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गोमती की अविरल धारा में फिर रोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा।
Updated Tue, 05 Jul 2016 11:39 PM IST
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गाोमती
- फोटो : अमर उजाला
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किसानों ने अपनी जमीन बताकर रुकवाई खुदाई
किसान बोले खुदाई से पहले कराया जाए सीमांकन
प्रकृति की अनुपम देन गोमती नदी की धारा को बहाने की कोशिशों में रोड़ा अटक गया है। अभियंताओं द्वारा शुरू कराई गई खुदाई को आसपास के किसानों ने अपनी भूमि बताकर रुकवा दिया है। किसानों ने खुदाई से
पहले सीमांकन कराने और खुदाई में जाने वाली जमीन का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
गोमती की धारा को निर्बाध गति से अविरल बहाने के प्रयासों के प्रथम चरण में शारदा सागर खंड के अभियंताओं ने उद्गम स्थल पर मुख्य झील के उत्तर और दक्षिण दिशा में बने दोनों तालाबों की मशीनों से खुदाई शुरू कराई है। इनमें से एक तालाब माधोटांडा ग्राम पंचायत में आता है, जबकि दूसरा हरीपुर फुल्हर ग्राम पंचायत में है। पहले से इन तालाबों की मनरेगा से आदर्श तालाब के रूप में खुदाई और सफाई होती रही है, लेकिन अब अविरल धारा बहाने को तालाबों को गहरा करने के लिए उनकी खुदाई कराई जा रही है।
शुरूआती दौर में ही अड़चनें
खुदाई के शुरूआती दौर में ही तालाबों के भीतर तमाम जलस्रोत खुल गए हैं। इससे तालाबों में तेजी से पानी भरने लगा है। ठेकेदार ने दो पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालना शुरू किया, लेकिन यह तरीका नाकाम रहा। ऐसे में खुदाई का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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किसानों ने अपनी भूमि बता रुकवाया काम
उद्गम स्थल से आगे जब अभियंताओं ने पुराने नाले की खुदाई करानी शुरू की तो वहां आसपास के तमाम किसान पहुंच गए। किसानों का कहना था कि यह जमीन उनके स्वामित्व वाली है। यहां गोमती नाला कहीं भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं है। यदि नाले की खुदाई करानी है तो पहले सीमांकन कराया जाए और जमीन का मुआवजा दिया जाए। हालांकि अभियंता वीरेंद्र सिंह यादव और रामेश्वर दुबे का कहना है कि अभिलेखों में यह नाला करीब 21 फीट चौड़ा दर्ज है। किसानों ने काम बंद कराके पहले सीमांकन कराने की बात कही है। उनका यह भी कहना था कि यदि प्राकृतिक रूप से जहां धारा बहेगी, उसे वे लोग नहीं रोकेंगे।
कोर्ट से 2012 से खुदाई पर है रोक
पहले जब बाढ़ खंड ने नाला खोदने का प्रयास किया था तो फुल्हर के किसान नवाब अली ने सिविल जज जूनियर डिवीजन के न्यायालय में वाद दायर किया था। कोर्ट ने कमीशन को भी मौके पर भेजा था। कमीशन ने राजस्व अभिलेखों एवं नक्शे के आधार पर रिपोर्ट दी कि फुल्हर गांव के गाटा संख्या 134 से 139 के मध्य नदी या धारा के रूप में कोई भूमि होना प्रदर्शित नहीं है। गोमती की जो धारा प्राकृतिक रूप से बह रही है, वह वादी की भूमि सहित अन्य किसानों की भूमि से होकर बह रही है। ऐसी दशा में बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए भूमि गाटा संख्या 139 रकवा 2.222 हेक्टेयर स्थित ग्राम फुल्हर में वादी के कब्जे एवं दखल में कोई हस्तक्षेप न किया जाए और न ही खुदाई कराई जाए।
आगे भी खुदाई कार्य में फंस सकता है पेच
गोमती की अविरल धारा बहाने को लगभग इस तरह से जनपद सीमा तक करीब पौने दो सौ किसानों की भूमि आती है। इसकी सूची स्वयं शारदा सागर खंड के अधिकारियों ने सर्वे कराके बनवाई है। इधर, कार्य शुरू करने से पहले इस मामले का निस्तारण आज तक नहीं किया जा सका। खुदाई के दौरान यह समस्या तो बरसात बाद जनपद सीमा तक आने वाले किसान भी खड़ी कर सकते हैं, लेकिन विभाग मात्र जल्दबाजी में अपने ठेकेदारों से बरसात में ही खुदाई कराने का उतावलापन दिखा रहा है।
अवर अभियंता वीरेंद्र सिंह यादव और रामेश्वर दुबे ने बताया कि यहां पर गोमती की धारा पहले से बह रही है। इसलिए वह प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद नाले की खुदाई करा रहे हैं। किसानों की आपत्ति के चलते राजस्व विभाग की टीम को बुलाकर बुधवार को सीमांकन कराया जाएगा।
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किसान बोले खुदाई से पहले कराया जाए सीमांकन
प्रकृति की अनुपम देन गोमती नदी की धारा को बहाने की कोशिशों में रोड़ा अटक गया है। अभियंताओं द्वारा शुरू कराई गई खुदाई को आसपास के किसानों ने अपनी भूमि बताकर रुकवा दिया है। किसानों ने खुदाई से
पहले सीमांकन कराने और खुदाई में जाने वाली जमीन का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
गोमती की धारा को निर्बाध गति से अविरल बहाने के प्रयासों के प्रथम चरण में शारदा सागर खंड के अभियंताओं ने उद्गम स्थल पर मुख्य झील के उत्तर और दक्षिण दिशा में बने दोनों तालाबों की मशीनों से खुदाई शुरू कराई है। इनमें से एक तालाब माधोटांडा ग्राम पंचायत में आता है, जबकि दूसरा हरीपुर फुल्हर ग्राम पंचायत में है। पहले से इन तालाबों की मनरेगा से आदर्श तालाब के रूप में खुदाई और सफाई होती रही है, लेकिन अब अविरल धारा बहाने को तालाबों को गहरा करने के लिए उनकी खुदाई कराई जा रही है।
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शुरूआती दौर में ही अड़चनें
खुदाई के शुरूआती दौर में ही तालाबों के भीतर तमाम जलस्रोत खुल गए हैं। इससे तालाबों में तेजी से पानी भरने लगा है। ठेकेदार ने दो पंपिंग सेट लगाकर पानी निकालना शुरू किया, लेकिन यह तरीका नाकाम रहा। ऐसे में खुदाई का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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किसानों ने अपनी भूमि बता रुकवाया काम
उद्गम स्थल से आगे जब अभियंताओं ने पुराने नाले की खुदाई करानी शुरू की तो वहां आसपास के तमाम किसान पहुंच गए। किसानों का कहना था कि यह जमीन उनके स्वामित्व वाली है। यहां गोमती नाला कहीं भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं है। यदि नाले की खुदाई करानी है तो पहले सीमांकन कराया जाए और जमीन का मुआवजा दिया जाए। हालांकि अभियंता वीरेंद्र सिंह यादव और रामेश्वर दुबे का कहना है कि अभिलेखों में यह नाला करीब 21 फीट चौड़ा दर्ज है। किसानों ने काम बंद कराके पहले सीमांकन कराने की बात कही है। उनका यह भी कहना था कि यदि प्राकृतिक रूप से जहां धारा बहेगी, उसे वे लोग नहीं रोकेंगे।
कोर्ट से 2012 से खुदाई पर है रोक
पहले जब बाढ़ खंड ने नाला खोदने का प्रयास किया था तो फुल्हर के किसान नवाब अली ने सिविल जज जूनियर डिवीजन के न्यायालय में वाद दायर किया था। कोर्ट ने कमीशन को भी मौके पर भेजा था। कमीशन ने राजस्व अभिलेखों एवं नक्शे के आधार पर रिपोर्ट दी कि फुल्हर गांव के गाटा संख्या 134 से 139 के मध्य नदी या धारा के रूप में कोई भूमि होना प्रदर्शित नहीं है। गोमती की जो धारा प्राकृतिक रूप से बह रही है, वह वादी की भूमि सहित अन्य किसानों की भूमि से होकर बह रही है। ऐसी दशा में बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए भूमि गाटा संख्या 139 रकवा 2.222 हेक्टेयर स्थित ग्राम फुल्हर में वादी के कब्जे एवं दखल में कोई हस्तक्षेप न किया जाए और न ही खुदाई कराई जाए।
आगे भी खुदाई कार्य में फंस सकता है पेच
गोमती की अविरल धारा बहाने को लगभग इस तरह से जनपद सीमा तक करीब पौने दो सौ किसानों की भूमि आती है। इसकी सूची स्वयं शारदा सागर खंड के अधिकारियों ने सर्वे कराके बनवाई है। इधर, कार्य शुरू करने से पहले इस मामले का निस्तारण आज तक नहीं किया जा सका। खुदाई के दौरान यह समस्या तो बरसात बाद जनपद सीमा तक आने वाले किसान भी खड़ी कर सकते हैं, लेकिन विभाग मात्र जल्दबाजी में अपने ठेकेदारों से बरसात में ही खुदाई कराने का उतावलापन दिखा रहा है।
अवर अभियंता वीरेंद्र सिंह यादव और रामेश्वर दुबे ने बताया कि यहां पर गोमती की धारा पहले से बह रही है। इसलिए वह प्रोजेक्ट स्वीकृत होने के बाद नाले की खुदाई करा रहे हैं। किसानों की आपत्ति के चलते राजस्व विभाग की टीम को बुलाकर बुधवार को सीमांकन कराया जाएगा।