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Allahabad Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 08:04 PM IST
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निजी अस्पतालों में लटकता रहा ताला
प्राइवेट चिकित्सकों की हड़ताल से हलाकान हुए मरीज
20 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे डाक्टर, दंत चिकित्सक भी आए साथ
अमर उजाला ब्यूरो।
प्रतापगढ़।
मांगों को लेकर मंगलवार को प्राइवेट चिकित्सक निजी अस्पताल व नर्सिंगहोम पर ताला बंद कर हड़ताल पर चले गए। इसके चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्राइवेट चिकित्सक दिन भर न तो ओपीडी में बैठे और न ही मरीजों का इलाज किया। दंत चिकित्सक भी क्लीनिक बंद कर विरोध प्रदर्शन में उनके साथ शामिल हुए।
अपनी 20 सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को हड़ताल पर रहे निजी चिकित्सकों ने क्लीनिक व नर्सिंगहोम का ताला नहीं खोला। दिन भर हड़ताल पर रहे। कुछ चिकित्सक तो दिल्ली के जंतर मंतर में आयोजित धरना प्रदर्शन में शामिल होने सोमवार को ही रवाना हो गए थे। ऐसे में दूरदराज से इलाज कराने के लिए नर्सिंगहोम व क्लीनिक पर पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मरीज इस अस्पताल से उस अस्पताल का चक्कर काटते रहे, मगर जहां वे पहुंचे वहीं ताला लटकता मिला। उधर, चिकित्सकों कहना है कि वे इमरजेंसी में मरीजों का भी इलाज करते हैं, मगर शासन की ओर से कुछ भी नहीं दिया जाता है। नर्सिंगहोम हो या फिर क्लीनिक, उसका पंजीयन कराने के लिए परेशान होना पड़ता है। कुछ काम सीएमओ कार्यालय से होता है तो कुछ कागजात नगर पालिका की ओर से तैयार कराना होता है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते शहर से लेकर गांव तक झोलाछाप चिकित्सकों की भरमार है। ऐसे में एक ओर मरीज की जान का खतरा बना रहता है तो दूसरी ओर प्राइवेट चिकित्सकों का भी नुकसान होता है। जिला प्राइवेट चिकित्सक संघ के अध्यक्ष डॉ. रवि श्रीवास्तव ने बताया कि उनके संघ की मांग है कि नर्सिंगहोम को भी एडेड किया जाए। इमरजेंसी केस के मरीजों को इलाज करने वाले चिकित्सकों को भत्ता दिया जाए। नर्सिंगहोम, क्लीनिक में तोड़फोड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। दवा का रेट तय किया जाए। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित बीस सूत्रीय मांगपत्र जिला प्रशासन को सौंपा।
उधर, प्राइवेट डॉक्टरों की मांगों के समर्थन में आईडीए प्रतापगढ़ ब्रांच भी उतर आई। क्लीनिक इस्टेबलिशमेंट एक्ट में संशोधन के लिए आईएमए एवं आईडीए के आह्वान पर दंत चिकित्सक एकजुट हैं। आईडीए के सचिव डॉ. सुधाकर सिंह ने कहा कि चिकित्सकों के साथ हो रही अराजकता एवं हिंसा से ज्यादा नुकसान गरीबों को हो रहा है। एलोपैथिक दवाओं का अनाधिकृत उपयोग रोका जाना चाहिए। बैठक में यह भी मांग किया गया कि देश में एक नीति एवं एक वेतन का फार्मूला लागू किया जाय। इस मौके पर डॉ. अजय सिंह, डॉ. पंकज मिश्रा, इम्तियाज, दिनेश तिवारी, अजय सिंह, डॉ. बीएन वर्मा, सीमा खंडेलवाल, अजीत कुमार सिंह, पंकज मिश्र, इम्तियाज व अवंतिका पांडेय आदि लोग मौजूद रहे।

पुराने ढर्रे पर रहा सरकारी अस्पताल
प्राइवेट चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने के कारण शासन ने सीएमओ को निर्देश दिया था कि मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कतें न हों और उनकी जान न जाने पाए। इसके चलते वे पूरी तैयारी पहले से ही कर लें, मगर जिला व महिला अस्पताल के साथ सीएचसी व पीएचसी का हालत जस के तस बने रहे। इतना ही नहीं अधिक मरीजों को आने पर उनके भर्ती करने के लिए कोई अलग से व्यवस्था तक नहीं किया गया था।

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