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धुंध से घिरा बेल्हा, दम घोंट रही हवा
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
Updated Mon, 07 Nov 2016 11:34 PM IST
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दिल्ली की तरह बेल्हा में भी आबोहवा जहरीली होने लगी है। प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भले कम हो, लेकिन सोमवार को लगातार दूसरे दिन धुंध से घिरे जिले में लोगों का सांस लेना दूभर हो गया। दमा के मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। अस्प्तालों की ओपीडी में अचानक भीड़ बढ़ गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपेार्ट में भी प्रदूषण की मात्रा तीन गुना अधिक पाई गई है। खुदी सड़कों से उड़ती धूल, वाहनों से निकलता धुआं और दीपावली पर हुई जबरदस्त आतिशबाजी को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, बेल्हा का प्रदूषण पीएम-7 का स्तर 70 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होना चाहिए। जो बढ़कर 250 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के करीब पहुंच गया है। शहर में अंबेडकर चौराहा, पंजाबी मार्केट, सदर बाजार, चिलबिला, भंगवाचुंगी, भुपियामऊ, कुंडा और लालगंज के करीब पीएम-7 की मात्रा काफी अधिक है। नतीजन सोमवार की सुबह लोग सोकर उठे तो लगातार दूसरे धुंध छाई हुई थी। एक बार लगा कि कोहरा है और छट जाएगा, लेकिन शाम तक धुंध छाई रही। दिल्ली में तो स्कूल बंद कर दिए हैं, लेकिन जिले में सोमवार को इसी आबोहवा में बच्चों को स्कूल जाना पड़ा। मौसम विशेषज्ञ हालात में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की चेतावनी दे रहे हैं।
स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में हुई तकलीफ
दो दिनों से छाई धुंध और प्रदूषण के कारण सोमवार को स्वस्थ लोगों को भी दिक्कतें होने लगीं। सोकर उठने के बाद लोग काम पर निकले तो अजीब से बेचैनी का सामना करना पड़ा। बहुत से लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। इसके चलते सोमवार को जिला अस्पताल के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। जिला अस्पताल के चिकित्सक आरडी द्विवेदी के मुताबिक दो दिनों से वातावरण में छाए धुंध के कारण लोगों को सांस लेने में समस्या हो रही है। दो दिनों के भीतर ऐसे 463 मरीजों का इलाज किया गया। ऐसे लोगों को दवा के साथ कम से कम सड़क पर निकलने व नाक व मुंह ढंककर निकलने की सलाह दी गई।
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वायु प्रदूषण की वजह से स्मॉग बढ़ गया है। यह ठंड बढ़ने के साथ धूल और धुएं के कारण होता है। हवा का बहाव न होने के कारण यह काफी देर तक आसमान में रुका रहता है। रविवार और सोमवार को हवा का बहाव कम होेने के कारण धुंध बढ़ी। वायु प्रदूषण कम हो, इसके लिए जनरेटर का कम इस्तेमाल, कूड़ा पत्ती जलाने और होटलों ढाबों में कोयले का इस्तेमाल और उपले जलाने पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। सड़कों की खोदाई के दौरान धूल न उड़े, इसके लिए पानी का निरंतर छिड़काव जरूरी है।
डॉ. मोहम्मद सिकंदर, क्षेत्रीय अधिकारी,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
अचानक धुंध के कारण दमा व हृदयरोग से पीड़ित मरीजों की दिक्कतें बढ़ी हैं। धुंध के चलते सबसे पहले श्वसन क्रिया पर असर पड़ता है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत के साथ गला भी चोक हो जाता है। धुंध के कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जो रक्त प्रवाह को बाधित करने का काम करते हैं। इससे शरीर में तमाम दिक्कते होने लगती हैं।
डॉ. पीएस मिश्र, फिजीशियन, जिला अस्पताल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, बेल्हा का प्रदूषण पीएम-7 का स्तर 70 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर होना चाहिए। जो बढ़कर 250 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के करीब पहुंच गया है। शहर में अंबेडकर चौराहा, पंजाबी मार्केट, सदर बाजार, चिलबिला, भंगवाचुंगी, भुपियामऊ, कुंडा और लालगंज के करीब पीएम-7 की मात्रा काफी अधिक है। नतीजन सोमवार की सुबह लोग सोकर उठे तो लगातार दूसरे धुंध छाई हुई थी। एक बार लगा कि कोहरा है और छट जाएगा, लेकिन शाम तक धुंध छाई रही। दिल्ली में तो स्कूल बंद कर दिए हैं, लेकिन जिले में सोमवार को इसी आबोहवा में बच्चों को स्कूल जाना पड़ा। मौसम विशेषज्ञ हालात में सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाने की चेतावनी दे रहे हैं।
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स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में हुई तकलीफ
दो दिनों से छाई धुंध और प्रदूषण के कारण सोमवार को स्वस्थ लोगों को भी दिक्कतें होने लगीं। सोकर उठने के बाद लोग काम पर निकले तो अजीब से बेचैनी का सामना करना पड़ा। बहुत से लोगों को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी। इसके चलते सोमवार को जिला अस्पताल के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। जिला अस्पताल के चिकित्सक आरडी द्विवेदी के मुताबिक दो दिनों से वातावरण में छाए धुंध के कारण लोगों को सांस लेने में समस्या हो रही है। दो दिनों के भीतर ऐसे 463 मरीजों का इलाज किया गया। ऐसे लोगों को दवा के साथ कम से कम सड़क पर निकलने व नाक व मुंह ढंककर निकलने की सलाह दी गई।
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वायु प्रदूषण की वजह से स्मॉग बढ़ गया है। यह ठंड बढ़ने के साथ धूल और धुएं के कारण होता है। हवा का बहाव न होने के कारण यह काफी देर तक आसमान में रुका रहता है। रविवार और सोमवार को हवा का बहाव कम होेने के कारण धुंध बढ़ी। वायु प्रदूषण कम हो, इसके लिए जनरेटर का कम इस्तेमाल, कूड़ा पत्ती जलाने और होटलों ढाबों में कोयले का इस्तेमाल और उपले जलाने पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। सड़कों की खोदाई के दौरान धूल न उड़े, इसके लिए पानी का निरंतर छिड़काव जरूरी है।
डॉ. मोहम्मद सिकंदर, क्षेत्रीय अधिकारी,प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
अचानक धुंध के कारण दमा व हृदयरोग से पीड़ित मरीजों की दिक्कतें बढ़ी हैं। धुंध के चलते सबसे पहले श्वसन क्रिया पर असर पड़ता है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत के साथ गला भी चोक हो जाता है। धुंध के कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जो रक्त प्रवाह को बाधित करने का काम करते हैं। इससे शरीर में तमाम दिक्कते होने लगती हैं।
डॉ. पीएस मिश्र, फिजीशियन, जिला अस्पताल