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गन्ना आयुक्त के आदेश को दरकिनार कर किसानों को थमा दी करोड़ों की दवा
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पीलीभीत। एलएच चीनी मिल में गन्ना किसानों कीे बिना सहमति एग्रो केमिक लोन के नाम पर दवा देकर उनके बकाया भुगतान से लोन की धनराशि राशि काटी गई। गन्ना आयुक्त के आदेश हैं कि किसान की बिना सहमति के उसको न तो दवा दी जाए, और कोई ऋण। अब चीनी मिल प्रबंधन ने इसे स्टाफ की तकनीकी गलती बताकर गड़बड़ी से इनकार कर रहा है। मिल प्रबंधन ने कहा कि जिन किसानों का पैसा गलत कट गया है, उसे वापस किया जा रहा है।
मामला करीब दो साल पुराना है। एलएच चीनी मिल ने एग्री केमिक लोन के नाम करोड़ो रुपये का भुगतान किसानों के गन्ना भुगतान से काट लिया। किसानों को यह जानकारी उस समय हुई तब उनके खातों से धनराशि काटी गई। उस दौरान किसानों ने इस मामले में डीएम से भी शिकायत की। किसान सुभाष गंगवार, गोदावरी देवी, रूपेंद्र कुमार, सावित्री देवी, गवान सिंह, नत्थू, रमेश चंद्र, दयाशंकर, पूरन, विद्यादेवी, आसेराम के नाम से करोड़ों का एग्री केमिक लोन चढ़ा दिया गया। डीएम ने जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र मिश्र को जांच के आदेश दिए थे। सीडीओ ने किसानों और चीनी मिल अधिकारियों को बुलाकर मामले की जानकारी की। उस दौरान मिल अफसरों ने यह कहकर मामला रफा-दफा कर दिया कि लोन उनके कर्मचारियों ने गलती से चढ़ाया है। बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुछ जागरूक किसानों ने इस मामले में शासन स्तर पर शिकायत की। उस पर प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने तीन सदस्यीय कमेटी गठन करते हुए जांच के आदेश दिए। इधर तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में किसानों के बयान दर्ज किए। मगर, मिल प्रबंधन इस बात पर कायम है कि स्टाफ की गलती की वजह से किसानों के नाम से पैसा गलत तरीके से कट गया। उसे किसानों को भुगतान किया जा रहा है।
किसानों को गन्ने के विकास के लिए दवाइयां दी जाती हैं। किसान जो दवाई लेता है, उसका भुगतान गन्ने के मूल्य से समायोजित होता है। कर्मचारियों ने किसानों को दी जाने वाली दवा गलत फीड कर दी। उस कर्मचारी पर कार्रवाई कर दी गई। इसमें किसी तरह का गड़बड़ी नहीं है। किसान का गलत पैसा कटा है तो उसे भुगतान कर दिया गया है। -एलएच शुगर मिल प्रबंधन
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मामला करीब दो साल पुराना है। एलएच चीनी मिल ने एग्री केमिक लोन के नाम करोड़ो रुपये का भुगतान किसानों के गन्ना भुगतान से काट लिया। किसानों को यह जानकारी उस समय हुई तब उनके खातों से धनराशि काटी गई। उस दौरान किसानों ने इस मामले में डीएम से भी शिकायत की। किसान सुभाष गंगवार, गोदावरी देवी, रूपेंद्र कुमार, सावित्री देवी, गवान सिंह, नत्थू, रमेश चंद्र, दयाशंकर, पूरन, विद्यादेवी, आसेराम के नाम से करोड़ों का एग्री केमिक लोन चढ़ा दिया गया। डीएम ने जिला गन्ना अधिकारी जितेंद्र मिश्र को जांच के आदेश दिए थे। सीडीओ ने किसानों और चीनी मिल अधिकारियों को बुलाकर मामले की जानकारी की। उस दौरान मिल अफसरों ने यह कहकर मामला रफा-दफा कर दिया कि लोन उनके कर्मचारियों ने गलती से चढ़ाया है। बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कुछ जागरूक किसानों ने इस मामले में शासन स्तर पर शिकायत की। उस पर प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने तीन सदस्यीय कमेटी गठन करते हुए जांच के आदेश दिए। इधर तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में किसानों के बयान दर्ज किए। मगर, मिल प्रबंधन इस बात पर कायम है कि स्टाफ की गलती की वजह से किसानों के नाम से पैसा गलत तरीके से कट गया। उसे किसानों को भुगतान किया जा रहा है।
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किसानों को गन्ने के विकास के लिए दवाइयां दी जाती हैं। किसान जो दवाई लेता है, उसका भुगतान गन्ने के मूल्य से समायोजित होता है। कर्मचारियों ने किसानों को दी जाने वाली दवा गलत फीड कर दी। उस कर्मचारी पर कार्रवाई कर दी गई। इसमें किसी तरह का गड़बड़ी नहीं है। किसान का गलत पैसा कटा है तो उसे भुगतान कर दिया गया है। -एलएच शुगर मिल प्रबंधन
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