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आस्था की प्रतीक हैं मां चंद्रिका देवी
Pratapgarh
Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
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प्रतापगढ़। जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम के कोने पर मां चंद्रिका देवी का मंदिर है। भक्तों की आस्था की प्रतीक मां चंद्रिका देवी की मान्यता के पीछे कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि ठोस पौराणिक आधार है। यही कारण है कि न सिर्फ नवरात्र बल्कि प्रत्येक मंगलवार को यहां श्रद्धालुआें की भारी भीड़ उमड़ती है। भगवती चंद्रिका देवी का मंदिर प्रतापगढ़-अठेहा मुख्य सड़क पर स्थित है। यह धाम जनपद की धार्मिक पहचान भी है। इस धाम का उल्लेख देवी भागवत में मिलता है। उक्त ग्रंथ में सई का पूर्व नाम चंडिका और इसके उत्तर में इस धाम के मौजूद होने का उल्लेख है। कोल का बड़ा नाला इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन काल में सई नदी इस धाम के समीप ही बहती थी। देवी भागवत में ही यहां विद्यमान मां चंद्रिका को मां पार्वती का विवाहित स्त्री रूप माना गया है। इससे यहां सिंदूर आदि चढ़ता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने छोटे भाई लक्ष्मण तथा जानकी के साथ इसी मार्ग से वन गमन किया था।
देवी के गर्भ गृह के समय से अनुमान का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। हालांकि एक लोककथा जरूर प्रचलित है। उसके अनुसारस्थानीय संडवा गांव की दो बहनें चंद्रिका और कालिका, जिन्हें देवी की सिद्धि प्राप्त थी, में से चंद्रिका ने इस स्थान को अपना सिद्धिस्थल बनाया जबकि दूसरी बहन कालिका के नाम पर अमेठी जनपद में धाम है। सिद्धिस्थल होने के कारण यह धाम चंद्रिका धाम के नाम से मशहूर है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह वैदिक काल से ही है। गर्भगृह पर बने मंदिर की दीवारों की चौड़ाई एक मीटर से भी अधिक है। बताते हैं कि पहले यहां केवल गर्भगृह ही था। मुरादें पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने मंदिर का विस्तार कराया। इस समय यहां मां चंद्रिका का एक भव्य मंदिर मौजूद है। शारदीय और वासंतिक नवरात्र के अलावा यहां प्रत्येक मंगलवार को मेला लगता है जिसमें भक्तों की भारी भीड़ होती है।
आदि शक्ति मां जगदंबा के पूजन का महत्वपूर्ण समय नवरात्र मंगलवार से प्रारम्भ हो रहा है। मां की आराधना के लिए क्षेत्र में जोरों से तैयारियां चल रही हैं। पूरे जिले में उत्साह का माहौल है। सोमवार को शहर के साथ ही कस्बों और गांवों तक के सभी प्रमुख बाजारों में पूजा पंडालों को अंतिम रूप देने में भक्त पूरे दिन जुटे रहे। इसके अलावा बेल्हा देवी, चंद्रिका देवी, वाराही देवी, ज्वालामुखी देवी, कालिका देवी, चंडी सहित आदि धामों में दर्शन-पूजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
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मंगलवार की सुबह से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां भगवती का पूजन अर्चन शुरू होगा। इसके लिए घरों में भी लोगों ने तैयारियां कर ली हैं। शक्ति की देवी दुर्गा का शारदीय नवरात्र पर लोग विशेष पूजन अर्चन करते हैं। इसके लिए कुंडा, लालगंज, पट्टी, रानीगंज समेत सभी प्रमुख कस्बों और बाजारों में पूजन अर्चन के लिए कई दिनों से पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं। पंडालों को भक्त सोमवार को अंतिम रूप देने में लगे रहे। मूर्तियां देर शाम तक ज्यादातर पंडालों में मूर्तियां पहुंच गईं। मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मूर्ति स्थापना के साथ ही पूजन कार्यक्रम शुरू होगा। सोमवार को दिन भर बाजारों में भीड़ जमा रही। पूजन के पूर्व ही पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगने लगा है।
सोमवार को प्रतापगढ़ शहर पूरे दिन जय माता दी के जयकारे से गूंजता रहा। दूरदराज से आए ग्रामीण धूमधाम से दुर्गाजी की मूर्ति ट्रैक्टर और ट्रक पर लादकर ले गए। गाजे बाजे संग नाचते गाते भक्तों ने मां के जयकारे लगा झूमते हुए खुशी का इजहार किया। मंगलवार से नवरात्र शुरू हो रहा है। इस कारण सोमवार की सुबह से ही प्रतिमाएं ले जाने के लिए भीड़ जमा हो गई थी। पूरा ग्रामीण इलाका मां के जयकारों से गूंज रहा था। सड़कों पर भक्तों की भारी भीड़ दिखी। उत्साह से भरे युवा सड़कों पर इस तरह उतरे कि आवागमन तक बाधित हो गया। यही हाल शहर का था। हर तरफ मां के जयकारे लग रहे थे। सोमवार को 900 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं भक्त पंडालों में ले गए।
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देवी के गर्भ गृह के समय से अनुमान का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। हालांकि एक लोककथा जरूर प्रचलित है। उसके अनुसारस्थानीय संडवा गांव की दो बहनें चंद्रिका और कालिका, जिन्हें देवी की सिद्धि प्राप्त थी, में से चंद्रिका ने इस स्थान को अपना सिद्धिस्थल बनाया जबकि दूसरी बहन कालिका के नाम पर अमेठी जनपद में धाम है। सिद्धिस्थल होने के कारण यह धाम चंद्रिका धाम के नाम से मशहूर है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह वैदिक काल से ही है। गर्भगृह पर बने मंदिर की दीवारों की चौड़ाई एक मीटर से भी अधिक है। बताते हैं कि पहले यहां केवल गर्भगृह ही था। मुरादें पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने मंदिर का विस्तार कराया। इस समय यहां मां चंद्रिका का एक भव्य मंदिर मौजूद है। शारदीय और वासंतिक नवरात्र के अलावा यहां प्रत्येक मंगलवार को मेला लगता है जिसमें भक्तों की भारी भीड़ होती है।
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आदि शक्ति मां जगदंबा के पूजन का महत्वपूर्ण समय नवरात्र मंगलवार से प्रारम्भ हो रहा है। मां की आराधना के लिए क्षेत्र में जोरों से तैयारियां चल रही हैं। पूरे जिले में उत्साह का माहौल है। सोमवार को शहर के साथ ही कस्बों और गांवों तक के सभी प्रमुख बाजारों में पूजा पंडालों को अंतिम रूप देने में भक्त पूरे दिन जुटे रहे। इसके अलावा बेल्हा देवी, चंद्रिका देवी, वाराही देवी, ज्वालामुखी देवी, कालिका देवी, चंडी सहित आदि धामों में दर्शन-पूजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया।
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मंगलवार की सुबह से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां भगवती का पूजन अर्चन शुरू होगा। इसके लिए घरों में भी लोगों ने तैयारियां कर ली हैं। शक्ति की देवी दुर्गा का शारदीय नवरात्र पर लोग विशेष पूजन अर्चन करते हैं। इसके लिए कुंडा, लालगंज, पट्टी, रानीगंज समेत सभी प्रमुख कस्बों और बाजारों में पूजन अर्चन के लिए कई दिनों से पूजा पंडाल बनाए जा रहे हैं। पंडालों को भक्त सोमवार को अंतिम रूप देने में लगे रहे। मूर्तियां देर शाम तक ज्यादातर पंडालों में मूर्तियां पहुंच गईं। मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मूर्ति स्थापना के साथ ही पूजन कार्यक्रम शुरू होगा। सोमवार को दिन भर बाजारों में भीड़ जमा रही। पूजन के पूर्व ही पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में रंगने लगा है।
सोमवार को प्रतापगढ़ शहर पूरे दिन जय माता दी के जयकारे से गूंजता रहा। दूरदराज से आए ग्रामीण धूमधाम से दुर्गाजी की मूर्ति ट्रैक्टर और ट्रक पर लादकर ले गए। गाजे बाजे संग नाचते गाते भक्तों ने मां के जयकारे लगा झूमते हुए खुशी का इजहार किया। मंगलवार से नवरात्र शुरू हो रहा है। इस कारण सोमवार की सुबह से ही प्रतिमाएं ले जाने के लिए भीड़ जमा हो गई थी। पूरा ग्रामीण इलाका मां के जयकारों से गूंज रहा था। सड़कों पर भक्तों की भारी भीड़ दिखी। उत्साह से भरे युवा सड़कों पर इस तरह उतरे कि आवागमन तक बाधित हो गया। यही हाल शहर का था। हर तरफ मां के जयकारे लग रहे थे। सोमवार को 900 से अधिक दुर्गा प्रतिमाएं भक्त पंडालों में ले गए।