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रात में फार्म हाउस में बाघ घुसने पर भड़के लोग, वन कर्मियों से हुई नोकझोंक
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मंडहरिया खुर्द में बाघ की निगरानी करती टीम।
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। जंगल से निकला एक बाघ लगातार 45 दिनों से रिहायशी इलाके में घूम रहा है। बाघ के घरों में घुसने की घटनाओं के बाद लोगों में वन विभाग के प्रति आक्रोश पनपने लगा है। मंगलवार रात एक फार्म हाउस में बाघ के घुसने के बाद लोग भड़क गए। उनकी बाघ की निगरानी पर मौजूद वनकर्मियों से जमकर नोकझोंक हुई। उनका कहना था बाघ लगातार घरों में घुस रहा है, लेकिन वन विभाग उसे पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा, ऐसे में बाघ किसी की जान ले लेगा तभी ही क्या उसे ट्रेंक्युलाइज करने की अनुमति मिलेगी। वनकर्मियों ने बमुश्किल लोगों को समझाकर शांत किया। बुधवार को भी बाघ पूरनपुर क्षेत्र के मनहरिया खुर्द के आसपास डेरा जमाए रहा। वहीं वन विभाग के अफसरों को बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने के लिए उच्च अधिकारियों की अनुमति का इंतजार है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से भटककर एक बाघ पिछले वर्ष नवंबर में माधोटांडा क्षेत्र में आ पहुंचा था। यहां दो मवेशियों का शिकार करने के बाद बाघ हरदोई ब्रांच नहर के चित्तरपुर पुल के आसपास डेरा जमाए रहा। इसके बाद बाघ ने शाहगढ़ क्षेत्र की खन्नौत नदी के नरकुल क्षेत्र में डेरा जमा लिया। अफसरों के निर्देश पर बाघ को पकड़ने के लिए 27 दिसंबर को पिंजड़ा लगाया गया, मगर बाघ पिंजड़े में नहीं फंसा। इस पर 30 दिसंबर को खन्नौत नदी के पास दूसरा पिंजड़ा लगाया गया, लेकिन बाघ पिंजड़े के आसपास तो घूमता रहा, मगर अंदर नहीं घुसा। छह जनवरी को बाघ ने सिसैया गांव में छुट्टा बछड़े को हमलाकर मार डाला। फिर रात करीब चार बजे सिसैया गांव में एक ग्रामीण की पशुशाला में जा घुसा और एक बकरी को मार डाला। नौ जनवरी की रात बाघ ने पूरनपुर क्षेत्र की ओर रुख किया और नवदिया सुल्तानपुर में सर्वजीत सिंह के फार्म हाउस में जा घुसा। परिवार वालों ने किसी तरह खुद को कमरे में बंद करके जान बचाई। इसके बाद से बाघ लगातार पूरनपुर क्षेत्र के गांव मनहरिया खुर्द में एक गन्ने के खेत में डेरा जमाए हुए है।
मंगलवार रात बाघ मनहरिया खुर्द निवासी मक्खन सिंह के फार्म हाउस में घुस गया। आहट होने पर घरवालों ने बाघ को घूमते देख शोर मचाया तो आसपास रहने वाले किसान और निगरानी में लगी वन विभाग की टीम मौके पर जा पहुंची। टीम के पहुंचते ही किसानों ने वनकर्मियों को खरीखोटी सुनाना शुरू कर दी। किसानों का कहना था कि क्या बाघ किसी की जान लेने के बाद ही पकड़ा जाएगा। वनकर्मियों ने शासन स्तर से बाघ को पकड़ने की अनुमति न मिलने का हवाला देकर बमुश्किल किसानों को शांत कराया। इधर बुधवार को भी किसानों में खासा आक्रोश देखा गया। फिलहाल बाघ पूरे दिन मनहरिया खुर्द के आसपास ही डेरा जमाए रहा। निगरानी टीम भी आसपास मुस्तैद दिखी। सामाजिक वानिकी प्रभाग के एक क्षेत्राधिकारी ने डीएफओ को पत्र भेजकर मानव-वन्यजीव संघर्ष और पनपते आक्रोश को लेकर जल्द बाघ को ट्रेंक्युलाइज कराने का आग्रह किया है।
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बाघ की पूरनपुर क्षेत्र के मनहरिया खुर्द में लोकेशन मिली है। शाम होते ही बाघ बाहर निकल रहा है। शासन स्तर से अभी बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने की अनुमति नहीं मिली है। स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। अनुमति मिलते ही बाघ को पकड़ा जाएगा। - संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से भटककर एक बाघ पिछले वर्ष नवंबर में माधोटांडा क्षेत्र में आ पहुंचा था। यहां दो मवेशियों का शिकार करने के बाद बाघ हरदोई ब्रांच नहर के चित्तरपुर पुल के आसपास डेरा जमाए रहा। इसके बाद बाघ ने शाहगढ़ क्षेत्र की खन्नौत नदी के नरकुल क्षेत्र में डेरा जमा लिया। अफसरों के निर्देश पर बाघ को पकड़ने के लिए 27 दिसंबर को पिंजड़ा लगाया गया, मगर बाघ पिंजड़े में नहीं फंसा। इस पर 30 दिसंबर को खन्नौत नदी के पास दूसरा पिंजड़ा लगाया गया, लेकिन बाघ पिंजड़े के आसपास तो घूमता रहा, मगर अंदर नहीं घुसा। छह जनवरी को बाघ ने सिसैया गांव में छुट्टा बछड़े को हमलाकर मार डाला। फिर रात करीब चार बजे सिसैया गांव में एक ग्रामीण की पशुशाला में जा घुसा और एक बकरी को मार डाला। नौ जनवरी की रात बाघ ने पूरनपुर क्षेत्र की ओर रुख किया और नवदिया सुल्तानपुर में सर्वजीत सिंह के फार्म हाउस में जा घुसा। परिवार वालों ने किसी तरह खुद को कमरे में बंद करके जान बचाई। इसके बाद से बाघ लगातार पूरनपुर क्षेत्र के गांव मनहरिया खुर्द में एक गन्ने के खेत में डेरा जमाए हुए है।
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मंगलवार रात बाघ मनहरिया खुर्द निवासी मक्खन सिंह के फार्म हाउस में घुस गया। आहट होने पर घरवालों ने बाघ को घूमते देख शोर मचाया तो आसपास रहने वाले किसान और निगरानी में लगी वन विभाग की टीम मौके पर जा पहुंची। टीम के पहुंचते ही किसानों ने वनकर्मियों को खरीखोटी सुनाना शुरू कर दी। किसानों का कहना था कि क्या बाघ किसी की जान लेने के बाद ही पकड़ा जाएगा। वनकर्मियों ने शासन स्तर से बाघ को पकड़ने की अनुमति न मिलने का हवाला देकर बमुश्किल किसानों को शांत कराया। इधर बुधवार को भी किसानों में खासा आक्रोश देखा गया। फिलहाल बाघ पूरे दिन मनहरिया खुर्द के आसपास ही डेरा जमाए रहा। निगरानी टीम भी आसपास मुस्तैद दिखी। सामाजिक वानिकी प्रभाग के एक क्षेत्राधिकारी ने डीएफओ को पत्र भेजकर मानव-वन्यजीव संघर्ष और पनपते आक्रोश को लेकर जल्द बाघ को ट्रेंक्युलाइज कराने का आग्रह किया है।
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बाघ की पूरनपुर क्षेत्र के मनहरिया खुर्द में लोकेशन मिली है। शाम होते ही बाघ बाहर निकल रहा है। शासन स्तर से अभी बाघ को ट्रेंक्युलाइज करने की अनुमति नहीं मिली है। स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। अनुमति मिलते ही बाघ को पकड़ा जाएगा। - संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग