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Pilibhit News: दस साल में ही आयुष विंग की दीवार में पड़ गईं दरारें, टूट गया दरवाजा
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मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित आयुष विंग भवन में चिकित्सक कक्ष में टूटा पड़ा शौचालय का दरवाजा । सं
पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज में दस साल पहले बनाए गए आयुष विंग का मौजूदा समय में बुरा हाल है। भवन के अंदर की दीवार में दरारें पड़ गई हैं तो शौचालय के दरवाजे गलकर टूट गए हैं। ऐसे में यहां मौजूद चिकित्सकों और स्टाॅफ को परेशानी होती है।
मेडिकल कॉलेज में ही आयुष भवन बनाया गया है। यहां पर आयुर्वेदिक दवाएं दी जाती है और मरीजों का इलाज किया जाता है। यहीं पर मलेरिया की जांच भी होती है। इस भवन का निर्माण करीब 10 वर्ष पूर्व कराया गया था। भवन का सही से रखरखाव न होने से बुरा हाल हो गया है। यहां पर दीवार में दरारें पड़ गई हैं तो शौचालय के दरवाजे टूट कर उखड़ गए हैं। यही नहीं पानी की टोंटी भी खराब हैं। दीवार में पड़ी दरारों के कारण अंदर बैठने वालों को हमेशा हादसे का डर सताता रहता है।
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वर्ष 2013 में हुआ था निर्माण
आयुष विंग भवन का वर्ष 2013 में निर्माण कराया गया था। इसके बाद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, फिलहाल भवन की स्थिति काफी खराब है। यहां आने वाले मरीजों को हमेशा किसी हादसे का डर सताता रहता है।
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बैटरे भी खराब, बिजली जाने पर गर्मी से बेहाल हो जाता है स्टाॅफ
आयुष विंग में बिजली के साथ ही इन्वर्टर की भी व्यवस्था की गई थी। बाद में इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। मौजूदा समय में इन्वर्टर चलाने के लिए रखे गए बैटरे खराब हैं। ऐसे में बिजली जाने पर यहां मौजूद स्टाॅफ गर्मी में बेहाल हो जाता है। अधिकारियों से शिकायत की गई पर सुनवाई नहीं हुई।
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आयुष विंग की दीवार में पड़ी दरारों की अभियंता से जांच कराई जाएगी। यह कब बनीं थी और कार्यदायी संस्था कौन थी इसे भी दिखवाया जाएगा। जांच के बाद ही निर्णय किया जाएगा।
- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
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मेडिकल कॉलेज में ही आयुष भवन बनाया गया है। यहां पर आयुर्वेदिक दवाएं दी जाती है और मरीजों का इलाज किया जाता है। यहीं पर मलेरिया की जांच भी होती है। इस भवन का निर्माण करीब 10 वर्ष पूर्व कराया गया था। भवन का सही से रखरखाव न होने से बुरा हाल हो गया है। यहां पर दीवार में दरारें पड़ गई हैं तो शौचालय के दरवाजे टूट कर उखड़ गए हैं। यही नहीं पानी की टोंटी भी खराब हैं। दीवार में पड़ी दरारों के कारण अंदर बैठने वालों को हमेशा हादसे का डर सताता रहता है।
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वर्ष 2013 में हुआ था निर्माण
आयुष विंग भवन का वर्ष 2013 में निर्माण कराया गया था। इसके बाद रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया, फिलहाल भवन की स्थिति काफी खराब है। यहां आने वाले मरीजों को हमेशा किसी हादसे का डर सताता रहता है।
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बैटरे भी खराब, बिजली जाने पर गर्मी से बेहाल हो जाता है स्टाॅफ
आयुष विंग में बिजली के साथ ही इन्वर्टर की भी व्यवस्था की गई थी। बाद में इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। मौजूदा समय में इन्वर्टर चलाने के लिए रखे गए बैटरे खराब हैं। ऐसे में बिजली जाने पर यहां मौजूद स्टाॅफ गर्मी में बेहाल हो जाता है। अधिकारियों से शिकायत की गई पर सुनवाई नहीं हुई।
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आयुष विंग की दीवार में पड़ी दरारों की अभियंता से जांच कराई जाएगी। यह कब बनीं थी और कार्यदायी संस्था कौन थी इसे भी दिखवाया जाएगा। जांच के बाद ही निर्णय किया जाएगा।
- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ

मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित आयुष विंग भवन में चिकित्सक कक्ष में टूटा पड़ा शौचालय का दरवाजा । सं