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25 डॉक्टर, 47 अस्पताल, राम भरोसे मरीजों का हाल
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 05 Mar 2018 01:18 AM IST
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hospital
- फोटो : अमर उजाला
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होम्योपैथिक दवा पर भरोसा रखने वाले जनपद के मरीजों का इलाज राम भरोसे हो रहा है। दरअसल जनपद में होम्योपैथिक के 47 अस्पताल हैं। मगर शासन की ओर से महज 25 चिकित्सकों की ही तैनाती की गई है। जिले के 22 अस्पताल ऐसे हैं, जिसमें एक भी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के आधुनिकीकरण की दिशा में होम्योपैथ अब भी पिछड़ा हुआ है। जिले के ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, तो इन अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई भी नहीं हो रही है, इससे जो मरीज उपचार कराने के लिए अस्पताल आते हैं उनके हाथ मायूसी लगती है। जनपद में 47 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल खुले हुए हैं। मगर विभाग की ओर से महज 25 चिकित्सकों की ही तैनाती शासन स्तर से की गई है। ऐसे में राजापुर मोड़, शनीदेव धाम, रामपुर गुडरू, जामताली, रामपुर आधारगंज, राजपुर सदर, नजियापुर, डंडवा, हरिहरगंज, छीटपुर, सरायगनई, खूझीकला, बरहूपुर, नरहरपुर सहित 22 अस्पताल फार्मासिस्ट या फिर स्वीपर के भरोसे संचालित हो रहे हैं। एक भी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। इससे दूर दराज से इलाज कराने के लिए राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल आने वाले मरीज दिन भर बैठकर चिकित्सकों का इंतजार करते रहते हैं। फार्मासिस्ट बारबार मरीजों को यह बताते रहते हैं कि चिकित्सक कुछ देर बाद आएंगे। दोपहर बाद फार्मासिस्ट मरीजों को खुद ही दवा देकर वापस घर लौटा देते हैं। सूत्र बताते हैं कि जिन अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती नहीं की गई है, उसके नजदीकी अस्पताल के चिकित्सकों की ड्यूटी सप्ताह में तीन दिनों के लिए लगाया जाता है। मगर चिकित्सक वहां जाकर मरीजों का इलाज करना पसंद नहीं करते। इसके चलते मरीजों को और परेशान होना पड़ता है। ज्यादातर मरीजों को जिला अस्पताल में स्थित होम्योपैथिक अस्पताल में इलाज कराने के लिए आना पड़ता है।
गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज में होम्योपैथिक दवा रामबाण सावित होता है। एलोपैथिक से ज्यादा आराम दायक होता है। यह दवा सस्ती भी होती है। पथरी, ट्यूमर, पाइल्स, जैसे रोगों में ऑपरेशन करने की अवश्यक्ता नहीं होती है, बल्कि होम्योपैथिक दवा से ही ठीक हो जाते हैं।
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होम्योपैथिक दवा में सबसे अधिक परहेज का महत्व होता है। परहेज करने वाले मरीजों को ही दवा सूट करती है और जल्द ही वह ठीक हो जाता है। परहेज न करने वाले लोगों के बीमारी में दवा काम नहीं करती है। इतना जरूर होता है कि इस दवा का कोर्स लंबा होता है। मगर यह दवा रोग को जड़ से खत्म कर देता है।
होम्योपैथिक दवा पर आज भी मरीजों को भरोसा है। जिला अस्पताल के होम्यौपिथक अस्पताल में रोजाना ढाई से चार सौ के करीब में ओपीडी होती है। खाली पड़े रिक्त के लिए दो पर्षो से शासन को पत्राचार किया जा रहा है। अश्वासन मिला है जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती होगी।
डॉ. एनसी गुप्ता, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी।
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स्वास्थ्य विभाग के आधुनिकीकरण की दिशा में होम्योपैथ अब भी पिछड़ा हुआ है। जिले के ज्यादातर अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, तो इन अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई भी नहीं हो रही है, इससे जो मरीज उपचार कराने के लिए अस्पताल आते हैं उनके हाथ मायूसी लगती है। जनपद में 47 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल खुले हुए हैं। मगर विभाग की ओर से महज 25 चिकित्सकों की ही तैनाती शासन स्तर से की गई है। ऐसे में राजापुर मोड़, शनीदेव धाम, रामपुर गुडरू, जामताली, रामपुर आधारगंज, राजपुर सदर, नजियापुर, डंडवा, हरिहरगंज, छीटपुर, सरायगनई, खूझीकला, बरहूपुर, नरहरपुर सहित 22 अस्पताल फार्मासिस्ट या फिर स्वीपर के भरोसे संचालित हो रहे हैं। एक भी चिकित्सक की तैनाती नहीं की गई है। इससे दूर दराज से इलाज कराने के लिए राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल आने वाले मरीज दिन भर बैठकर चिकित्सकों का इंतजार करते रहते हैं। फार्मासिस्ट बारबार मरीजों को यह बताते रहते हैं कि चिकित्सक कुछ देर बाद आएंगे। दोपहर बाद फार्मासिस्ट मरीजों को खुद ही दवा देकर वापस घर लौटा देते हैं। सूत्र बताते हैं कि जिन अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती नहीं की गई है, उसके नजदीकी अस्पताल के चिकित्सकों की ड्यूटी सप्ताह में तीन दिनों के लिए लगाया जाता है। मगर चिकित्सक वहां जाकर मरीजों का इलाज करना पसंद नहीं करते। इसके चलते मरीजों को और परेशान होना पड़ता है। ज्यादातर मरीजों को जिला अस्पताल में स्थित होम्योपैथिक अस्पताल में इलाज कराने के लिए आना पड़ता है।
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गंभीर रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज में होम्योपैथिक दवा रामबाण सावित होता है। एलोपैथिक से ज्यादा आराम दायक होता है। यह दवा सस्ती भी होती है। पथरी, ट्यूमर, पाइल्स, जैसे रोगों में ऑपरेशन करने की अवश्यक्ता नहीं होती है, बल्कि होम्योपैथिक दवा से ही ठीक हो जाते हैं।
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होम्योपैथिक दवा में सबसे अधिक परहेज का महत्व होता है। परहेज करने वाले मरीजों को ही दवा सूट करती है और जल्द ही वह ठीक हो जाता है। परहेज न करने वाले लोगों के बीमारी में दवा काम नहीं करती है। इतना जरूर होता है कि इस दवा का कोर्स लंबा होता है। मगर यह दवा रोग को जड़ से खत्म कर देता है।
होम्योपैथिक दवा पर आज भी मरीजों को भरोसा है। जिला अस्पताल के होम्यौपिथक अस्पताल में रोजाना ढाई से चार सौ के करीब में ओपीडी होती है। खाली पड़े रिक्त के लिए दो पर्षो से शासन को पत्राचार किया जा रहा है। अश्वासन मिला है जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती होगी।
डॉ. एनसी गुप्ता, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी।