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जलस्तर कम होने पर शारदा पुराने ढर्रे पर
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Fri, 08 Jul 2016 11:07 PM IST
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शारदा पार जाने में बढ़ी परेशानी
- फोटो : pilibhit, beureu
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शारदा नदी के जलस्तर में गिरावट आने के बाद नदी अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़ी है। नदी अब तक नलडेंगा क्षेत्र में 50 एकड़ भूमि का कटान कर चुकी है। नगरियाखुर्द में बाढ़ खंड द्वारा बनवाए गए दो स्पर भी नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। वहीं नदी की चौड़ाई अधिक होने के कारण शारदा पार इलाके के लोग जान जोखिम में डालकर नाव द्वारा नदी के उस पार पहुंच रहे हैं।
शारदा नदी के जलस्तर में गिरावट आने के बाद वैसे तो नदी के दाएं किनारे पर तत्काल कोई खतरा तो नजर नहीं आ रहा है। उसकी वजह क्षेत्र में नदी की चौड़ाई अधिक होना है, लेकिन कुछ स्थानों पर नदी पूर्व बरसों में छोड़ी गई जमीन को काटती हुई अपने पुराने स्थानों की ओर बढ़ रही है, जिसमें नलडेंगा क्षेत्र में पिछले वर्षों में कटान के बाद जो भूमि छोड़ी थी, उसमें लगभग 50 एकड़ भूमि कट चुकी है।
नगरियाखुर्द कलां में बाढ़ खंड ने नदी से डैम की दूरी कम होने के चलते यहां 11 स्पर बनाए गए थे। मार्जिनल बांध के किनारे पूर्व वर्षों में बने पत्थरों के स्पर 9ए व 9 बी पर नदी के पानी की धार का प्रवाह कम रहे, इसको लेकर दोनों के बीच अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्यों के रूप में तीन बल्ला स्पर बनाए थे। उसमें दो स्पर भी नदी की भेंट चढ़ गए। यहां नदी के प्रवाह को उक्त दोनों पत्थर के बने स्पर कटान गति को कम किए हुए हैं। यदि इन स्परों को क्षति हो गई तो नगरियाखुर्द में बनी बाढ़ नियंत्रण योजना को भारी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा नदी रमनगरा क्षेत्र में भी पिछले वर्षों मेें जो भूमि छोड़ी थी उसका कटान कर दाएं किनारे की ओर बढ़ती जा रही है।
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जान जोखिम में डाल नाव
से सफर कर रहे हैं लोग
शारदा नदी की चौड़ाई अधिक होने के चलते जहां नदी की धार का प्रवाह है, वहां नाव का संचालन किया जा रहा है। इन दिनों इस क्षेत्र में नदी की चौड़ाई लगभग ढाई किमी है। ऐसे मेें शारदा पार के लोग पैदल नदी की धार तक आ रहे हैं और वहां से लगभग एक फर्लांग तक रस्सियों के सहारे नाव को खींचकर ले जाते हैं। तब कहीं नाव के उस पर जा पा रही है। नाविक बाड़ू का कहना है कि यह सब जोखिम भरा कार्य है। नदी के बीच में आने से जब जलस्तर बढ़ने लगता है तो नदी के किनारे तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
नदी के दाएं किनारे पर बने सभी बाढ़ नियंत्रण कार्य सुरक्षित हैं। आगे भी उन्हें कोई खतरा नहीं है। इन दिनों नदी भीतरी हिस्से में कटान कर रही है।
- श्याम सिंह बघेल, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड
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शारदा नदी के जलस्तर में गिरावट आने के बाद वैसे तो नदी के दाएं किनारे पर तत्काल कोई खतरा तो नजर नहीं आ रहा है। उसकी वजह क्षेत्र में नदी की चौड़ाई अधिक होना है, लेकिन कुछ स्थानों पर नदी पूर्व बरसों में छोड़ी गई जमीन को काटती हुई अपने पुराने स्थानों की ओर बढ़ रही है, जिसमें नलडेंगा क्षेत्र में पिछले वर्षों में कटान के बाद जो भूमि छोड़ी थी, उसमें लगभग 50 एकड़ भूमि कट चुकी है।
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नगरियाखुर्द कलां में बाढ़ खंड ने नदी से डैम की दूरी कम होने के चलते यहां 11 स्पर बनाए गए थे। मार्जिनल बांध के किनारे पूर्व वर्षों में बने पत्थरों के स्पर 9ए व 9 बी पर नदी के पानी की धार का प्रवाह कम रहे, इसको लेकर दोनों के बीच अस्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्यों के रूप में तीन बल्ला स्पर बनाए थे। उसमें दो स्पर भी नदी की भेंट चढ़ गए। यहां नदी के प्रवाह को उक्त दोनों पत्थर के बने स्पर कटान गति को कम किए हुए हैं। यदि इन स्परों को क्षति हो गई तो नगरियाखुर्द में बनी बाढ़ नियंत्रण योजना को भारी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा नदी रमनगरा क्षेत्र में भी पिछले वर्षों मेें जो भूमि छोड़ी थी उसका कटान कर दाएं किनारे की ओर बढ़ती जा रही है।
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जान जोखिम में डाल नाव
से सफर कर रहे हैं लोग
शारदा नदी की चौड़ाई अधिक होने के चलते जहां नदी की धार का प्रवाह है, वहां नाव का संचालन किया जा रहा है। इन दिनों इस क्षेत्र में नदी की चौड़ाई लगभग ढाई किमी है। ऐसे मेें शारदा पार के लोग पैदल नदी की धार तक आ रहे हैं और वहां से लगभग एक फर्लांग तक रस्सियों के सहारे नाव को खींचकर ले जाते हैं। तब कहीं नाव के उस पर जा पा रही है। नाविक बाड़ू का कहना है कि यह सब जोखिम भरा कार्य है। नदी के बीच में आने से जब जलस्तर बढ़ने लगता है तो नदी के किनारे तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
नदी के दाएं किनारे पर बने सभी बाढ़ नियंत्रण कार्य सुरक्षित हैं। आगे भी उन्हें कोई खतरा नहीं है। इन दिनों नदी भीतरी हिस्से में कटान कर रही है।
- श्याम सिंह बघेल, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड