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फरवरी में 27 डिग्री तापमान ने बिगाड़ी गेहूं की सेहत

Mon, 05 Feb 2018 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Mon, 05 Feb 2018 11:13 PM IST
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27 degree temprature spoiled health of wheat crop
गेहूं।
फरवरी महीने के पहले सप्ताह में ही बढ़ते तापमान ने गेहूं की सेहत बिगाड़ दी है। देर से शुरू होकर जल्द ठंड खत्म होने के बाद अब पारा 27 डिग्री पर पहुंचने के कारण गेहूं की फसल में तेजी से पीली गेरुई रोग फैल रहा है। इससे पौधे झुलसने लगते हैं और दाने कमजोर हो जाते हैं। कृषि वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस बार उत्पादन काफी प्रभावित हो सकता है।
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जिले में एक लाख 51 हजार हेक्टेअर भूभाग में गेहूं की फसल बोई गई है। पहले सर्दी देर से शुरू होने के कारण गेहूं के पौधों का सही तरह से विकास नहीं हो पाया। अब बढ़ता तापमान फसल के लिए मुसीबत बन गया है। कृषि के जानकारों के मुताबिक गेहूं की फसल के लिए इस समय अधिकतम तापमान 22 डिग्री के करीब होना चाहिए, लेकिन इन दिनों पारा 27 पर पहुंच गया है। ज्यादा तापमान होने पर मौसम में नमी नहीं होनी चाहिए। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक वातावरण में नमी के साथ ही तापमान का ज्यादा होना पर्वतीय इलाकों जैसे हालात बना देता है।
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यही हाल पिछले तीन चार दिनों से हो रहा है। नमी की मात्रा 50 फीसदी से ज्यादा चल रही है। इसके साथ ही तापमान सामान्य से आठ डिग्री ज्यादा पहुंच गया है। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी ने बताया कि नमी ज्यादा रहने और तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल में पीली गेरुई बीमारी तेजी से फैल रही है। इससे पैदावार में भारी गिरावट आने की आशंका है। यह बीमारी तेजी से गेहूं के पौधों को अपनी चपेट में लेती है। पौधों में इस समय बीमारी के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। जिससे गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है।
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कई बार ऐसी स्थितियों में किसान ज्यादा सिंचाई करने लगते हैं, लेकिन यह भी खतरनाक है। किसान ज्यादा पानी लगाने से बचें। फसल के पीला पड़ने या बीमारी लगने पर सल्फर और मैगनीज का छिड़काव करने की जरूरत है। किसान जैविक रसायन वल्टीसिलियम लैकेनी का भी छिडक़ाव कर सकते हैं। यह सौ रुपये में एक हेक्टेयर फसल के लिए पर्याप्त है।
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