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अतिक्रमण से सिकुड़ीं शहर की सड़कें
Pratapgarh
Updated Fri, 10 May 2013 05:30 AM IST
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प्रतापगढ़। अतिक्रमण से शहर की सड़कें संकरी हो गई हैं। पटरी तक दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है। खरीदारी करने आने वालों तक के लिए रास्ता नहीं है। इससे लोग अब शहर के प्रमुख बाजारों में आने से बचने लगे हैं। मगर दुकानदारों पर इसका कोई असर नहीं है। पालिका परिषद और प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। व्यापारी नेता भी इस मुद्दे पर खामोश हैं।
छोटे से शहर का स्वरूप बदतर हो चुका है। सीवर लाइन के लिए सड़कों की खोदाई कोढ़ में खाज बन चुकी है। शहर की ज्यादातर सड़कों की पटरियां दुकानदारों के कब्जे में हैं। पंजाबी मार्केट की दशा बदतर है। पटरी तक लोगों ने दुकान लगा रखी है। नाम मात्र की बची सड़क पर यात्रियों का चलना दुश्वार हो गया है। अतिक्रमण का कोढ़ जिला अस्पताल के गेट तक दिखता है। ठेला, खोमचे गेट पर खड़े कर कारोबार किया जाता है। रही-सही कसर पूरी कर देते हैं रिक्शावाले। वे सड़क पर ही सवारी बैठाते हैं। इससे अस्पताल जाने वाले मरीजों को दिक्कत होती है। चौक घंटा घर की दशा भी बदतर है। वहां पटरियां ही नहीं सड़क के काफी हिस्से पर दुकानदारों का कब्जा है। सुबह से शाम तक उन सड़कों पर चार पहिया तो दूर बाइक तक से निकल पाना मुश्किल हो गया है। एसबीआई के सामने तो हद ही हो गई है। वहां दस बजते ही बैंक की बाउंड्री के बाहर सड़क पर दर्जनों बाइकें खड़ी हो जाती हैं। इससे आवागमन प्रभावित रहता है। स्टेशन रोड पर भी अतिक्रमण का बोलबाला है। वहां तो पंजाबी मार्केट की तरह सड़क पर ही ठेले पर व्यापारी सामान बेंचते रहते हैं। बाबागंज से निर्मल तिराहे तक की पटरियां दुकानदारों के कब्जे में हैं जबकि वह सड़क इलाहाबाद-सुल्तानपर हाईवे है। सड़क की पटरियों से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी पालिका जिला प्रशासन की मानता है। व्यापारी नेता अतिक्रमण की वजह प्रशासन और पालिका की उपेक्षा करार देते हैं।
मुख्य बाजारों में अतिक्रमण से बड़े व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। जाम में फंसने के भय से लोग अधिकतर सामान छोटी दुकानों से खरीद लेते हैं। ज्यादा या थोक सामान खरीदने के लिए ही लोग चौक, पंजाबी मार्केट पहुंचते हैं।
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नगर पालिका अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह का कहना है कि अतिक्रमण हटाने का काम प्रशासन शुरू करे। पालिका उनकी मदद में पीछे नहीं रहेगी। शहर की सड़कों का अतिक्रमण मुक्त होना बेहद जरूरी है। मगर लिखने के बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
व्यापार मंडल अध्यक्ष मंजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि प्रशासन से लेकर पालिकाध्यक्ष तक से अतिक्रमण हटवाने की मांग की गई। प्रशासन ने एक बार टीम भी बनाई। मगर अफसरों का तबादला होते ही सारा प्रयास मिट्टी में मिल गया। अतिक्रमण से व्यापार चौपट हो रहा है।
डीएम विद्याभूषण का कहना है कि शहर में अतिक्रमण अचानक तो हुआ नहीं। शुरुआती दौर में ही केयर करना चाहिए था। यदि व्यापार मंडल व पालिका कार्रवाई की मांग उनसे करती है तो वह अतिक्रमण हटवाने का काम जरूर करेंगे। शहर स्वस्थ व खूबसूरत होना चाहिए।
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छोटे से शहर का स्वरूप बदतर हो चुका है। सीवर लाइन के लिए सड़कों की खोदाई कोढ़ में खाज बन चुकी है। शहर की ज्यादातर सड़कों की पटरियां दुकानदारों के कब्जे में हैं। पंजाबी मार्केट की दशा बदतर है। पटरी तक लोगों ने दुकान लगा रखी है। नाम मात्र की बची सड़क पर यात्रियों का चलना दुश्वार हो गया है। अतिक्रमण का कोढ़ जिला अस्पताल के गेट तक दिखता है। ठेला, खोमचे गेट पर खड़े कर कारोबार किया जाता है। रही-सही कसर पूरी कर देते हैं रिक्शावाले। वे सड़क पर ही सवारी बैठाते हैं। इससे अस्पताल जाने वाले मरीजों को दिक्कत होती है। चौक घंटा घर की दशा भी बदतर है। वहां पटरियां ही नहीं सड़क के काफी हिस्से पर दुकानदारों का कब्जा है। सुबह से शाम तक उन सड़कों पर चार पहिया तो दूर बाइक तक से निकल पाना मुश्किल हो गया है। एसबीआई के सामने तो हद ही हो गई है। वहां दस बजते ही बैंक की बाउंड्री के बाहर सड़क पर दर्जनों बाइकें खड़ी हो जाती हैं। इससे आवागमन प्रभावित रहता है। स्टेशन रोड पर भी अतिक्रमण का बोलबाला है। वहां तो पंजाबी मार्केट की तरह सड़क पर ही ठेले पर व्यापारी सामान बेंचते रहते हैं। बाबागंज से निर्मल तिराहे तक की पटरियां दुकानदारों के कब्जे में हैं जबकि वह सड़क इलाहाबाद-सुल्तानपर हाईवे है। सड़क की पटरियों से अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी पालिका जिला प्रशासन की मानता है। व्यापारी नेता अतिक्रमण की वजह प्रशासन और पालिका की उपेक्षा करार देते हैं।
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मुख्य बाजारों में अतिक्रमण से बड़े व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। जाम में फंसने के भय से लोग अधिकतर सामान छोटी दुकानों से खरीद लेते हैं। ज्यादा या थोक सामान खरीदने के लिए ही लोग चौक, पंजाबी मार्केट पहुंचते हैं।
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नगर पालिका अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह का कहना है कि अतिक्रमण हटाने का काम प्रशासन शुरू करे। पालिका उनकी मदद में पीछे नहीं रहेगी। शहर की सड़कों का अतिक्रमण मुक्त होना बेहद जरूरी है। मगर लिखने के बाद भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
व्यापार मंडल अध्यक्ष मंजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि प्रशासन से लेकर पालिकाध्यक्ष तक से अतिक्रमण हटवाने की मांग की गई। प्रशासन ने एक बार टीम भी बनाई। मगर अफसरों का तबादला होते ही सारा प्रयास मिट्टी में मिल गया। अतिक्रमण से व्यापार चौपट हो रहा है।
डीएम विद्याभूषण का कहना है कि शहर में अतिक्रमण अचानक तो हुआ नहीं। शुरुआती दौर में ही केयर करना चाहिए था। यदि व्यापार मंडल व पालिका कार्रवाई की मांग उनसे करती है तो वह अतिक्रमण हटवाने का काम जरूर करेंगे। शहर स्वस्थ व खूबसूरत होना चाहिए।