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25 वार्डों के लिए 150 सफाईकर्मी, फिर भी बजबजा रहा शहर
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:16 AM IST
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शहर के 25 वार्डों में सफाई के लिए नगर पालिका ने 150 सफाई कर्मचारियों को तैनात किया है। इस हिसाब से देखा जाए तो एक वार्ड में करीब छह सफाईकर्मी आ रहे हैं। बावजूद इसके शहर गंदगी से कराह रहा है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। लोग परेशान हैं। इसके बाद भी कूड़ा नहीं हटाया जा रहा है। घर- घर कूड़ा उठाने का भले ही दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे परे है। नगर पालिका में नियमित 110 सफाईकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा 79 संविदाकर्मी सफाईकर्मी भी शहर की सफाई के लिए लगाए गए हैं। इन्हीं कर्मचारियों में से 25 वार्डों के लिए सुपरवाइजर, वाहन चालक भी लगाए गए हैं। करीब 150 महिला व पुरुष कर्मचारियों को वार्डों की सफाई के लिए लगाया गया है। शहर की सफाई के लिए सुबह-शाम दो शिफ्टों में काम कराया जाता है।
हर वार्डों को करीब छह सफाईकर्मी कम से कम मिले हैं। इनकी निगरानी के लिए सुपरवाइजरों को भी लगाया गया है। जो सफाईकर्मचारियों के कार्यों पर बराबर निगाह रखते हैं। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह गंदगी जमा है। टक्करगंज, दहिलामऊ, मीराभवन चौराहा, सहोदरपुर पश्चिमी, विवेकनगर, सदर बाजार, बेगमवार्ड, तहसील वार्ड, पठखौली, करनपुर समेत अधिकांश मोहल्लों में यह समस्या देखी जा सकती है। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत घर-घर कूड़ा कलेक्शन के लगाई गई टीम भी अधिकांश मोहल्लों में फ्लाप है। कूड़ा उठाने वाली संस्था के जिम्मेदार मनमानी पर उतारू रहते हैं। कार्यदायी संस्था के कार्यों से सभासद संतुष्ट नहीं हैं। यदि कूड़ा लोगों के घरों से उठा लिया जाता तो फिर मोहल्लों में कूड़ा डंप होने की नौबत ही न आती। डेढ़ सौ सफाईकर्मियों के बाद भी शहर कूड़े के ढेर से कराह रहा है।
आने में मनमानी, जाते समय से हैं
शहर के मोहल्लों में सफाई करने वाले कर्मचारियों की मनमानी का आलम देखते ही बनता है। ड्यूटी के समय भले ही विलंब से कार्य करने के लिए कर्मचारी पहुंचते हैं, लेकिन जाने के समय में थोड़ा भी परिवर्तन करना बेहतर नहीं समझते। चाहे पूरी सड़क, नाले गंदगी से क्यों न बजबजा रही हो। लोगों के कहने का भी उन पर कोई असर नहीं पड़ता और वह समय से काम अधूरा छोड़कर निकल जाते हैं।
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अफसरों को गुमराह करते हैं कर्मचारी
नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों में सफाई के लिए कर्मचारी लगाए गए हैं। जिस मोहल्ले से शिकायत मिलती है, अधिकारी वहां के सुपरवाइजरों की नकेल कसते हैं। कभी-कभी देखने में मिलता है कि सफाईकर्मी अधिकारियों को गुमराह करते हैं। भले ही गंदगी मोहल्ले व रास्ते में बजबजाती रहे। उन्हें कोई चिंता नहीं रहती।
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हर वार्डों को करीब छह सफाईकर्मी कम से कम मिले हैं। इनकी निगरानी के लिए सुपरवाइजरों को भी लगाया गया है। जो सफाईकर्मचारियों के कार्यों पर बराबर निगाह रखते हैं। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह गंदगी जमा है। टक्करगंज, दहिलामऊ, मीराभवन चौराहा, सहोदरपुर पश्चिमी, विवेकनगर, सदर बाजार, बेगमवार्ड, तहसील वार्ड, पठखौली, करनपुर समेत अधिकांश मोहल्लों में यह समस्या देखी जा सकती है। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत घर-घर कूड़ा कलेक्शन के लगाई गई टीम भी अधिकांश मोहल्लों में फ्लाप है। कूड़ा उठाने वाली संस्था के जिम्मेदार मनमानी पर उतारू रहते हैं। कार्यदायी संस्था के कार्यों से सभासद संतुष्ट नहीं हैं। यदि कूड़ा लोगों के घरों से उठा लिया जाता तो फिर मोहल्लों में कूड़ा डंप होने की नौबत ही न आती। डेढ़ सौ सफाईकर्मियों के बाद भी शहर कूड़े के ढेर से कराह रहा है।
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आने में मनमानी, जाते समय से हैं
शहर के मोहल्लों में सफाई करने वाले कर्मचारियों की मनमानी का आलम देखते ही बनता है। ड्यूटी के समय भले ही विलंब से कार्य करने के लिए कर्मचारी पहुंचते हैं, लेकिन जाने के समय में थोड़ा भी परिवर्तन करना बेहतर नहीं समझते। चाहे पूरी सड़क, नाले गंदगी से क्यों न बजबजा रही हो। लोगों के कहने का भी उन पर कोई असर नहीं पड़ता और वह समय से काम अधूरा छोड़कर निकल जाते हैं।
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अफसरों को गुमराह करते हैं कर्मचारी
नगर पालिका क्षेत्र के 25 वार्डों में सफाई के लिए कर्मचारी लगाए गए हैं। जिस मोहल्ले से शिकायत मिलती है, अधिकारी वहां के सुपरवाइजरों की नकेल कसते हैं। कभी-कभी देखने में मिलता है कि सफाईकर्मी अधिकारियों को गुमराह करते हैं। भले ही गंदगी मोहल्ले व रास्ते में बजबजाती रहे। उन्हें कोई चिंता नहीं रहती।