{"_id":"59763d6e4f1c1b262c8b460d","slug":"3rd-monday-of-sawan","type":"story","status":"publish","title_hn":"जलाभिषेक के लिए जनसैलाब ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जलाभिषेक के लिए जनसैलाब
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 25 Jul 2017 12:12 AM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
- फोटो : pratapgarah
सावन के तीसरे सेामवार को जिले के पौराणिक शिवालयों में जलाभिषेक को लेकर आस्था और भक्ति का जनसैलाब उमड़ा रहा। एक तरफ कांवड़ियों की लंबी कतार लगी रही तो वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय श्रद्धाओं की अपार भीड़ रही। हर-हर-बम-बम, बोलबोम के जयकारों से पूरा वातावरण गूंजायमान रहा। सुबह से शुरू हुए जलाभिषेक का क्रम देररात तक चलता रहा। इससे पूरे दिन भक्तिमय माहौल बना रहा।
सावन के तीसरे सोमवार जलाभिषेक को लेकर जिले के पौराणिक बेलखरनाथधाम, घुइसरनाथधाम, बाबा भयहरणनाथधाम, हौदेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही। कांवड़ियों को टोला आधी रात से ही शिवालयोें में हर-हर-बम-बम का जयकारा लगा रही थी। भोर में करीब तीन बजे के बाद से ही शिवालयों में कांवड़ियों की लंबी कतार लग गई। कांवड़ में जल लिए सभी को बस पट खुलने का इंतार था। भोर में शिवालयों में बाबा अवघड़दानी के पूजन-अर्चन को लेकर पुरोहितों के मुखारबिंदु से वैदिक मंत्र अभिमंत्रित होना शुरू हुए तो कांवड़ियों की भक्तिभावना हिलारे लेने लगी। इधर पूजन के बाद जैसे ही शंख, घंट, घंड़ियाल से बाबा अवघड़दानी की महाआरती शुरू हुई तो जलाभिषेक को आतुर कांवड़िये बोलबम के नारे लगाने लगे। महाआरती समाप्त होते ही जलाभिषेक का क्रम शुरू हो गया। लोगों ने जलाभिषेक कर मंदार फूल की माला, बेलपत्र, धतूरा, काला तिल, दूध आदि अर्पित कर मन्नतें मांगीं। सुबह से श्ुारू हुआ जलाभिषेक का क्रम रात तक चलता रहा।
विज्ञापन
सावन के तीसरे सोमवार जलाभिषेक को लेकर जिले के पौराणिक बेलखरनाथधाम, घुइसरनाथधाम, बाबा भयहरणनाथधाम, हौदेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ रही। कांवड़ियों को टोला आधी रात से ही शिवालयोें में हर-हर-बम-बम का जयकारा लगा रही थी। भोर में करीब तीन बजे के बाद से ही शिवालयों में कांवड़ियों की लंबी कतार लग गई। कांवड़ में जल लिए सभी को बस पट खुलने का इंतार था। भोर में शिवालयों में बाबा अवघड़दानी के पूजन-अर्चन को लेकर पुरोहितों के मुखारबिंदु से वैदिक मंत्र अभिमंत्रित होना शुरू हुए तो कांवड़ियों की भक्तिभावना हिलारे लेने लगी। इधर पूजन के बाद जैसे ही शंख, घंट, घंड़ियाल से बाबा अवघड़दानी की महाआरती शुरू हुई तो जलाभिषेक को आतुर कांवड़िये बोलबम के नारे लगाने लगे। महाआरती समाप्त होते ही जलाभिषेक का क्रम शुरू हो गया। लोगों ने जलाभिषेक कर मंदार फूल की माला, बेलपत्र, धतूरा, काला तिल, दूध आदि अर्पित कर मन्नतें मांगीं। सुबह से श्ुारू हुआ जलाभिषेक का क्रम रात तक चलता रहा।
विज्ञापन