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विवाह रजिस्ट्रेशन में रुचि नहीं ले रहे दंपति
Updated Sat, 13 Jan 2018 07:53 PM IST
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प्रतापगढ़। शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होने के बाद भी दंपति इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कराने के लिए वही जोड़े आ रहे हैं, जिन्हें कानूनी तौर पर जरूरत पड़ रही है। हालात यह हैं कि बीते 30 दिसंबर 2017 तक सिर्फ 321 जोड़ों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है।
अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर के माह में शादी-विवाह का दौर तेजी से चला। नवंबर और दिसंबर माह में कुछ तिथियां ऐसी थीं जब बैंड पार्टी और डीजे तक नहीं मिल रहे थे। शहर से गांव तक शुभ मुहूर्त में मात्र तीन माह में हजारों युवक-युवतियां शादी के बंधन में बंध गए। मगर शादी का पंजीकरण कराने में लोग रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जिन्हें वीजा और पासपोर्ट बनवाना है, वही मजबूरी में रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। जिले की पांचों तहसीलों में स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या 321 है। यह आंकड़ा 30 दिसंबर 2017 तक का है। सात फेरे लेने के एक वर्ष के अंदर जो दूल्हा-दुल्हन रजिस्ट्रेशन कराते हैं, उन्हें मात्र दस रुपये शुल्क अदा करना होता है। मगर एक वर्ष के बाद प्रतिवर्ष 50 रुपये की दर से विलंब शुल्क अदा करना होगा।
शादी पंजीकरण को लेकर गांव के लोग पूरी तरह अनजान हैं। इससे होने वाले फायदे की भी जानकारी उन्हें नहीं है। इसलिए जब तक गांव के लोगों को जागरूक नहीं किया जाता है, तब तक रजिस्ट्रेशन के प्रति लोगों का रूझान नहीं बढ़ेगा। ऑनलाइन शादी पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले दूल्हा-दुल्हन को प्रमाणपत्र रजिस्ट्री ऑफिस से ही मिलता है। अधिकारी पति-पत्नी की फोटो की मिलान करने के बाद भी हस्ताक्षर करते हैं। इसलिए प्रमाणपत्र लेने के लिए पति-पत्नी को एक साथ रजिस्ट्री कार्यालय जाना पड़ता है। वहीं एआईजी स्टांप अविनाश पांडेय का कहना है कि शादी का रजिस्ट्रेशान कराना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। आने वाले दिनों में इसे और प्रभावी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर के माह में शादी-विवाह का दौर तेजी से चला। नवंबर और दिसंबर माह में कुछ तिथियां ऐसी थीं जब बैंड पार्टी और डीजे तक नहीं मिल रहे थे। शहर से गांव तक शुभ मुहूर्त में मात्र तीन माह में हजारों युवक-युवतियां शादी के बंधन में बंध गए। मगर शादी का पंजीकरण कराने में लोग रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जिन्हें वीजा और पासपोर्ट बनवाना है, वही मजबूरी में रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। जिले की पांचों तहसीलों में स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या 321 है। यह आंकड़ा 30 दिसंबर 2017 तक का है। सात फेरे लेने के एक वर्ष के अंदर जो दूल्हा-दुल्हन रजिस्ट्रेशन कराते हैं, उन्हें मात्र दस रुपये शुल्क अदा करना होता है। मगर एक वर्ष के बाद प्रतिवर्ष 50 रुपये की दर से विलंब शुल्क अदा करना होगा।
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शादी पंजीकरण को लेकर गांव के लोग पूरी तरह अनजान हैं। इससे होने वाले फायदे की भी जानकारी उन्हें नहीं है। इसलिए जब तक गांव के लोगों को जागरूक नहीं किया जाता है, तब तक रजिस्ट्रेशन के प्रति लोगों का रूझान नहीं बढ़ेगा। ऑनलाइन शादी पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले दूल्हा-दुल्हन को प्रमाणपत्र रजिस्ट्री ऑफिस से ही मिलता है। अधिकारी पति-पत्नी की फोटो की मिलान करने के बाद भी हस्ताक्षर करते हैं। इसलिए प्रमाणपत्र लेने के लिए पति-पत्नी को एक साथ रजिस्ट्री कार्यालय जाना पड़ता है। वहीं एआईजी स्टांप अविनाश पांडेय का कहना है कि शादी का रजिस्ट्रेशान कराना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। आने वाले दिनों में इसे और प्रभावी बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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