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सियासत के लिए मॉडल स्कूल पाने को बेताब हुए नेता 17-42-47
Updated Wed, 31 Jan 2018 07:56 PM IST
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सियासत के लिए मॉडल स्कूल पाने में स्थानीय नेताओं का दखल
सूची में प्रतिदिन घट-बढ़ रही है स्कूलों की संख्या, बीईओ पर डाला जा रहा दबाव
जिले के 90 स्कूलों में होगी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर प्राइमरी स्कूलों में पठन-पाठन का तौर तरीका बदलने के लिए जिले के 90 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है। इन स्कूलों के चयन में स्थानीय नेताओं का दखल बढ़ गया है। इससे कभी सूची में नाम बढ़ाने, तो कभी काटने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों पर वह दबाव बना रहे हैं।
विधानसभा क्षेत्र में विकास का आइना मॉडल स्कूल से दिखाने के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों का यह प्रयास है कि उनके इलाके के अधिक से अधिक प्राइमरी स्कूल का चयन मॉडल स्कूल के रुप में हो जाए। हालांकि उन स्कूलों के शिक्षकों को यह रास नहीं आ रहा है। मगर नेताजी अपनी साख बनाने के लिए बीईओ पर दबाव बनाकर अपने विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों का अधिक चयन करवाने के प्रयास में हैं। वह स्कूल खासकर उन नेताओं के लिए काफी प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं जो उनके क्षेत्र की सीमा पर स्थित हैं। संडवा चंद्रिका, मंगरौरा शिवगढ़, लक्ष्मणपुर, बेलखरनाथधाम ब्लाक की सीमाएं दो-दो विधानसभा के अंतर्गत आती हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने एक विकास खंड से पांच-पांच स्कूलों का ही चयन करने की रणनीति बनाई है। मगर सीमा का लाभ उठाकर कुछ नेता लक्ष्य से अधिक स्कूल चयनित करने का दबाव बना रहे हैं। दरअसल, मॉडल स्कूलों को कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने के साथ ही विभाग से आने वाली सभी सुविधाएं इन स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर दी जाएंगी। इसीलिए नेता अपना प्रयास बताने के चक्कर में परेशान हैं।
इनसेट----------
मॉडल स्कूलों के लिए कहां से आएंगे शिक्षक
जिले में चयनित होने वाले 90 स्कूलों के लिए टीचर कहां से आएंगे। यह सवाल इन दिनों हर किसी की जुबान पर है। दरअसल, ग्रामीण इलाकों में तैनात शिक्षक अंग्रेजी पढ़ाने से दूर भागते हैं। अधिकांश शिक्षक ऐसे हैं, जो प्राय: स्कूलों से गायब रहते हैं। ऐसे में वह स्कूल में बच्चों को पढ़ाएंगे या फिर घूम-घूमकर निजी काम निपटाएंगे।
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इनसेट-------
अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों का ही होगा चयन
मॉडल स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों का ही चयन होगा। परीक्षा कराने के पूर्व विभाग शिक्षकों से आवेदन लेगा और उत्तीर्ण होने वाले शिक्षकों का साक्षात्कार होने के बाद मॉडल स्कूलों में तैनाती दी जाएगी।
इनसेट------
जिले में दो स्कूल पहले ही चुने गए हैं मॉडल
सदर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल राजगढ़ और भुआलपुरडोमीपुर को पहले ही मॉडल स्कूल के रूप में चयनित किया जा चुका है।
वर्जन-------
मॉडल स्कूलों को चयनित करने में जनप्रतिनिधियों की जो सिफारिश आई, उसे संज्ञान में लेकर 90 स्कूलों का चयन कर लिया गया है। शिक्षकों से आवेदन मांगे जा रहे हैं। चयन प्रक्रिया पूरी होते ही अध्यापकों की तैनाती कर दी जाएगी।
बीएन सिंह, बीएसए।
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सूची में प्रतिदिन घट-बढ़ रही है स्कूलों की संख्या, बीईओ पर डाला जा रहा दबाव
जिले के 90 स्कूलों में होगी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर प्राइमरी स्कूलों में पठन-पाठन का तौर तरीका बदलने के लिए जिले के 90 स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है। इन स्कूलों के चयन में स्थानीय नेताओं का दखल बढ़ गया है। इससे कभी सूची में नाम बढ़ाने, तो कभी काटने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों पर वह दबाव बना रहे हैं।
विधानसभा क्षेत्र में विकास का आइना मॉडल स्कूल से दिखाने के लिए जिले के जनप्रतिनिधियों का यह प्रयास है कि उनके इलाके के अधिक से अधिक प्राइमरी स्कूल का चयन मॉडल स्कूल के रुप में हो जाए। हालांकि उन स्कूलों के शिक्षकों को यह रास नहीं आ रहा है। मगर नेताजी अपनी साख बनाने के लिए बीईओ पर दबाव बनाकर अपने विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों का अधिक चयन करवाने के प्रयास में हैं। वह स्कूल खासकर उन नेताओं के लिए काफी प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं जो उनके क्षेत्र की सीमा पर स्थित हैं। संडवा चंद्रिका, मंगरौरा शिवगढ़, लक्ष्मणपुर, बेलखरनाथधाम ब्लाक की सीमाएं दो-दो विधानसभा के अंतर्गत आती हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने एक विकास खंड से पांच-पांच स्कूलों का ही चयन करने की रणनीति बनाई है। मगर सीमा का लाभ उठाकर कुछ नेता लक्ष्य से अधिक स्कूल चयनित करने का दबाव बना रहे हैं। दरअसल, मॉडल स्कूलों को कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने के साथ ही विभाग से आने वाली सभी सुविधाएं इन स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर दी जाएंगी। इसीलिए नेता अपना प्रयास बताने के चक्कर में परेशान हैं।
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मॉडल स्कूलों के लिए कहां से आएंगे शिक्षक
जिले में चयनित होने वाले 90 स्कूलों के लिए टीचर कहां से आएंगे। यह सवाल इन दिनों हर किसी की जुबान पर है। दरअसल, ग्रामीण इलाकों में तैनात शिक्षक अंग्रेजी पढ़ाने से दूर भागते हैं। अधिकांश शिक्षक ऐसे हैं, जो प्राय: स्कूलों से गायब रहते हैं। ऐसे में वह स्कूल में बच्चों को पढ़ाएंगे या फिर घूम-घूमकर निजी काम निपटाएंगे।
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अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों का ही होगा चयन
मॉडल स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों का ही चयन होगा। परीक्षा कराने के पूर्व विभाग शिक्षकों से आवेदन लेगा और उत्तीर्ण होने वाले शिक्षकों का साक्षात्कार होने के बाद मॉडल स्कूलों में तैनाती दी जाएगी।
इनसेट------
जिले में दो स्कूल पहले ही चुने गए हैं मॉडल
सदर विकास खंड के प्राइमरी स्कूल राजगढ़ और भुआलपुरडोमीपुर को पहले ही मॉडल स्कूल के रूप में चयनित किया जा चुका है।
वर्जन-------
मॉडल स्कूलों को चयनित करने में जनप्रतिनिधियों की जो सिफारिश आई, उसे संज्ञान में लेकर 90 स्कूलों का चयन कर लिया गया है। शिक्षकों से आवेदन मांगे जा रहे हैं। चयन प्रक्रिया पूरी होते ही अध्यापकों की तैनाती कर दी जाएगी।
बीएन सिंह, बीएसए।