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Pratapgarh News: आयुष्मान कार्ड पर जबरिया इलाज कराने का आरोप
Mon, 18 Mar 2024 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Mon, 18 Mar 2024 01:05 AM IST
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आयुष्मान मित्रों ने डीएम से की संस्था की शिकायत, सीएमओ को सौंपी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। स्वस्थ आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारकों को कागजों में मरीज दिखाकर इलाज कराने और रुपये कैश कराने का आरोप लगाया गया है। आयुष्मान मित्रों ने डीएम से शिकायत की है कि गोल्डन कार्ड का काम देखने वाली संस्था राइटर इंफारमेशन प्राइवेट लिमिटेड उन पर दबाव बना रही है। डीएम ने मामले की जांच सीएमओ को सौंपी है।
जनपद में 12 लाख आयुष्मान के लाभार्थी तो नौ लाख गोल्डन कार्ड धारक हैं। जिले के 29 सरकारी और सात प्राइवेट अस्पतालों में गोल्डन कार्ड पर पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की व्यवस्था है। गोल्डन कार्ड बनाने के लिए राइटर इंफारमेशन प्राइवेट लिमिटेड ने 29 आरोग्य मित्रों की तैनाती कर रखी है। प्रति आरोग्य मित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय और भर्ती कराने (प्रीऑथ) पर 50 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने वाले आयुष्मान के मरीजों के गोल्डन कार्ड से इलाज का खर्च कटकर पहले सीएचसी के खाते में भेजा जाता है, फिर एजेंसी के खाते में ट्रांसफर होता है।
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सीएचसी में तैनात आरोग्य मित्रों ने डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि एजेंसी के आरएम प्रवीन सिंह व जिला स्वास्थ्य समिति के कुछ अधिकारी दबाव बना रहे हैं कि किसी भी हालत में 60 मरीजों को भर्ती (प्री-ऑथ) दिखाया जाए। ऐसा न करने वाले आयुष्मान मित्रों का तबादला या फिर विभाग से बाहर का रास्ता दिखा जाएगा। मानदेय में कटौती भी की जाएगी।
वर्जन
जांच के लिए जिलाधिकारी का पत्र मेरे पास आया था। चूंकि शिकायती पत्र में मुझ पर आरोप था। इसलिए मामले की जांच के लिए पत्र शासन को भेजा गया है। शासन स्तर से ही मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।
वर्जन
आयुष्मान मित्रों को घर से अस्पताल लाने के लिए नहीं कहा जा सकता है। सभी आरोप निराधार है। काम करना नहीं चाहते हैं, बगैर काम किए पैसा लेना चाहते हैं। इसकी जांच कराई जा रही है।
प्रवीन सिंह, रीजनल मैनेजर, राइटर इंफारमेशन प्राइवेट लिमिटेड।
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। स्वस्थ आयुष्मान गोल्डन कार्ड धारकों को कागजों में मरीज दिखाकर इलाज कराने और रुपये कैश कराने का आरोप लगाया गया है। आयुष्मान मित्रों ने डीएम से शिकायत की है कि गोल्डन कार्ड का काम देखने वाली संस्था राइटर इंफारमेशन प्राइवेट लिमिटेड उन पर दबाव बना रही है। डीएम ने मामले की जांच सीएमओ को सौंपी है।
जनपद में 12 लाख आयुष्मान के लाभार्थी तो नौ लाख गोल्डन कार्ड धारक हैं। जिले के 29 सरकारी और सात प्राइवेट अस्पतालों में गोल्डन कार्ड पर पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की व्यवस्था है। गोल्डन कार्ड बनाने के लिए राइटर इंफारमेशन प्राइवेट लिमिटेड ने 29 आरोग्य मित्रों की तैनाती कर रखी है। प्रति आरोग्य मित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय और भर्ती कराने (प्रीऑथ) पर 50 रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है।
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जिले के सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने वाले आयुष्मान के मरीजों के गोल्डन कार्ड से इलाज का खर्च कटकर पहले सीएचसी के खाते में भेजा जाता है, फिर एजेंसी के खाते में ट्रांसफर होता है।
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सीएचसी में तैनात आरोग्य मित्रों ने डीएम को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि एजेंसी के आरएम प्रवीन सिंह व जिला स्वास्थ्य समिति के कुछ अधिकारी दबाव बना रहे हैं कि किसी भी हालत में 60 मरीजों को भर्ती (प्री-ऑथ) दिखाया जाए। ऐसा न करने वाले आयुष्मान मित्रों का तबादला या फिर विभाग से बाहर का रास्ता दिखा जाएगा। मानदेय में कटौती भी की जाएगी।
वर्जन
जांच के लिए जिलाधिकारी का पत्र मेरे पास आया था। चूंकि शिकायती पत्र में मुझ पर आरोप था। इसलिए मामले की जांच के लिए पत्र शासन को भेजा गया है। शासन स्तर से ही मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।
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आयुष्मान मित्रों को घर से अस्पताल लाने के लिए नहीं कहा जा सकता है। सभी आरोप निराधार है। काम करना नहीं चाहते हैं, बगैर काम किए पैसा लेना चाहते हैं। इसकी जांच कराई जा रही है।
प्रवीन सिंह, रीजनल मैनेजर, राइटर इंफारमेशन प्राइवेट लिमिटेड।