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गोविंदपुर गांव में हुए विवाद के बाद हत्या कर जातीय हिंसा फैलाने की थी तैयारी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Thu, 11 Jun 2020 11:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़
अमर उजाना ब्यूरा, न्यूज डेस्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 11 Jun 2020 11:59 PM IST
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After the dispute in Govindpur village, preparations were made to spread ethnic violence by killing, mastermind arrested
ट्टी के धुंई व गोविंदपुर में जातीय हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार युवक। - फोटो : pratapgarh
 पट्टी इलाके में धुंई और गोविंदपुर गांव के लोगों के बीच हुई मारपीट की घटना में हत्या जैसी वारदात को अंजाम देकर बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा फैलाने की साजिश रची गई थी। पुलिस ने इसके मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करने के बाद यह सनसनीखेज खुलासा किया है।
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पुलिस का दावा है कि आरोपी के पास से एक मोबाइल बरामद हुआ है। इस फोन से ही उसने अपने कुछ साथियों के साथ किसी की हत्या कर जातीय हिंसा फैलाने की तैयारी की थी। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया। उसके साथियों की तलाश की जा रही है। 
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पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने गुरुवार को साजिश का खुलासा करते हुए बताया कि पट्टी तहसील के धुंई और गोविंदपुर में हुई हिंसा के मास्टरमाइंड हरिकेश पटेल पुत्र नन्हे पटेल निवासी गोविंदपुर को स्वॉट टीम की मदद से पट्टी व देवसरा पुलिस ने दबोच लिया।
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बीते 22 मई को धुंई गांव निवासी रामआसरे तिवारी पुत्र शारदा तिवारी और गोविंदपुर के नन्हे वर्मा पुत्र सीताराम वर्मा के बीच विवाद हो गया था। इसमें मारपीट हुई थी। घटना के बाद आरोपियों की तलाश में गोविंदपुर गांव पहुंची पुलिस पर हमला किया गया था।

दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास चल रहा था। घटना के बाद जातीय हिंसा की अफवाह फैलाई गई। सियासी रंग देने का भी प्रयास किया गया। जातीय हिंसा की अफवाह फैलाकर 4 जून को बवाल कराने की साजिश रची गई थी। गोविंदपुर निवासी हरिकेश पटेल ने पंचायत भवन भोपालपुर के इर्द-गिर्द रास्तों पर अपने लोगों को खड़ा किया था।

मौका पाकर किसी की भी हत्या करने की साजिश रची थी। ताकि स्थानीय राजनैतिक लाभ मिल सके और लोगों के मध्य जातीय संघर्ष हो जाए। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। जिससे वहां मौजूद लोग भाग निकले। पट्टी पुलिस ने हरिकेश पटेल समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। पूछताछ में हरिकेश पटेल ने बताया कि 21 मई को रामआसरे तिवारी की गाय उसके खीरे के खेत में आ गई।

इसे लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई थी। मामले को मुद्दा बनाकर राजनैतिक लाभ लेने के लिए 21 मई को उसने पंचायत बुलाई। बाद में अफवाह फैलाई कि ग्राम धुंई के लोग हम लोगों के साथ गांव में आकर मारपीट कर रहे हैं। मारपीट में घायल प्रधान पुत्र अनिल तिवारी के कोतवाली जाने पर अपने लोगों के साथ उसके घर पर चढ़ाई कर दी थी। पुलिस फोर्स पर भी हमला बोला था।

भागने के दौरान गांव के बद्री वर्मा पुत्र रसली वर्मा निवासी गोविंदपुर के छप्पर में आग लगवा दी। इसके बाद वह सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक सूचना देते जातीय हिंसा की साजिश रचने लगा। ताकि बवाल होने के थबाद वह उसका राजनैतिक लाभ ले सके।

4 जून को भी उसने अपने साथियों के साथ मिलकर बवाल की साजिश रची। गांव के राजकुमार सरोज ने भी ऐसी वारदात को अंजाम देने के लिए कहा था। पुलिस हरिकेश को जेल भेजने के बाद अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। 

जातीय विद्वेष फैलाकर बड़ा नेता बनना चाहता था हरिकेश

मामूली विवाद को तूल देकर जातीय हिंसा की साजिश रचने वाला हरिकेश पटेल भले बेरोजगार है, लेकिन सपने बहुत बड़े हैं। उसने अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए जिले में बड़ा बवाल कराने की ठान ली थी। वह बवाल को जातीय हिंसा से जोड़कर बड़ा नेता बनना चाहता था।

पुलिस के अनुसार हरिकेश ने मवेशियों के खेत में जाने को लेकर हुए विवाद को लगातार तूल दिया। उसने समाज के नेताओं के साथ ही पिछड़ों की राजनीति करने वालों को भी उकसाने के लिए दूसरों की मदद ली।

जातीय हिंसा में संघर्ष के नाम पर मांगी आर्थिक मदद

पुलिस के मुताबिक हरिकेश पटेल ने जातीय हिंसा की साजिश रचने के साथ खुद की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए भी योजना बना डाली। उसने अपनी मां सीता देवी के बैंक खाते का नंबर सोशल मीडिया पर वायरल कराकर समाज के लोगों से मदद मांगी।


वह पुलिस प्रशासन द्वारा घर पर की गई तोडफ़ोड़ और महिलाओं के साथ हो रहे जुल्म की फर्जी खबरें सोशल मीडिया पर वायरल करता रहा। गांव की महिलाओं से धरना दिलवाकर फोटो वायरल किया। 15 दिन के भीतर उसकी मां के खाते में 22 हजार रुपये लोगों ने भेजे। पुलिस ने मोबाइल भी उसके कब्जे से बरामद कर लिया।
 
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