{"_id":"5cb0da6ebdec2213f01bf659","slug":"51555094126-pratapgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नामांकन में तीन दिन बाकी, टिकट को लेकर पशोपेश में भाजपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नामांकन में तीन दिन बाकी, टिकट को लेकर पशोपेश में भाजपा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नामांकन में तीन दिन बाकी, टिकट को लेकर पशोपेश में भाजपा
बगावत की आशंका में अंतिम समय तक इंतजार के मूड में है शीर्ष नेतृत्व
नामांकन से एक दिन पहले या उसी दौरान घोषित किया जा सकता है प्रत्याशी
प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर भाजपा के रुख से टिकट के दावेदार भी हैरान
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ लोकसभा सीट के लिए 16 अप्रैल से नामांकन शुरू हो रहा है, लेकिन भाजपा अभी तक अपना प्रत्याशी नहीं तय कर सकी है। पार्टी के रुख से टिकट के दावेदार भी हैरान हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बगावत की आंशका में पार्टी अंतिम समय तक इंतजार के मूड में है। नामांकन से एक दिन पहले या उसी दौरान प्रत्याशी के नाम की घोषणा की जाएगी। जिससे विद्रोह के सुर को दबाने में आसानी हो।
बीते दिनों रानीगंज इलाके में आयोजित विजय संकल्प युवा सम्मेलन में पहुंचे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय ने जिले में किसी भी दल से गठबंधन न होने और पार्टी के कार्यकर्ता के ही चुनाव लडने की बात कहकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी थी। उनके इस बयान के बड़े राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। टिकट के दावेदारों की भी बेचैनी बढ़ गई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के बयान के बाद जिले में पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया के जनसत्ता दल से गठबंधन की संभावनाएं भी एक तरह से खारिज हो गईं। हालांकि अंदरखाने में चर्चा है कि अभी भी भाजपा के साथ उनकी बात चल रही है, लेकिन आधिकारिक रूप से कोई भी इसकी पुष्टि करने के लिए तैयार नहीं है। इधर, प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं होने से अब आम लोगों के साथ भाजपाई भी हैरत में हैं। पार्टी के रणनीतिकार दबी जुबान से कह रहे हैं कि जिले में टिकट को लेकर नेताओं में मची खींचतान और विरोधाभास को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व अंतिम समय में टिकट का फैसला करेगा। जिससे बगावत की आशंका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। नामांकन से एक-दो दिन पहले या फिर नामांकन शुरू होने के बाद प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया जा सकता है।
इनसेट
हर जुबान पर यही सवाल, आखिर कौन?
कांग्रेस से रत्ना सिंह और गठबंधन में सीट बसपा को जाने के बाद अशोक त्रिपाठी को लोकसभा का प्रभारी बनाने के बाद अब जिले के लोगों की नजर भाजपा के प्रत्याशी पर टिकी है। चर्चा तो कई नामों को लेकर चल रही है, लेकिन अभी तक प्रत्याशी तय नहीं हो सका है। शहर से ग्रामीण इलाके तक इन दिनों चौराहों और चाय-पान की दुकानों पर बस एक ही बहस छिड़ी है कि आखिर भाजपा से कौन? जीत-हार की चर्चा में मशगूल लोग कह रहे हैं कि भाजपा प्रत्याशी का ऐलान होने के बाद ही इसका ठीक से अंदाजा लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
इनसेट
टिकट को लेकर सोशल मीडिया पर खूब हो रहे दावे
प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी को लेकर इन दिनों जिले में जबरदस्त चर्चा छिड़ी है। सोशल मीडिया पर तो लोग टिकट पक्का भी कर दे रहे हैं। भाजपा नेता अनिल प्रताप सिंह, कैबिनेट मंत्री मोती सिंह, सांसद हरिबंश सिंह, पूर्व विधायक बृजेश सौरभ, संगमलाल गुप्ता के साथ अब कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के नाम की भी चर्चा शुरू हो गई है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि पार्टी जिले में फिर से प्रत्याशी के लिए सर्वे करा रही है। सामान्य या फिर पिछड़ी जाति से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
विज्ञापन
बगावत की आशंका में अंतिम समय तक इंतजार के मूड में है शीर्ष नेतृत्व
नामांकन से एक दिन पहले या उसी दौरान घोषित किया जा सकता है प्रत्याशी
प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर भाजपा के रुख से टिकट के दावेदार भी हैरान
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ लोकसभा सीट के लिए 16 अप्रैल से नामांकन शुरू हो रहा है, लेकिन भाजपा अभी तक अपना प्रत्याशी नहीं तय कर सकी है। पार्टी के रुख से टिकट के दावेदार भी हैरान हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि बगावत की आंशका में पार्टी अंतिम समय तक इंतजार के मूड में है। नामांकन से एक दिन पहले या उसी दौरान प्रत्याशी के नाम की घोषणा की जाएगी। जिससे विद्रोह के सुर को दबाने में आसानी हो।
बीते दिनों रानीगंज इलाके में आयोजित विजय संकल्प युवा सम्मेलन में पहुंचे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय ने जिले में किसी भी दल से गठबंधन न होने और पार्टी के कार्यकर्ता के ही चुनाव लडने की बात कहकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी थी। उनके इस बयान के बड़े राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। टिकट के दावेदारों की भी बेचैनी बढ़ गई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के बयान के बाद जिले में पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया के जनसत्ता दल से गठबंधन की संभावनाएं भी एक तरह से खारिज हो गईं। हालांकि अंदरखाने में चर्चा है कि अभी भी भाजपा के साथ उनकी बात चल रही है, लेकिन आधिकारिक रूप से कोई भी इसकी पुष्टि करने के लिए तैयार नहीं है। इधर, प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं होने से अब आम लोगों के साथ भाजपाई भी हैरत में हैं। पार्टी के रणनीतिकार दबी जुबान से कह रहे हैं कि जिले में टिकट को लेकर नेताओं में मची खींचतान और विरोधाभास को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व अंतिम समय में टिकट का फैसला करेगा। जिससे बगावत की आशंका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। नामांकन से एक-दो दिन पहले या फिर नामांकन शुरू होने के बाद प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया जा सकता है।
विज्ञापन
इनसेट
हर जुबान पर यही सवाल, आखिर कौन?
कांग्रेस से रत्ना सिंह और गठबंधन में सीट बसपा को जाने के बाद अशोक त्रिपाठी को लोकसभा का प्रभारी बनाने के बाद अब जिले के लोगों की नजर भाजपा के प्रत्याशी पर टिकी है। चर्चा तो कई नामों को लेकर चल रही है, लेकिन अभी तक प्रत्याशी तय नहीं हो सका है। शहर से ग्रामीण इलाके तक इन दिनों चौराहों और चाय-पान की दुकानों पर बस एक ही बहस छिड़ी है कि आखिर भाजपा से कौन? जीत-हार की चर्चा में मशगूल लोग कह रहे हैं कि भाजपा प्रत्याशी का ऐलान होने के बाद ही इसका ठीक से अंदाजा लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
इनसेट
टिकट को लेकर सोशल मीडिया पर खूब हो रहे दावे
प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी को लेकर इन दिनों जिले में जबरदस्त चर्चा छिड़ी है। सोशल मीडिया पर तो लोग टिकट पक्का भी कर दे रहे हैं। भाजपा नेता अनिल प्रताप सिंह, कैबिनेट मंत्री मोती सिंह, सांसद हरिबंश सिंह, पूर्व विधायक बृजेश सौरभ, संगमलाल गुप्ता के साथ अब कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या के नाम की भी चर्चा शुरू हो गई है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि पार्टी जिले में फिर से प्रत्याशी के लिए सर्वे करा रही है। सामान्य या फिर पिछड़ी जाति से किसी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।