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नर्सो की कमी, मरीज परेशान
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अस्पतालों में नर्स नहीं, तड़प रहे मरीज
जिला और महिला अस्पताल में एक नर्स पर 35 से 45 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जनपद के सरकारी अस्पतालों में नर्सों की कमी से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों में भर्ती मरीजों को इलाज के अभाव में तड़पना पड़ता है। वह दर्द से कराहते रहते हैं, मगर समय से दवा व इंजेक्शन नहीं लग पाता है। डॉक्टर भी दिनभर में मात्र एक बार मरीज को देखने के लिए जाते हैं। जिला और महिला अस्पताल में हालत यह है कि एक नर्स को 35 से 45 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।
जनपद में 27 सीएचसी, 55 पीएचसी, पांच ब्लाक स्तर के अस्पतालों के साथ ही जिला व जिला महिला अस्पताल का संचालन हो रहा है। इन अस्पतालों में मरीजों की देखरेख के साथ इलाज करने के लिए शासन ने 136 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं। लेकिन अस्पतालों में महज 90 स्टाफ नर्स की तैनाती ही की गई है। 46 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में एक नर्स को 35 से 45 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। वह दर्द से कराहते रहते हैं, मगर समय से उनका इलाज नहीं हो पाता है। इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। सीएचसी-पीएचसी में तो हालत कुछ हद तक ठीक है, मगर जिला व महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। एक नर्स के भरोसे दो से तीन वार्ड की जिम्मेदारी दे दी जाती है। इससे मरीज परेशान हो जाते हैं।
इनसेट------------
जिला अस्पताल में 17 पद रिक्त
शासन ने जिला अस्पताल में 37 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं, मगर तैनाती महज 20 नर्सों की है। 17 पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि शासन के आदेश को माना जाए तो एक नर्स महज 15 मरीजों की देखरेख और इलाज करेगी। मगर जिला अस्पताल में एक नर्स को 30 से 40 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है।
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इनसेट--------
जिला महिला अस्पताल में 9 पद रिक्त
शासन ने जिला महिला अस्पताल में 15 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं। मगर इनमें से महज 6 स्टाफ नर्स की तैनाती की गई है। नौ पद रिक्त चल रहे हैं। महिला अस्पताल के सूत्रों की मानी जाए तो एक दिन में तीन नर्स की ड्यूटी लगाई जाती है। इससे मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। एक नर्स ओटी तो एक लेबर रूम और एक नर्स के भरोसे इमरजेंसी वार्ड, सर्जिकल, जनरल और प्राइवेट वार्ड के साथ आयुष्मान भारत वार्ड में भर्ती मरीजों की देखरेख होती है। नर्स समय से मरीजों तक नहीं पहुंच पाती हैं।
वर्जन----------
जितनी स्टाफ नर्स हैं उनसे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। स्टाफ नर्स के अभाव में मरीज परेशान होते हैं। नर्सों को भी छुट्टी नहीं मिल पाती है।
संतोष त्रिपाठी, प्रभारी सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
वर्जन-----
नर्सों की कमी है। ठेके पर कुछ नर्सों को रखकर काम चलाया जा रहा है। प्रत्येक माह शासन को इसके बारे में अवगत कराया जाता है।
योगेंद्र यति, सीएमएस, जिला अस्पताल।
वर्जन---------
जल्द ही स्टाफ नर्सों का संकट दूर हो जाएगा। शासन स्तर से नर्सों की नियुक्ति करके भेजा जा रहा है।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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जिला और महिला अस्पताल में एक नर्स पर 35 से 45 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जनपद के सरकारी अस्पतालों में नर्सों की कमी से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों में भर्ती मरीजों को इलाज के अभाव में तड़पना पड़ता है। वह दर्द से कराहते रहते हैं, मगर समय से दवा व इंजेक्शन नहीं लग पाता है। डॉक्टर भी दिनभर में मात्र एक बार मरीज को देखने के लिए जाते हैं। जिला और महिला अस्पताल में हालत यह है कि एक नर्स को 35 से 45 मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।
जनपद में 27 सीएचसी, 55 पीएचसी, पांच ब्लाक स्तर के अस्पतालों के साथ ही जिला व जिला महिला अस्पताल का संचालन हो रहा है। इन अस्पतालों में मरीजों की देखरेख के साथ इलाज करने के लिए शासन ने 136 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं। लेकिन अस्पतालों में महज 90 स्टाफ नर्स की तैनाती ही की गई है। 46 पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में एक नर्स को 35 से 45 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है। इससे मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। वह दर्द से कराहते रहते हैं, मगर समय से उनका इलाज नहीं हो पाता है। इस समस्या की ओर किसी का ध्यान नहीं पड़ रहा है। सीएचसी-पीएचसी में तो हालत कुछ हद तक ठीक है, मगर जिला व महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। एक नर्स के भरोसे दो से तीन वार्ड की जिम्मेदारी दे दी जाती है। इससे मरीज परेशान हो जाते हैं।
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जिला अस्पताल में 17 पद रिक्त
शासन ने जिला अस्पताल में 37 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं, मगर तैनाती महज 20 नर्सों की है। 17 पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि शासन के आदेश को माना जाए तो एक नर्स महज 15 मरीजों की देखरेख और इलाज करेगी। मगर जिला अस्पताल में एक नर्स को 30 से 40 मरीजों की देखरेख करनी पड़ रही है।
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जिला महिला अस्पताल में 9 पद रिक्त
शासन ने जिला महिला अस्पताल में 15 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत किए हैं। मगर इनमें से महज 6 स्टाफ नर्स की तैनाती की गई है। नौ पद रिक्त चल रहे हैं। महिला अस्पताल के सूत्रों की मानी जाए तो एक दिन में तीन नर्स की ड्यूटी लगाई जाती है। इससे मरीजों को ज्यादा परेशान होना पड़ता है। एक नर्स ओटी तो एक लेबर रूम और एक नर्स के भरोसे इमरजेंसी वार्ड, सर्जिकल, जनरल और प्राइवेट वार्ड के साथ आयुष्मान भारत वार्ड में भर्ती मरीजों की देखरेख होती है। नर्स समय से मरीजों तक नहीं पहुंच पाती हैं।
वर्जन----------
जितनी स्टाफ नर्स हैं उनसे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। स्टाफ नर्स के अभाव में मरीज परेशान होते हैं। नर्सों को भी छुट्टी नहीं मिल पाती है।
संतोष त्रिपाठी, प्रभारी सीएमएस, जिला महिला अस्पताल।
वर्जन-----
नर्सों की कमी है। ठेके पर कुछ नर्सों को रखकर काम चलाया जा रहा है। प्रत्येक माह शासन को इसके बारे में अवगत कराया जाता है।
योगेंद्र यति, सीएमएस, जिला अस्पताल।
वर्जन---------
जल्द ही स्टाफ नर्सों का संकट दूर हो जाएगा। शासन स्तर से नर्सों की नियुक्ति करके भेजा जा रहा है।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।