{"_id":"64177b651ce3738a4c09d574","slug":"65-hour-strike-creates-outcry-for-electricity-people-yearn-for-water-pratapgarh-news-c-3-1-82401-2023-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh News: 65 घंटे की हड़ताल से बिजली के लिए मचा हाहाकार, पानी के लिए तरसे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh News: 65 घंटे की हड़ताल से बिजली के लिए मचा हाहाकार, पानी के लिए तरसे लोग
Mon, 20 Mar 2023 02:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Mon, 20 Mar 2023 02:45 AM IST
विज्ञापन
लालगंज के लालूपुर बनवारी में हैंडपंप पर पानी भरने जुटे ग्रामीण। संवाद
बिजली कर्मियों की हड़ताल के आगे जिला प्रशासन बेबस नजर आया। उपकेंद्रों पर अफसरों और पुलिस की तैनाती करने के बाद भी विद्युत बहाल करने में फेल रहा। ग्रामीण इलाकों में 65 घंटे से बिजली गुल होने से इनवर्टर, मोबाइल, ई-रिक्शा और कल- कारखाने ठप हो गए। शनिवार को तीन बजे तेज हवाओं के साथ बरसात होने से आधा शहर अंधेरे डूबा रहा। करीब चार बजे हड़ताल खत्म होने की जानकारी होने पर उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली।
उप्र विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के 72 घंटे के हड़ताल के आह्वान पर पहली बार ऐसा देखने को मिला कि ग्रामीण इलाकों में 65 घंटे बिजली गुल रही। जिला प्रशासन ने उपकेंद्रों पर अफसरों और पुलिस कर्मियों की तैनाती करने के साथ ही लेखपाल और सफाई कर्मचारियों की तैनाती की थी। मगर विद्युत व्यवस्था बहाल करने में पूरी तरह फेल रहे।
शहर और गांव में बिजली नहीं होने से सबसे अधिक समस्या पानी की रही। दहिलामऊ, गायघाट, शिक्षक कालोनी, मीराभवन, करनपुर, पुलिस लाइन, शिवजीपुरम, रामजीपुरम में शनिवार को तीन बजे बिजली गायब होने के बाद समाचार लिखे जाने तक बिजली नहीं आई थी।
विज्ञापन
कुंडा , पट्टी, लालगंज, रानीगंज के ग्रामीण इलाकों में तीन दिन से बिजली नहीं है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बलीपुर में बिजली नहीं होने पर सभासद मालती सिंह ने जनरेटर से समर्सिबल चलवाकर मोहल्ले के लोगों को पानी भरने का मौका दिया। जबकि नगर पालिका ने भी टैंकर से मोहल्लों में पानी भेजा। टैंकर पहुंचते ही पानी के लोग दौड़ पड़ते थे।
रविवार की सुबह बिजली कर्मचारियों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हेमंत नंदन ओझा को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। उनके के बाहर पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया। इधर चिलबिला स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर दिन भर कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा।
बृहस्पतिवार रात से गायब बिजली रविवार को शाम तक नहीं आई बिजली
बिजली कर्मचारियों के 72 घंटे हड़ताल पर चले जाने से ग्रामीण इलाकों में अंधेरा छाया हुआ है। बेलखरनाथधाम में रात दस बजे आपूर्ति बंद होने के बाद रविवार को शाम तक बिजली नहीं आई थी। गांव में लगे समरसिबल पंप ठप हो गए। मोबाइल शो पीस बन गए। इनवर्टर भी बंद हो गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बीआरसी केंद्र, विकास खंड कार्यालय ,आंगनबाड़ी सेंटर,शीतलागंज डाक घर सहित अन्य सरकारी संस्थान बिजली ना आने की वजह से प्रभावित रहे।
ग्रामीणों ने घेरा विद्युत उपकेंद्र
विद्युत आपूर्ति ठप होने से नाराज विद्युत उपभोक्ताओं ने बिहार व बहोरिकपुर उप केन्द्र का रविवार को घेराव किया । आधे घंटे तक शोर शराबा चलता रहा। विद्युत उप केन्द्र पर कोई कर्मचारी के न मिलने से नाराज सैकड़ों विद्युत उपभोक्ता कुंडा स्थित एसडीओ कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। मगर पुलिस तैनात होने के कुछ ही देर में चले गए।
56 घंटे बाद बहाल हुई चिलबिला फीडर
फीडर से सदर, संडवा चंद्रिका, मंगरौरा ब्लॉक के सैकड़ों गांव की बिजली 56 घंटे बाद बहाल हुई। हड़ताल समाप्त होने की जानकारी होते ही चिलबिला उपकेंद्र से सभी फीडरों की सप्लाई प्रारंभ होने पर उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है।
गांव और शहर के मोबाइल बने खिलौना
शहर और गांव की बिजली गुल होने से मोबाइल खिलौना बने रहे। आधे शहर में बिजली नहीं होने से रविवार की सुबह लोग मोबाइल लेकर निकल पड़े और चार्ज करने के लिए एक-दूसरे दुकान का चक्कर लगाते रहे। ग्रामीण इलाकों में मोबाइल चार्ज करने के लिए लोगों को 20-20 रुपये चुकता करने पड़े। अंतू, संडवा चंद्रिका, सांगीपुर, अठेहा, उदयपुर, शीतलागंज, दीवानगंज में लोग दुकानों पर मोबाइल चार्ज करने के लिए लाइन में लगे हुए थे।
आधे घंटे के लिए दो-दो सौ रुपये की हुई वसूली
शहर और गांव में पानी के लिए परेशान लोगों ने आधे घंटे लिए जनरेटर संचालकों को 200-200 रुपये का भुगतान किया। ग्रामीण इलाकों और शहर के कई मोहल्लों में लोग जनरेटर लेकर घूम रहे थे। रविवार को बिजली नहीं आने से लोगों को मजबूरी में जनरेटर से समर्सिबल चलवाना पड़ा। हालांकि इससे जनरेटर मालिकों की खूब कमाई भी हुई।
विज्ञापन
उप्र विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के 72 घंटे के हड़ताल के आह्वान पर पहली बार ऐसा देखने को मिला कि ग्रामीण इलाकों में 65 घंटे बिजली गुल रही। जिला प्रशासन ने उपकेंद्रों पर अफसरों और पुलिस कर्मियों की तैनाती करने के साथ ही लेखपाल और सफाई कर्मचारियों की तैनाती की थी। मगर विद्युत व्यवस्था बहाल करने में पूरी तरह फेल रहे।
विज्ञापन
शहर और गांव में बिजली नहीं होने से सबसे अधिक समस्या पानी की रही। दहिलामऊ, गायघाट, शिक्षक कालोनी, मीराभवन, करनपुर, पुलिस लाइन, शिवजीपुरम, रामजीपुरम में शनिवार को तीन बजे बिजली गायब होने के बाद समाचार लिखे जाने तक बिजली नहीं आई थी।
विज्ञापन
कुंडा , पट्टी, लालगंज, रानीगंज के ग्रामीण इलाकों में तीन दिन से बिजली नहीं है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बलीपुर में बिजली नहीं होने पर सभासद मालती सिंह ने जनरेटर से समर्सिबल चलवाकर मोहल्ले के लोगों को पानी भरने का मौका दिया। जबकि नगर पालिका ने भी टैंकर से मोहल्लों में पानी भेजा। टैंकर पहुंचते ही पानी के लोग दौड़ पड़ते थे।
रविवार की सुबह बिजली कर्मचारियों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हेमंत नंदन ओझा को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। उनके के बाहर पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया। इधर चिलबिला स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर दिन भर कर्मचारियों का धरना-प्रदर्शन जारी रहा।
बृहस्पतिवार रात से गायब बिजली रविवार को शाम तक नहीं आई बिजली
बिजली कर्मचारियों के 72 घंटे हड़ताल पर चले जाने से ग्रामीण इलाकों में अंधेरा छाया हुआ है। बेलखरनाथधाम में रात दस बजे आपूर्ति बंद होने के बाद रविवार को शाम तक बिजली नहीं आई थी। गांव में लगे समरसिबल पंप ठप हो गए। मोबाइल शो पीस बन गए। इनवर्टर भी बंद हो गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बीआरसी केंद्र, विकास खंड कार्यालय ,आंगनबाड़ी सेंटर,शीतलागंज डाक घर सहित अन्य सरकारी संस्थान बिजली ना आने की वजह से प्रभावित रहे।
ग्रामीणों ने घेरा विद्युत उपकेंद्र
विद्युत आपूर्ति ठप होने से नाराज विद्युत उपभोक्ताओं ने बिहार व बहोरिकपुर उप केन्द्र का रविवार को घेराव किया । आधे घंटे तक शोर शराबा चलता रहा। विद्युत उप केन्द्र पर कोई कर्मचारी के न मिलने से नाराज सैकड़ों विद्युत उपभोक्ता कुंडा स्थित एसडीओ कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी करते रहे। मगर पुलिस तैनात होने के कुछ ही देर में चले गए।
56 घंटे बाद बहाल हुई चिलबिला फीडर
फीडर से सदर, संडवा चंद्रिका, मंगरौरा ब्लॉक के सैकड़ों गांव की बिजली 56 घंटे बाद बहाल हुई। हड़ताल समाप्त होने की जानकारी होते ही चिलबिला उपकेंद्र से सभी फीडरों की सप्लाई प्रारंभ होने पर उपभोक्ताओं ने राहत की सांस ली है।
गांव और शहर के मोबाइल बने खिलौना
शहर और गांव की बिजली गुल होने से मोबाइल खिलौना बने रहे। आधे शहर में बिजली नहीं होने से रविवार की सुबह लोग मोबाइल लेकर निकल पड़े और चार्ज करने के लिए एक-दूसरे दुकान का चक्कर लगाते रहे। ग्रामीण इलाकों में मोबाइल चार्ज करने के लिए लोगों को 20-20 रुपये चुकता करने पड़े। अंतू, संडवा चंद्रिका, सांगीपुर, अठेहा, उदयपुर, शीतलागंज, दीवानगंज में लोग दुकानों पर मोबाइल चार्ज करने के लिए लाइन में लगे हुए थे।
आधे घंटे के लिए दो-दो सौ रुपये की हुई वसूली
शहर और गांव में पानी के लिए परेशान लोगों ने आधे घंटे लिए जनरेटर संचालकों को 200-200 रुपये का भुगतान किया। ग्रामीण इलाकों और शहर के कई मोहल्लों में लोग जनरेटर लेकर घूम रहे थे। रविवार को बिजली नहीं आने से लोगों को मजबूरी में जनरेटर से समर्सिबल चलवाना पड़ा। हालांकि इससे जनरेटर मालिकों की खूब कमाई भी हुई।