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Pilibhit News: ढेरम मडरिया गांव का निकला मादा तेंदुए पर कुल्हाड़ी से वार करने वाला

Sat, 12 Apr 2025 11:25 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 12 Apr 2025 11:25 PM IST
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The person who attacked the female leopard with an axe turned out to be from Dheram Madaria village
पीलीभीत। मादा तेंदुए पर कुल्हाड़ी से वार करने वाला वनकर्मी नहीं, बल्कि ग्रामीण निकला। जांच के दौरान अफसरों ने उसे ट्रेस किया। उसकी धरपकड़ के प्रयास करने के दावे भी किए जा रहे हैं, लेकिन अभी वह हत्थे नहीं चढ़ सका है। इसके अलावा वायरल वीडियो में दिख रहे वनकर्मियों समेत चार अन्य लोगों के भी बयान दर्ज किए गए हैं।
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माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर रिछौला के पास पिछले दिनों वाहन की टक्कर लगने के बाद दो साल का मादा तेंदुया घायल हो गया था। हादसे के बाद मार्ग के किनारे झाड़ियों से उसे बचाकर पिंजरे में कैद किए जाने के दौरान उसकी मौत हो गई थी। विभाग ने पोस्टमॉर्टम के बाद अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
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हादसे के दो दिन बाद वीडियो वायरल होने से मामला फिर सुर्खियों में आ गया। रेस्क्यू के दौरान खाली हाथ करीब जाने पर तेंदुए ने वाचर पर हमला किया था। इसी समय तेंदुए पर दूसरे व्यक्ति ने कुल्हाड़ी से वार कर दिया। अफसरों की मौजूदगी में हुए पूरे घटनाक्रम को दबा दिया गया था। वीडियो वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आने पर सामाजिक वानिकी के डीएफओ भरत कुमार ने एसडीओ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम को जांच सौंपी थी।
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जांच में सामने आया कि कुल्हाड़ी से तेंदुए पर वार करने वाला वनकर्मी नहीं, गांव झेरम मडरिया निवासी एक ग्रामीण है। इसके अलावा वीडियो में घायल वाचर समेत तीन वनकर्मी और एक बाघ मित्र दिख रहा है। विभाग की ओर से ग्रामीण को पकड़ने के प्रयास किए गए, लेकिन वह पकड़ से दूर है। वनकर्मियों समेत चार अन्य के बयान दर्ज किए गए हैं।


अफसरों के सामने होता रहा कुल्हाड़ी से वार
तेंदुए के कुल्हाड़ी से वार करने के मामले में पांच लोगों को ट्रेस करने की बात कही गई है। इसमें तीन वनकर्मी, एक बाघ मित्र के अलावा एक ग्रामीण शामिल है। अफसरों का कहना है कि कुल्हाड़ी से वार करने वाला ग्रामीण है। उसको भी ट्रेस कर लिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि रेस्क्यू के दौरान मौके पर मौजूद रेंजर से लेकर वन दरोगा समेत वन महकमे के अन्य लोगों के बीच ग्रामीण कुल्हाड़ी लेकर कैसे पहुंच गया? सतर्कता बरतने के बजाय खाली हाथ तेंदुए के पास जा रहे वनकर्मियों को क्यों नहीं रोका गया? हमलावर होने पर तेंदुए पर कुल्हाड़ी से वार करने की घटना को क्यों दबाया गया...यह सवाल उठ रहे हैं।


कुल्हाड़ी से हमला करने वाले की धरपकड़ के लिए पुलिस की ली जाएगी मदद
कुल्हाड़ी से हमला करने वाले ढेरम मडरिया के ग्रामीण को पकड़ने के लिए पुलिस की मदद लेने की बात कही जा रही है। अफसरों का कहना है कि विभागीय टीम कई बार दबिश दे चुकी है, लेकिन वह पकड़ से दूर है। ऐसे में उसकी धरपकड़ के लिए पुलिस का सहयोग लिया जाएगा।

तेंदुए पर कुल्हाड़ी से वार करने के मामले में पांच लोगों को ट्रेस किया गया है। कुल्हाड़ी से वार करने वाले ग्रामीण को चिह्नित कर धरपकड़ के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसके अलावा तीन अन्य वनकर्मी और एक बाघ मित्र के भी बयान लिए गए हैं। जल्द ही मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - भरत कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी


जंगल के मार्गों पर रफ्तार कम करने के लिए हर तीन किमी पर रखे जाएंगे ड्रम
- वाहनों की चपेट में आकर वन्यजीवों की हो रही मौत के बाद अफसरों ने शुरू की कवायद
- माधोटांडा-पीलीभीत और पूरनपुर-खटीमा जंगल मार्ग पर वन्यजीवों की अधिक रहती है सक्रियता
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। जंगल मार्गों पर वाहनों की रफ्तार कम करने के लिए हर तीन किमी पर ड्रम रखे जाएंगे। इसके अलावा वाहनों की गति नियंत्रित करने के अन्य प्रयासों पर भी अमल होगा। पूर्व में वाहन की टक्कर से मादा तेंदुए की मौत के बाद अफसर गंभीर हुए हैं। डीएफओ ने विभागीय मंथन के बाद ड्रम रखने के साथ रफ्तार रोकने के अन्य प्रयासों पर अमल शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की माला, महोफ और बराही रेंज के जंगल मार्गों पर वन्यजीवों की अक्सर चहलकदमी बनी रहती है। इसमें माधोटांडा-पीलीभीत और पूरनपुर-खटीमा जंगल मार्ग बाघ समेत वन्यजीवों की सक्रियता को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है। वन्यजीवों की चहलकदमी के वीडियो भी वायरल होते हैं।
इन मार्गों पर बड़े वाहनों के अलावा छोटे वाहनों की आवाजाही भी नियमित रूप से रहती है। ऐसे में पीटीआर प्रशासन सुरक्षा के लिहाज से जंगल क्षेत्र में 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से वाहनों को ले जाने के नियमों का पालन कराने पर जोर दे रहा है। रफ्तार थामने के लिए जंगल सीमा पर लगे बैरियरों पर निगरानी बढ़ाने के दावे भी किए गए, लेकिन इस बीच वाहनों की रफ्तार पर अंकुश न लगने से वन्यजीवों की मौत की घटनाएं सामने आती रहीं। पिछले दिनों माधोटांडा मार्ग पर एक मादा तेंदुए की वाहन की टक्कर के बाद मौत हो गई थी। इससे विभागीय निगरानी पर सवाल भी खड़े हुए थे।

मादा तेंदुए की मौत के बाद विभागीय अफसर गंभीर हुए। जंगल मार्गों पर वाहनों की गति कम करने के प्रयासों पर मंथन किया गया। जंगल मार्गों पर ड्रम रखवाने के निर्णय लिया। तीन किमी के दायरे में ड्रमों को रखवाया जाएगा। वनकर्मियों की जंगल मार्गों पर नियमित रूप से ड्यूटी लगाई जाएगी। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि जंगल मार्गों पर वाहनों की रफ्तार कम करने के लिए ड्रम रखवाने का निर्णय लिया गया है। अन्य प्रयासों पर भी जल्द ही अमल किया जाएगा।
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