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मुश्किल में पुलिस की साख
Pratapgarh
Updated Tue, 20 Aug 2013 05:34 AM IST
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प्रतापगढ़। जिले में दबंग खुलकर मनमानी कर रहे हैं और पुलिस कार्रवाई तक नहीं कर पा रही है। जन सामान्य को सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली पुलिस अपने बचाव में नाकाम हो चुकी है। सीओ कुंडा जियाउल हक की हत्या के बाद से खाकी पर हमले का सिलसिला थम नहीं रहा है। नेताओं की धौंस के चलते आला अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। पिटने के बाद भी दरोगा और सिपाही एफआईआर दर्ज कराने से परहेज कर रहे हैं।
सीओ कुंडा जियाउलहक की हत्या 2 मार्च की रात हथिगंवा थाना क्षेत्र के बलीपुर में हुई थी। इस मामले में खाकी की जितनी फजीहत हुई उतनी जिले के इतिहास में शायद कभी नहीं हुई। सीओ के सभी साथी मौके से भाग निकले। मात्र एक पखवारे बाद हथिगंवा थाना क्षेत्र में ही जमीन के विवाद को लेकर मौके पर पहुंचे एसओ और सीओ से लोग भिड़ गए। इस मामले में कुछ लोगों को पाबंद जरूर किया गया, लेकिन पुलिस पर हमले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अगले माह कुंडा इलाके के ही करेंटी गांव के पास वाहन दुर्घटना के बाद उग्र हुई भीड़ पुलिस से भिड़ गई। इस मामले में लोक व्यवस्था बाधित करने की रिपोर्ट दर्ज की गई, लेकिन पुलिस पर हमला दर्ज नहीं किया गया। इस माह तीन दिन पहले महेशगंज के मछेहा गांव में पुलिस पर हमला किया गया था।
लालगंज सर्किल की पुलिस भी दबंगों से नहीं बच सकी। लालगंज कोतवाली के दो दरोगा उदयपुर थाना क्षेत्र में एक ट्रैक्टर कब्जे में लेने गए थे। ग्रामीणों ने दोनाें को बंधक बना लिया और बाद में पुलिस बल के पहुंचने के बाद वे मुक्त हो सके थे। मानधाता के दो सिपाही जेठवारा इलाके में एक चौकीदार के घर गए थे। वहां पर ग्रामीणों ने उन्हें बंधक बना लिया और वे देर रात छूट सके।
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शहर में तो खाकी पर हमले की लंबी दास्तान है। 31 जुलाई को पांच आरोपियों को पेशी पर लेकर आए कंधई थाने के एसआई और चार सिपाहियाें की पिटाई की गई। इस मामले में पुलिस अधिकारियों की अनदेखी खासी चर्चा में रही। यही कारण रहा कि बाद में इसकी रिपोर्ट भी नहीं लिखाई गई। सावन के दूसरे सोमवार को कांवड़ियाें के बवाल में कोतवाल पर हमला किया गया। चौकी प्रभारी का सिर फोड़ा गया और चीता मोबाइल की बाइक फूंक दी गई। इसमें एफआईआर तो लिखी गई लेकिन एक भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। बिहारगंज बाजार और पृथ्वीगंज बाजार में भी जाम और बवाल में खाकी की खासी फजीहत हुई। कोहंडौर में भी एक युवती की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में एक सिपाही को जनाक्रोश झेलना पड़ा था। उसकी रिपोर्ट तो लिखी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। ताबड़तोड़ हमलाें से पुलिस विभाग में खासी हताशा दिख रही है। नगर कोतवाली महुली की घटना ने एक बार फिर खाकी के इकबाल को चुनौती दी है।
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सीओ कुंडा जियाउलहक की हत्या 2 मार्च की रात हथिगंवा थाना क्षेत्र के बलीपुर में हुई थी। इस मामले में खाकी की जितनी फजीहत हुई उतनी जिले के इतिहास में शायद कभी नहीं हुई। सीओ के सभी साथी मौके से भाग निकले। मात्र एक पखवारे बाद हथिगंवा थाना क्षेत्र में ही जमीन के विवाद को लेकर मौके पर पहुंचे एसओ और सीओ से लोग भिड़ गए। इस मामले में कुछ लोगों को पाबंद जरूर किया गया, लेकिन पुलिस पर हमले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अगले माह कुंडा इलाके के ही करेंटी गांव के पास वाहन दुर्घटना के बाद उग्र हुई भीड़ पुलिस से भिड़ गई। इस मामले में लोक व्यवस्था बाधित करने की रिपोर्ट दर्ज की गई, लेकिन पुलिस पर हमला दर्ज नहीं किया गया। इस माह तीन दिन पहले महेशगंज के मछेहा गांव में पुलिस पर हमला किया गया था।
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लालगंज सर्किल की पुलिस भी दबंगों से नहीं बच सकी। लालगंज कोतवाली के दो दरोगा उदयपुर थाना क्षेत्र में एक ट्रैक्टर कब्जे में लेने गए थे। ग्रामीणों ने दोनाें को बंधक बना लिया और बाद में पुलिस बल के पहुंचने के बाद वे मुक्त हो सके थे। मानधाता के दो सिपाही जेठवारा इलाके में एक चौकीदार के घर गए थे। वहां पर ग्रामीणों ने उन्हें बंधक बना लिया और वे देर रात छूट सके।
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शहर में तो खाकी पर हमले की लंबी दास्तान है। 31 जुलाई को पांच आरोपियों को पेशी पर लेकर आए कंधई थाने के एसआई और चार सिपाहियाें की पिटाई की गई। इस मामले में पुलिस अधिकारियों की अनदेखी खासी चर्चा में रही। यही कारण रहा कि बाद में इसकी रिपोर्ट भी नहीं लिखाई गई। सावन के दूसरे सोमवार को कांवड़ियाें के बवाल में कोतवाल पर हमला किया गया। चौकी प्रभारी का सिर फोड़ा गया और चीता मोबाइल की बाइक फूंक दी गई। इसमें एफआईआर तो लिखी गई लेकिन एक भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। बिहारगंज बाजार और पृथ्वीगंज बाजार में भी जाम और बवाल में खाकी की खासी फजीहत हुई। कोहंडौर में भी एक युवती की बलात्कार के बाद हत्या के मामले में एक सिपाही को जनाक्रोश झेलना पड़ा था। उसकी रिपोर्ट तो लिखी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। ताबड़तोड़ हमलाें से पुलिस विभाग में खासी हताशा दिख रही है। नगर कोतवाली महुली की घटना ने एक बार फिर खाकी के इकबाल को चुनौती दी है।