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हाईस्कूल में पास होने के लिए चाहिए थे सिर्फ 23 अंक
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हाईस्कूल में पास होने के लिए चाहिए थे सिर्फ 23 अंक
आंतरिक मूल्यांकन ने बढ़ाया हौसला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली ने इस बार अधिकतर परीक्षार्थियों की नैया पार कर दी है। परीक्षार्थी सिर्फ पास ही नहीं हुए हैं, बल्कि अच्छे अंक भी हासिल किए। यूपी बोर्ड के बच्चों ने सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के बच्चों को चुनौती दी है। यूपी बोर्ड के परीक्षार्थी के पास होने का प्रतिशत जहां अधिक रहा, वहीं अधिक नंबर प्राप्त कर अपनी काबिलियत भी साबित की है।
सीबीएसई और आईसीएसई की तर्ज पर हुई यूपी बोर्ड परीक्षा ने विद्यार्थियों का हौसला बढ़ा दिया है। इस बार की विद्यार्थियों को पास होने की चिंता नहीं थी, बल्कि अच्छे अंक पाने की होड़ लगी रही। परीक्षा में लिखित परीक्षा सिर्फ 70 अंकों की हुई थी, जबकि 30 अंक कॉलेज के ही शिक्षकों ने दिए थे। जिसमें अधिकांश बच्चों को पूर्णांक ही प्रदान कर दिया गया था। कॉलेजों में होने वाले आंतरिक परीक्षा में विद्यार्थियों को जहां कम-कम दस अंक पाना आवश्यक था, वहीं लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए सिर्फ 23 अंक चाहिए थे। दस-दस अंक की होने वाली आंतरिक परीक्षा अगस्त, अक्तूबर और दिसंबर माह में होने के बाद नंबर सीधे बोर्ड को भेजा गया, जिसे लिखित परीक्षा में जोड़कर रिजल्ट प्रकाशित किया गया। शनिवार को अपनी सफलता देखकर विद्यार्थी खुशी से झूम उठे। अपेक्षा से अधिक अंक पाने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आंतरिक मूल्यांकन का परिणाम रहा कि इस वर्ष जहां बच्चे अधिक उत्तीर्ण हुए हैं वहीं उनके नंबर पाने का प्रतिशत भी अधिक रहा है। शिक्षक भी मान रहे हैं कि विद्यार्थियों के अंकों में जो बढ़ोतरी हुई है, इसकी वजह सतत आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली है।
क्या है ग्रेडिंग प्रणाली
हाईस्कूल की कॉपियों का मूल्यांकन करते समय शिक्षकों ने परीक्षार्थियों को प्रश्न के हिसाब से अंक प्रदान किया है। कॉपी के ऊपरी भाग पर अंक के साथ ग्रेड प्रदान किया गया है। पास होने के लिए विद्यार्थियों को न्यूनतम डी ग्रेड पाना आवश्यक था।
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अंक ग्रेड
91-100 ए1
81-90 ए2
71-80 बी1
61-70 बी2
51-60 सी1
41-50 सी2
33-40 डी
31-32 ई1
20 से कम ई2
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आंतरिक मूल्यांकन ने बढ़ाया हौसला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली ने इस बार अधिकतर परीक्षार्थियों की नैया पार कर दी है। परीक्षार्थी सिर्फ पास ही नहीं हुए हैं, बल्कि अच्छे अंक भी हासिल किए। यूपी बोर्ड के बच्चों ने सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के बच्चों को चुनौती दी है। यूपी बोर्ड के परीक्षार्थी के पास होने का प्रतिशत जहां अधिक रहा, वहीं अधिक नंबर प्राप्त कर अपनी काबिलियत भी साबित की है।
सीबीएसई और आईसीएसई की तर्ज पर हुई यूपी बोर्ड परीक्षा ने विद्यार्थियों का हौसला बढ़ा दिया है। इस बार की विद्यार्थियों को पास होने की चिंता नहीं थी, बल्कि अच्छे अंक पाने की होड़ लगी रही। परीक्षा में लिखित परीक्षा सिर्फ 70 अंकों की हुई थी, जबकि 30 अंक कॉलेज के ही शिक्षकों ने दिए थे। जिसमें अधिकांश बच्चों को पूर्णांक ही प्रदान कर दिया गया था। कॉलेजों में होने वाले आंतरिक परीक्षा में विद्यार्थियों को जहां कम-कम दस अंक पाना आवश्यक था, वहीं लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए सिर्फ 23 अंक चाहिए थे। दस-दस अंक की होने वाली आंतरिक परीक्षा अगस्त, अक्तूबर और दिसंबर माह में होने के बाद नंबर सीधे बोर्ड को भेजा गया, जिसे लिखित परीक्षा में जोड़कर रिजल्ट प्रकाशित किया गया। शनिवार को अपनी सफलता देखकर विद्यार्थी खुशी से झूम उठे। अपेक्षा से अधिक अंक पाने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आंतरिक मूल्यांकन का परिणाम रहा कि इस वर्ष जहां बच्चे अधिक उत्तीर्ण हुए हैं वहीं उनके नंबर पाने का प्रतिशत भी अधिक रहा है। शिक्षक भी मान रहे हैं कि विद्यार्थियों के अंकों में जो बढ़ोतरी हुई है, इसकी वजह सतत आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली है।
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क्या है ग्रेडिंग प्रणाली
हाईस्कूल की कॉपियों का मूल्यांकन करते समय शिक्षकों ने परीक्षार्थियों को प्रश्न के हिसाब से अंक प्रदान किया है। कॉपी के ऊपरी भाग पर अंक के साथ ग्रेड प्रदान किया गया है। पास होने के लिए विद्यार्थियों को न्यूनतम डी ग्रेड पाना आवश्यक था।
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अंक ग्रेड
91-100 ए1
81-90 ए2
71-80 बी1
61-70 बी2
51-60 सी1
41-50 सी2
33-40 डी
31-32 ई1
20 से कम ई2