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Pilibhit News: एक साथ पढ़ाई कर बने फौजी, तीन साल में दोनों के बलिदान से हर आंख हुई नम

Tue, 03 Jun 2025 11:44 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jun 2025 11:44 PM IST
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They studied together and became soldiers, every eye became moist due to the sacrifice of both of them in three years
बलिदान जवान मनतेज सिंह का फाइल फोटो
पीलीभीत। बचपन में साथ खेले, पढ़े और देश की सेवा का संकल्प लिया। तहेरे-चचेरे भाइयों ने एक साथ ही तैयारी की। एक ने एसएसबी और दूसरे ने भारतीय सेना से जुड़कर देश सेवा शुरू कर दी।
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वर्ष 2023 में अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान एक बलिदान हो गया। सोमवार को सिक्किम में हुए भूस्खलन में दूसरा भी बलिदान हो गया। यह कहानी हवलदार लखविंदर सिंह और तीन साल पूर्व बलिदान हुए उसके तहेरे भाई मनतेज सिंह की है। दोनों के जज्बे को याद कर परिजन और ग्रामीणों की आंखें नम हैं।
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ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, लखविंदर और मनतेज सिंह दोनों ने बचपन में पढ़ाई एक साथ की। दोनोंं को बचपन से ही फौजी बनने का सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए दोनों ने साथ ही तैयारी की। लखविंदर सिंह डोगरा रेंजीमेंट और मनतेज सिंह एसएसबी में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए।
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क्षेत्रीय नागरिक जसवंत सिंह का कहना है कि दोनों गांव आते तो देश सेवा का जज्बा दिखता। अन्य युवाओं को भी फौजी बनने के लिए प्रेरित किया करते थे। इस बीच वर्ष 2023 में मनतेज सिंह अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान बलिदान हो गए थे।
अपने भाई से ज्यादा दोस्त के जाने की खबर से लखविंदर दुखी हुए, लेकिन देश सेवा में जुटे रहे। सोमवार को सिक्किम के लाचुंग में हुए भूस्खलन में वह भी बलिदान हो गए। इस खबर से परिवार और आसपास के लोग टूट गए। गांव में लोगों का तांता लग गया। हर किसी की आंखें नम हो गईं। बलिदान हुए हवलदार लखविंदर सिंह और तीन साल पहले बलिदान हुए उसके तहेरे भाई मनतेज सिंह की कहानी को लोग याद करते रहे। (संवाद)



लखविंदर के बुआ का लड़का भी हुआ था बलिदान

पीलीभीत। सिक्किम भूस्खलन में बलिदान हुए हवलदार लखविंदर सिंह के बुआ के लड़के सतनाम सिंह भी देश की सेवा करते हुए बलिदान हुए थे। सतनाम सिंह भी माधोटांडा थाना क्षेत्र के गांव मझारा के निवासी थे। लखविंदर के चाचा सेवानिवृत्त फौजी जसवीर सिंह ने बताया कि सतनाम करीब तीन वर्ष पूर्व जम्मू में बलिदान हुए थे। सतनाम का गांव लखविंदर के गांव धुरिया पलिया से दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर है। क्षेत्र में तीन बलिदानियों का घर होने के बाद भी रास्ते और कई अन्य समस्याएं हैं। संवाद

बलिदान जवान मनतेज सिंह का फाइल फोटो

बलिदान जवान मनतेज सिंह का फाइल फोटो

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