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शारदा के कटान ने फिर पकड़ी रफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा।
Updated Sun, 14 Aug 2016 11:42 PM IST
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शारदा नदी
- फोटो : अमर उजाला
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- बुझिया में पांच और बिजौरी जंगल की ढाई एकड़ जमीन नदी ने निगली
- एसडीएम ने कटान का जायजा लेकर जिलाधिकारी को कराया अवगत
शारदा नदी का जलस्तर कम होने के बाद भी कटान की गति रविवार को अचानक बढ़ गई। नदी की मुख्य धारा का प्रवाह रमनगरा बुझिया की ओर होने से करीब पांच एकड़ कृषि भूमि नदी में समा गई। वहीं, बिजौरी खुर्दकलां के जंगल में दूसरे दिन भी कटान जारी रहा। इधर एसडीएम नन्हें लाल ने कटान क्षेत्र का दौराकर डीएम को मामले से अवगत कराया है।
शारदा नदी का जलस्तर घटने के बाद रविवार को नदी की मुख्य धार का प्रवाह रमनगरा बुझिया की ओर दाएं किनारे पर हो गया, जिससे भू कटान की गति काफी तेज हो गई। सुबह से लेकर अब तक करीब पांच एकड़ भूमि मय फसलों के नदी में समा गई। इधर, नदी ने पड़ोस में ही बिजौरी खुर्दकलां के जंगल में कटान जारी रखा। हालांकि, यहां कटान की गति पेड़ों की अधिकता के चलते कम है। रविवार को यहां भी करीब ढाई एकड़ जंगल क्षेत्र कटान की जद में आने का अनुमान लगाया जा रहा है। एकाएक तेज हुए कटान से क्षेत्र के लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।
इधर, एसडीएम नन्हें लाल राजस्व कर्मियों के साथ कटान स्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने बिजौरी खुर्दकलां की सीमा तक ग्रामीणों के साथ पैदल भ्रमण कर कटान का जायजा लिया और ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि यदि यहां पर शुरुआती दौर में बाढ़ नियंत्रण कार्य करा दिए जाते तो कटान रुक सकता था। ग्रामीणों ने एसडीएम को वह नाला भी दिखाया, जिसके सहारे नदी काफी तेजी से पलिया कॉलोनी की ओर बढ़ रही है। इस पर एसडीएम ने दूरभाष के जरिए बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता मिन्हाज अहमद से बात कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया। जिस पर उन्होंने सहायक अभियंता श्याम सिंह बघेल को मौके पर भेजने की बात कही। इस बीच ग्रामीणों ने कारसेवा कर विभाग का सहयोग करने की भी बात कही। एसडीएम ने डीएम को भी मामले से अवगत कराया है। इधर, क्षेत्र के किसानों ने कारागार मंत्री को ज्ञापन भेजकर उनसे कटान संबंधी मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखकर बचाव कार्य कराने की गुहार लगाई। इस मौके पर नायब तहसीलदार शेर सिंह, कानूनगो ब्रजेंद्र राना, लेखपाल राजेश, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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लेखपाल को रात्रि कैंप करने के निर्देश
एसडीएम ने बाढ़ पीड़ितों की सूची लेखपाल से तलब की और उन्हें रात में भी कैंप करने के निर्देश दिए ताकि कटान की स्थिति की बराबर जानकारी मिल सके।
- एसडीएम ने कटान का जायजा लेकर जिलाधिकारी को कराया अवगत
शारदा नदी का जलस्तर कम होने के बाद भी कटान की गति रविवार को अचानक बढ़ गई। नदी की मुख्य धारा का प्रवाह रमनगरा बुझिया की ओर होने से करीब पांच एकड़ कृषि भूमि नदी में समा गई। वहीं, बिजौरी खुर्दकलां के जंगल में दूसरे दिन भी कटान जारी रहा। इधर एसडीएम नन्हें लाल ने कटान क्षेत्र का दौराकर डीएम को मामले से अवगत कराया है।
शारदा नदी का जलस्तर घटने के बाद रविवार को नदी की मुख्य धार का प्रवाह रमनगरा बुझिया की ओर दाएं किनारे पर हो गया, जिससे भू कटान की गति काफी तेज हो गई। सुबह से लेकर अब तक करीब पांच एकड़ भूमि मय फसलों के नदी में समा गई। इधर, नदी ने पड़ोस में ही बिजौरी खुर्दकलां के जंगल में कटान जारी रखा। हालांकि, यहां कटान की गति पेड़ों की अधिकता के चलते कम है। रविवार को यहां भी करीब ढाई एकड़ जंगल क्षेत्र कटान की जद में आने का अनुमान लगाया जा रहा है। एकाएक तेज हुए कटान से क्षेत्र के लोगों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।
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इधर, एसडीएम नन्हें लाल राजस्व कर्मियों के साथ कटान स्थल पर पहुंचे। यहां उन्होंने बिजौरी खुर्दकलां की सीमा तक ग्रामीणों के साथ पैदल भ्रमण कर कटान का जायजा लिया और ग्रामीणों की समस्याएं भी सुनीं। ग्रामीणों ने बताया कि यदि यहां पर शुरुआती दौर में बाढ़ नियंत्रण कार्य करा दिए जाते तो कटान रुक सकता था। ग्रामीणों ने एसडीएम को वह नाला भी दिखाया, जिसके सहारे नदी काफी तेजी से पलिया कॉलोनी की ओर बढ़ रही है। इस पर एसडीएम ने दूरभाष के जरिए बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता मिन्हाज अहमद से बात कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया। जिस पर उन्होंने सहायक अभियंता श्याम सिंह बघेल को मौके पर भेजने की बात कही। इस बीच ग्रामीणों ने कारसेवा कर विभाग का सहयोग करने की भी बात कही। एसडीएम ने डीएम को भी मामले से अवगत कराया है। इधर, क्षेत्र के किसानों ने कारागार मंत्री को ज्ञापन भेजकर उनसे कटान संबंधी मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखकर बचाव कार्य कराने की गुहार लगाई। इस मौके पर नायब तहसीलदार शेर सिंह, कानूनगो ब्रजेंद्र राना, लेखपाल राजेश, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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लेखपाल को रात्रि कैंप करने के निर्देश
एसडीएम ने बाढ़ पीड़ितों की सूची लेखपाल से तलब की और उन्हें रात में भी कैंप करने के निर्देश दिए ताकि कटान की स्थिति की बराबर जानकारी मिल सके।