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जिला बन रहा अवैध असलहों की मंडी
Updated Tue, 19 Sep 2017 07:31 PM IST
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बेल्हा अवैध हथियार बेचने वालों का गढ़ बनता जा रहा है। मुंगेर की पिस्टलें और हाथरस के तमंचे की यहां खूब डिमांड है। पुलिस की नजरों से बचने के लिए तस्कर ट्रेन व बस का प्रयोग कर असलहा जिले में ला रहे हैं।
जिले में वैसे तो आए दिन खून खराबा, लूट, छिनैती के लिए अवैध असलहों का प्रयोग हो रहा है। तमंचे के बल पर लूट हो, परियावां के बैंक गार्ड को गोली मारकर हत्या या फिर टाइनी शाखा संचालक की गोली मारकर हत्या करने का मामला हो। इन सभी घटनाओं में बदमाशों ने पिस्टल, तमंचे का प्रयोग किया है। अपराध बढ़ने का कारण अवैध असलहों की तस्करी भी माना जा रहा है। जब हाथ में असलहा होता है तो बदमाशों को पब्लिक का भी डर नहीं रहता। पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि ये असलहे मुंगेर, हाथरस व अलीगढ़ से जिले में पहुंच रहे हैं। अभी तक अधिकांश घटनाओं में मुंगेर की बनी पिस्टल और हाथरस व अलीगढ़ के तमंचे का प्रयोग हुआ है। पुलिस सूत्रों की मानें तो असलहों के सौदागर अपने रिश्तेदारों व करीबियों को भी इस धंधे में उतार दिए हैं। ऐसे लोग कभी अनाज की बोरियों तो कभी बक्सों में कपड़ों के बीच अवैध असलहे लेकर बड़े आराम से जिले में पहुंच रहे हैं। रास्ते में दिक्कत व चेकिंग से बचने के लिए अमूमन पैसेंजर ट्रेन व बस से आते जाते हैं।
बोरियों व बक्शों के चलते पुलिस को भी संदेह नहीं हो पाता। जनपद में असलहों की खेप पहुंचने के बाद इसकी सप्लाई शुरू होती है। खरीददारों की तलाश में अधिक दिक्कत लोगों को नहीं उठानी होती। कालेजों अथवा चौराहों पर युवाओं के झुंड में तस्करोें को ग्राहक आसानी से मिल जाते हैं। इस बात को स्वाट टीम और अंतू पुलिस के हाथ लगे सुलतानपुर निवासी हनुमान तिवारी व बरेली के भगत सिंह ने पुलिस की पूछताछ में अवैध असलहों की बाबत कई अहम खुलासे किए हैं। जिसके बाद पुलिस व स्वाट टीम अवैध असलहों को खरीदने व बेचने वालों पर नजर रख रही है। एक समय था, जब जिले में भी असलहों की फैक्ट्रियां थीं। लालगंज, जेठवारा, मानधाता व कंधई थाना क्षेत्रों में कई बार अवैध असलहों की फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं।
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पूर्व में पुलिस के ताबड़तोड़ अभियान से फैक्ट्रियां बंद हो गईं लेकिन असलहों के सौदागरों ने रास्ता बदल दिया। फैक्ट्रिया बंद होने के बाद भी जेब खर्च के लिए अवैध असलहों को दूसरे प्रांत व जिले से लाकर बेचने का धंधा शुरू कर दिया। वहीं एएसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि जिले में अवैध असलहे बेचने के लिए लाए जाते हैं, पुलिस सतर्कता बरतते हुए अवैध असलहों के सौदागरों को गिरफ्तार भी कर रही है। वाहन चेकिंग के अलावा संदिग्धों की तलाशी भी ली जाती है। अवैध असलहों के सौदागरों के जरिए उनके आका तक पहुंचने का प्रयास भी चल रहा है।
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जिले में वैसे तो आए दिन खून खराबा, लूट, छिनैती के लिए अवैध असलहों का प्रयोग हो रहा है। तमंचे के बल पर लूट हो, परियावां के बैंक गार्ड को गोली मारकर हत्या या फिर टाइनी शाखा संचालक की गोली मारकर हत्या करने का मामला हो। इन सभी घटनाओं में बदमाशों ने पिस्टल, तमंचे का प्रयोग किया है। अपराध बढ़ने का कारण अवैध असलहों की तस्करी भी माना जा रहा है। जब हाथ में असलहा होता है तो बदमाशों को पब्लिक का भी डर नहीं रहता। पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि ये असलहे मुंगेर, हाथरस व अलीगढ़ से जिले में पहुंच रहे हैं। अभी तक अधिकांश घटनाओं में मुंगेर की बनी पिस्टल और हाथरस व अलीगढ़ के तमंचे का प्रयोग हुआ है। पुलिस सूत्रों की मानें तो असलहों के सौदागर अपने रिश्तेदारों व करीबियों को भी इस धंधे में उतार दिए हैं। ऐसे लोग कभी अनाज की बोरियों तो कभी बक्सों में कपड़ों के बीच अवैध असलहे लेकर बड़े आराम से जिले में पहुंच रहे हैं। रास्ते में दिक्कत व चेकिंग से बचने के लिए अमूमन पैसेंजर ट्रेन व बस से आते जाते हैं।
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बोरियों व बक्शों के चलते पुलिस को भी संदेह नहीं हो पाता। जनपद में असलहों की खेप पहुंचने के बाद इसकी सप्लाई शुरू होती है। खरीददारों की तलाश में अधिक दिक्कत लोगों को नहीं उठानी होती। कालेजों अथवा चौराहों पर युवाओं के झुंड में तस्करोें को ग्राहक आसानी से मिल जाते हैं। इस बात को स्वाट टीम और अंतू पुलिस के हाथ लगे सुलतानपुर निवासी हनुमान तिवारी व बरेली के भगत सिंह ने पुलिस की पूछताछ में अवैध असलहों की बाबत कई अहम खुलासे किए हैं। जिसके बाद पुलिस व स्वाट टीम अवैध असलहों को खरीदने व बेचने वालों पर नजर रख रही है। एक समय था, जब जिले में भी असलहों की फैक्ट्रियां थीं। लालगंज, जेठवारा, मानधाता व कंधई थाना क्षेत्रों में कई बार अवैध असलहों की फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं।
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पूर्व में पुलिस के ताबड़तोड़ अभियान से फैक्ट्रियां बंद हो गईं लेकिन असलहों के सौदागरों ने रास्ता बदल दिया। फैक्ट्रिया बंद होने के बाद भी जेब खर्च के लिए अवैध असलहों को दूसरे प्रांत व जिले से लाकर बेचने का धंधा शुरू कर दिया। वहीं एएसपी पूर्वी राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि जिले में अवैध असलहे बेचने के लिए लाए जाते हैं, पुलिस सतर्कता बरतते हुए अवैध असलहों के सौदागरों को गिरफ्तार भी कर रही है। वाहन चेकिंग के अलावा संदिग्धों की तलाशी भी ली जाती है। अवैध असलहों के सौदागरों के जरिए उनके आका तक पहुंचने का प्रयास भी चल रहा है।