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अतिक्रमण अभियान के तीस  दिन पूरे, नहीं बदली तस्वीर 

Wed, 08 Jun 2016 11:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Wed, 08 Jun 2016 11:35 PM IST
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Thirty-encroachment drive Days, the picture changed
रास्ता क्यों न हो जाम - फोटो : pilibhit, beureu
कहते हैं कि अफसरों के आदेश पर चलाए जा रहे अभियान में कार्रवाई से लेकर मॉनिटरिंग का नजरिया भी बेहद सख्त रहता है। मंडल स्तर के अधिकारियों की कार्रवाई पर सीधे निगाह होती है। लेकिन... डीजीपी की ओर से अतिक्रमण को लेकर शुरू की गई मुहिम में यह दावे खोखले साबित हुए हैं। अफसरों से लेकर मातहतों तक सभी लापरवाह बने रहे। नतीजतन अतिक्रमण मुक्त सड़कों के लिए प्रदेश स्तर से चलाई गई मुहिम औपचारिकताओं में सिमट कर रह गई। 
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बतादें कि सूबे के पुलिस महानिदेशक की ओर से सड़कों पर किए जा रहे अतिक्रमण को हटाने के लिए खाकी के कांधों पर जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके लिए आठ मई से आठ जून तक एक विशेष अभियान चलाया गया। जिसमें कार्रवाई का दारोमदार पुलिस को दिया गया। अफसोस, मुहिम को महकमे के ही अफसरों ने पलीता लगा दिया। पहले तो कई दिन सिर्फ बैठकों को आयोजित कर गुजार दिए गए। बाद में हर बार की तरह सड़कों से ज्यादा कागजों में कार्रवाई दिखाने में का काम किया गया। इसके बाद अभियान की समाप्ति से पहले ही कार्रवाई को समाप्त हो गई। अब आखिरी दिन बुधवार को देहात क्षेत्रों में सख्ती का ढोल पीटा गया। हालांकि इस पर भी चर्चाएं अभिलेख दुरुस्त करने की रही, लेकिन शहर में तो आखिरी दिन भी कोई प्रयास नहीं किया गया। हर कोई थाना स्तर पर की गई कार्रवाई से खुद को संतुष्ट बताने लगा है। जबकि सड़कों पर अतिक्रमण के हालात इन दावों की सच्चाई का आइना दिखा रहे है। 
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अफसरों की मॉनिटरिंग पर भी उठे सवाल 
पुलिस की ओर से थाना पुलिस को सौंपी गई जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन किया जा रहा है या नहीं। इसकी मानिटरिंग अफसरों को करनी थी। लेकिन इसमें भी खासी संजीदगी नहीं दिखाई गई। हर कोई सिर्फ औपचारिकताएं निभाने में जुटा रहा। 
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पहले भी बन चुकी है प्लानिंग
ऐसा नहीं कि पुलिस विभाग को पहली बार अतिक्रमण पर कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया। करीब तीन साल पहले भी एक आदेश जारी कर पुलिस को अतिक्रमण के चिन्हितीकरण के लिए लगाया गया था। बकायदा थाने में अतिक्रमण रजिस्टर बनाने के सख्त दिशा निर्देश थे। जिस पर आज भी अधिकांश थानों में कोई काम नहंी किया जा सका। 

आंकड़े पता नहीं, कर रहे समीक्षा 
डीजीपी की मुहिम में बेहतर काम करने वालों को पुरस्कार की घोषणा की गई थी। यह लुभावना ऑफर भी पस्त पुलिस के काम में तेजी नहीं ला सका। पुलिस के पास कार्रवाई को लेकर कोई आंकड़ा ही नहीं है।  यह भी कहा जा सकता है कि आंकड़ों को लेकर महकमा टालमटोल करने को मजबूर है। जबकि शुरूआत में खुद अफसरों ने डेली और साप्ताहिक समीक्षा करने की बात कही थी। 

 
अतिक्रमण अभियान के दौरान हुई कार्रवाई के जिले भर के आंकड़े एकत्र किए जा रहे है। वैसे तो कार्रवाई संतोषजनक हुई है। फिलहाल आंकड़े और सीडी आने मिलने पर किसने बेहतर किया, बताया जा सकेगा। 
-विकास कुमार वैद्य, एएसपी 
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