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नौकरी मिल नहीं रही, रोजगार के लिए ऋण नहीं दे रहे बैंक 17-48-30
Updated Mon, 30 Oct 2017 07:10 PM IST
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प्रतापगढ़। बेरोजगारों को स्वरोजगार अपनाने की राह में बैंक रोड़ा बने हुए हैं। संबंधित विभाग द्वारा पात्रों का चुनाव करने के बाद भी बैंकों ने उन्हें ऋण देने से हाथ खड़ा कर दिए हैं। इससे बेरोजगार लोग परेशान हो गए हैं।
जिले में बेरोजगारी के चलते सैकड़ों युवा परेशान हैं। इनमें से कई स्वरोजगार के लिए प्रयास कर रहे हैं। तकनीकी शिक्षा लेने वाले कुटीर और लघु उद्योग पर जोर दे रहे हैं। बताया जाता है कि युवाओं को सब्सिडी पर ऋण देने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम चला रखा है। जिला उद्योग केंद्र और खादी ग्रामोद्योग विभाग से चयनित अभ्यर्थियों को 15 से 35 प्रतिशत सब्सिडी पर ऋण मुहैया कराया जाता है। लेकिन अभ्यर्थियों की फाइल बैंक पहुंचने पर शाखा प्रबंधक ऋण देने से साफ मना कर दे रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने करीब 136 फाइलों को बैंक भेजा था। इनमें से 126 फाइलें विभाग में वापस आ गईं।
जिला उद्योग केंद्र ने बैंकों को करीब 169 फाइलें भेजी थी, जिनमें से 161 फाइलें बैंकों ने लौटा दिए हैं। बैंक अफसरों ने इतनी आपत्तियां लगा दी हैं कि उसे सुधारना मुश्किल है। बैंकों की अनदेखी के चलते विभागीय अधिकारियों द्वारा अब फाइल दुरुस्त कराने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। लालगंज के शिव मंगल सिंह, संडवा चंद्रिका के राज किशोर शर्मा, बेलखरनाथधाम के मो.इब्राहिम आदि की मानें तो बैंक कर्मचारी इतनी औपचारिकताएं बताते हैं कि उन्हें समझना मुश्किल होता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में मामला उठने और अफसरों के नाराजगी प्रकट करने के बाद भी बैंकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
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वहीं प्रभारी प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र रामजी कुशवाहा का कहना है कि विभाग के मानक पर खरे उतरने वाले अभ्यर्थियों का चयन करके बैंकों को पत्रावली भेजी जाती है। मगर बैंक अधिकारी कुछ न कुछ कारण बताकर फाइल लौटा देते हैं। इससे अभ्यर्थी निराश हो रहे हैं। वहीं एलडीएम एएनसिंह का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों की फाइलें लौटाई जा रही हैं, उसका कुछ कारण जरूर होता है। मानक पर खरे उतरने वालों को बैंकों से ऋण दिया जा रहा है।
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जिले में बेरोजगारी के चलते सैकड़ों युवा परेशान हैं। इनमें से कई स्वरोजगार के लिए प्रयास कर रहे हैं। तकनीकी शिक्षा लेने वाले कुटीर और लघु उद्योग पर जोर दे रहे हैं। बताया जाता है कि युवाओं को सब्सिडी पर ऋण देने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम चला रखा है। जिला उद्योग केंद्र और खादी ग्रामोद्योग विभाग से चयनित अभ्यर्थियों को 15 से 35 प्रतिशत सब्सिडी पर ऋण मुहैया कराया जाता है। लेकिन अभ्यर्थियों की फाइल बैंक पहुंचने पर शाखा प्रबंधक ऋण देने से साफ मना कर दे रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने करीब 136 फाइलों को बैंक भेजा था। इनमें से 126 फाइलें विभाग में वापस आ गईं।
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जिला उद्योग केंद्र ने बैंकों को करीब 169 फाइलें भेजी थी, जिनमें से 161 फाइलें बैंकों ने लौटा दिए हैं। बैंक अफसरों ने इतनी आपत्तियां लगा दी हैं कि उसे सुधारना मुश्किल है। बैंकों की अनदेखी के चलते विभागीय अधिकारियों द्वारा अब फाइल दुरुस्त कराने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। लालगंज के शिव मंगल सिंह, संडवा चंद्रिका के राज किशोर शर्मा, बेलखरनाथधाम के मो.इब्राहिम आदि की मानें तो बैंक कर्मचारी इतनी औपचारिकताएं बताते हैं कि उन्हें समझना मुश्किल होता है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में मामला उठने और अफसरों के नाराजगी प्रकट करने के बाद भी बैंकों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
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वहीं प्रभारी प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र रामजी कुशवाहा का कहना है कि विभाग के मानक पर खरे उतरने वाले अभ्यर्थियों का चयन करके बैंकों को पत्रावली भेजी जाती है। मगर बैंक अधिकारी कुछ न कुछ कारण बताकर फाइल लौटा देते हैं। इससे अभ्यर्थी निराश हो रहे हैं। वहीं एलडीएम एएनसिंह का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों की फाइलें लौटाई जा रही हैं, उसका कुछ कारण जरूर होता है। मानक पर खरे उतरने वालों को बैंकों से ऋण दिया जा रहा है।