा होता रहा है। हां, इस बार नकल का रेट थोड़ा हाई हो गया है। कुछ केंद्र तो ऐसे हैं जहां बाहर से लिखी कॉपी जमा कराने, परीक्षार्थी के स्थान पर दूसरे को बिठाकर परीक्षा दिलाने और बोलकर नकल कराने के लिए अलग-अलग रेट निर्धारित है। इसके अलावा वह नकल कराने के रुपये किश्तों में भी अदा कर सकता है। सोमवार को लालगंज इलाके के जलेशरगंज स्थित एक केंद्र में सामूहिक नकल के लिए चार-चार हजार रुपये वसूले गए। स्कूल प्रशासन रुपये वसूलने की बात से इंकार कर रहा है।
मगर छात्रों की बातों पर यकीन किया जाए तो रुपये नहीं देने वाले परीक्षार्थियों को धमकी दी गई है कि अगर 26 फरवरी को परीक्षा से पहले रुपये नहीं जमा किए तो सिर नहीं घुमा सकेंगे। यह तो महज उदाहरण है। जिले में सक्रिय नकल माफिया छात्र-छात्राओं से नकल के एवज में व्यापक वसूली कर रहे हैं। आश्चर्य यह है कि नकल रोकने के लिए जिला प्रशासन और विभाग के बने सात-सात सचल दस्ते नकल माफियाओं और नकलचियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी तक हुई परीक्षा में सिर्फ तीन नकलची ही धरे जा सके हैं। प्रभारी डीआईओएस आरके वर्मा ने जिले में नकलविहीन परीक्षा होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि सख्ती के चलते अधिकांश परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।
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हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में साइलेंट नकल हो रही है। सचल दस्ते के हाथ भले ही कुछ न लगे, मगर अंदर सब कुछ वही हो रहा है जो हमेशा होता रहा है। हां, इस बार नकल का रेट थोड़ा हाई हो गया है। कुछ केंद्र तो ऐसे हैं जहां बाहर से लिखी कॉपी जमा कराने, परीक्षार्थी के स्थान पर दूसरे को बिठाकर परीक्षा दिलाने और बोलकर नकल कराने के लिए अलग-अलग रेट निर्धारित है। इसके अलावा वह नकल कराने के रुपये किश्तों में भी अदा कर सकता है। सोमवार को लालगंज इलाके के जलेशरगंज स्थित एक केंद्र में सामूहिक नकल के लिए चार-चार हजार रुपये वसूले गए। स्कूल प्रशासन रुपये वसूलने की बात से इंकार कर रहा है।
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मगर छात्रों की बातों पर यकीन किया जाए तो रुपये नहीं देने वाले परीक्षार्थियों को धमकी दी गई है कि अगर 26 फरवरी को परीक्षा से पहले रुपये नहीं जमा किए तो सिर नहीं घुमा सकेंगे। यह तो महज उदाहरण है। जिले में सक्रिय नकल माफिया छात्र-छात्राओं से नकल के एवज में व्यापक वसूली कर रहे हैं। आश्चर्य यह है कि नकल रोकने के लिए जिला प्रशासन और विभाग के बने सात-सात सचल दस्ते नकल माफियाओं और नकलचियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी तक हुई परीक्षा में सिर्फ तीन नकलची ही धरे जा सके हैं। प्रभारी डीआईओएस आरके वर्मा ने जिले में नकलविहीन परीक्षा होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि सख्ती के चलते अधिकांश परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।
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