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जिले में खाद-बीज का गहराया संकट

Sat, 24 Nov 2018 07:31 PM IST
Updated Sat, 24 Nov 2018 07:31 PM IST
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जिले में खाद-बीज का गहराया संकट
जिले में खाद-बीज का गहराया संकट
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समितियों से एक बार फिर गायब हुई खाद, कृषि विभाग के गोदाम पर नहीं है गेहूं का बीज
जिला प्रशासन की डिमांड के बाद भी मांग के अनुरूप नहीं मिल रही डीएपी
प्राइवेट दुकानों पर लुट रहे हैं किसान, अफसरों ने साध रखी है चुप्पी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले के किसान एक बार फिर मुसीबत में पड़ गए हैं। साधन सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं हैं तो कृषि विभाग के गोदामों पर गेहूं का बीज। ऐसे में वह गेहूं की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के साथ ही डीएम ने मांग पत्र भेजकर अविलंब खाद मुहैया कराने की मांग की है, मगर अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इससे गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है।
जिले में खाद और बीज का संकट एक बार फिर गहरा गया है। साधन सहकारी समितियों पर डीएपी का अकाल होने से प्राइवेट दुकानदार मनमाने ढंग से रुपये ऐंठ रहे हैं। जिले की 172 साधन सहकारी समितियों के लिए रबी माह में 10,500 मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य रखा गया है, मगर अभी तक मात्र 6.500 मीट्रिकटन ही डीएपी समितियों पर भेजी गई है। इससे मांग के अनुरूप आधी खाद भी समितियों पर नहीं भेजी गई। इससे किसानोें की मंाग पूरी नही हो पा रही है। गांव के किसानों को डीएपी नहीं मिलने से आलू और गेंहू की बुवाई प्रभावित हो रही है।
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खाद की प्राइवेट दुकानों पर डीएपी और यूरिया उपलब्ध है, मगर वह निर्धारित मूल्य से अधिक वसूल रहे हैं। इससे किसान प्राइवेट दुकानों से खाद लेने से परहेज कर रहे हैं। यही हाल गेहूं के बीज का है। जिले के 17 ब्लाकोें में कृषि विभाग ने गोदाम खोलकर किसानों को शोधित बीज मुहैया कराने का दावा किया था, मगर उनका दावा फेल हो गया है। केंद्रीय भंडार के साथ ही जिले के किसी भी बिक्री केंद्र पर एक दाना बीज नहीं है। इससे किसान प्राइवेट दुकानों से बीज लेने को मजबूर हैं।
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डीएपी के दाम में 25 रुपये का इजाफा
डीएपी की 50 किग्रा की बोरी अभी तक किसानों को 1425 रुपये में मिल रही थी, मगर अब यह बोरी 1450 रुपये में मिलेगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि दाम पहले ही बढ़ा था, मगर पुराना स्टाक होने के कारण किसानों को 1425 रुपये में बोरी दी जा रही थी।
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किसान परेशान, फोन बंद कर अफसर बने अनजान
जिलेभर के किसान डीएपी के लिए जहां दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी फोन बंद करके अनजान बने हुए हैं। सहायक निबंधक सहकारिता का मोबाइल तीन दिन से बंद चल रहा है। समितियों के सचिव फोन लगाकर खाद आने की जानकारी ले रहे हैं, मगर संपर्क नहीं हो पा रहा है। इससे किसान परेशान हैं।

वर्जन----------
जिले में इस समय डीएपी का स्टाक खत्म हो गया है। विभागीय अधिकारियों के साथ ही जिला प्रशासन ने अलग से मांग पत्र भेजा है। दो-तीन दिन के भीतर डीएपी की रैक आते ही खाद की समस्या समाप्त हो जाएगी। गेहूं के बीज के लिए भी मांगपत्र भेजा गया है। जल्द ही समस्या का निवारण हो जाएगा।
डा. अश्वनी सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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