{"_id":"59bd198e4f1c1bb4688b4f89","slug":"seven-lakh-liters-of-water-per-day-falling-in-khakra-river","type":"story","status":"publish","title_hn":"खकरा नदी में प्रतिदिन गिर रहा सात लाख लीटर अवजल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खकरा नदी में प्रतिदिन गिर रहा सात लाख लीटर अवजल
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Sat, 16 Sep 2017 06:26 PM IST
विज्ञापन
खकरा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार मोहल्लों की 4500 आबादी का गंदा पानी नदी को कर रहा दूषित
आने वाले दिनों में खड़ा हो सकता है स्वच्छ पानी का संकट
करीब ढाई लाख की आबादी वाले शहर से रोजाना करीब 17 मिलियन लीटर जल दूषित निकल रहा है। यही दूषित जल शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली देवहा व खकरा नदियों को कई सालों से प्रदूषित कर रहा है। शहर भर का गंदा पानी आठ नालों के जरिए इन नदियों में पहुंच रहा है। दूषित जल ही नहीं अपशिष्ट पदार्थ भी नालों के माध्यम से नदी में जा रहा है। ईद, बकरीद, होली, दीपावली जैसे पर्व पर भी अपशिष्ट की मात्रा रोजाना की तुलना में दो गुनी हो जाती है। अमर उजाला ने शनिवार को खकरा नदी में गिरने वाले वाले एक अकेले नाले की पड़ताल की तो जो सच सामने आया, वह हैरान कर देने वाला है। पेश है खकरा नदी में गिरने वाले एक नाले की रिपोर्ट-
यूं तो खकरा नदी का उद्गम पहाड़ी क्षेत्र माना गया है। पीलीभीत में यह करीब 25 किमी का लंबा सफर तय कर ब्रह्मचारी घाट के समीप देवहा नदी में मिलती है। इस नदी में शहर के दो नालों से अवजल गिरते हैं। एक नाला शाहजी मियां की मजार के सामने से होकर करीब एक किमी लंबा सफर तय कर खकरा नदी मेें गिरता है। इस नाले के जरिए करीब 4500 आबादी का गंदा पानी व अपशिष्ट पदार्थ भी कई सालों से नदी में बहाया जा रहा है।
नाले में चार मोहल्लों का जा रहा अवजल
खकरा नदी में गिरने वाले इस नाले से शहर के मोहल्ला मुनीर खां, कबीर खां, भूरे खां आंशिक व आवास विकास कॉलोनी आंशिक जुड़े हैं। इन चारों मोहल्लों में रहने वाली करीब 4500 आबादी का पौने सात लाख लीटर दूषित पानी रोजाना ही खकरा में जा रहा है। इस नाले में मल की खुली नालियां, अपशिष्ट पदार्थ समेत मलबा आदि बरसों से खकरा नदी में जा रहा है। ईद, बकरीद, होली, दीपावली जैसे पर्व पर अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में दो गुनी हो जाती है। लेकिन जिम्मेदारों को इसकी परवाह नहीं है। वाले मियां के मजार तक पहुंचते-पहुंचते यह नाला विकराल रूप धारण कर लेता है। मलबे से पटा होने के चलते इसकी दुर्गंध से लोग परेशान रहते हैं। मोहल्ला भूरे खां की बुजुर्ग नसीबन कहती हैं कि पहले ऐसा कुछ नहीं था। उनके देखते देखते नालों का गंदा पानी खकरा में डालकर उसे और मैला किया जा रहा है। यही पानी हम प्रयोग में ला रहे हैं। किसी को इसकी चिंता नहीं है। यही वजह है कि लोग अब ज्यादा बीमार रहने लगे हैं। मुनीर खां में नाले के किनारे बसे कुछ परिवार के लोगों ने बताया कि नाले की गंदगी तो जीना दुश्वार किए हुए ही है, लेकिन बरसात में नाला जाम होने पर गंदा पानी घरों में घुस जाता है।
विज्ञापन
लाखों लीटर दूषित जल से खकरा का अस्तित्व संकट में
पालिका प्रशासन के मुताबिक शहर के 29 नालों के माध्यम से रोजाना करीब 17 मिलियन लीटर दूषित पानी देवहा व खकरा नदी में पहुंच रहा है। इसमें अकेले वाले मियां की मजार से होकर खकरा नदी में गिरने वाले नाले के जरिए पौने सात लाख लीटर दूषित पानी पहुंच रहा है। अब सालों से डाले जा रहे गंदे पानी से खकरा नदी का अस्तित्व क्या होगा? इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक नदी का पानी काला होने के साथ-साथ जहरीला भी होता जा रहा है। हालात यह है कि इसमें रहने वाले जलीय जीवजंतुओं की संख्या भी कम होती जा रही है।
जिला प्रशासन शासन स्तर पर करें पैरवी
देश की नदियां पवित्रता की पहचान हैं, लेकिन आज बड़ी बड़ी नदियां भी प्रदूषण का शिकार हैं। अपने छोटे से शहर का ही सारा गंदा पानी देवहा खकरा में डाला जा रहा है। जिला प्रशासन को चाहिए कि शासन स्तर पर पैरवी कर नदियों को गंदा होने से बचाए।
आरिफ हजरत खां
आने वाले दिनों में फैल सकती है महामारी
गंदा पानी सिर्फ नदियों को ही नहीं बल्कि आम जनता के लिए काफी खतरनाक है। इन नदियों का पानी ही नलों के माध्यम से हमारे घरों में पहुंचता है। ऐसे में यदि गंदा पानी डालकर नदियों को गंदा किया जाएगा तो आने वाले दिनों मेें महामारी फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता।
खाऊ कमाऊ नीति ने किया बेड़ा गर्क
नदियों में गंदा पानी बहाने के लिए शासन, प्रशासन और सरकारें ही दोषी है। सिर्फ खाऊ कमाऊ नीति के चलते शुरूआत में इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब नदियों का वजूद ही खत्म हो रहा है तो उन पर करोड़ों खर्च कर बड़ी रकम को डकराने के लिए प्लान बनाए जा रहे हैं।
अमृत योजना के तहत नदी होगी प्रदूषण मुक्त
देवहा व खकरा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अमृत योजना के तहत खाका खींचा गया है। इसके तहत वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की कवायद चल रहा है। यह करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट है। इसको लेकर शासन स्तर पर जल्द बैठक भी होने वाली है।
सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
एसटीपी की जल्द होगी स्थापना
नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में तेजी से प्रयास चल रहा है। जिला प्रशासन के माध्यम से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट शासन को भेजा गया है। प्रोजेक्ट को जल्द स्वीकृति मिलने के आसार हैं। इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों की जांच कर उनसे प्रदूषण मुक्त का सर्टिफिकेट ले लिया गया है।
शीतल वर्मा, जिलाधिकारी
विज्ञापन
आने वाले दिनों में खड़ा हो सकता है स्वच्छ पानी का संकट
करीब ढाई लाख की आबादी वाले शहर से रोजाना करीब 17 मिलियन लीटर जल दूषित निकल रहा है। यही दूषित जल शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली देवहा व खकरा नदियों को कई सालों से प्रदूषित कर रहा है। शहर भर का गंदा पानी आठ नालों के जरिए इन नदियों में पहुंच रहा है। दूषित जल ही नहीं अपशिष्ट पदार्थ भी नालों के माध्यम से नदी में जा रहा है। ईद, बकरीद, होली, दीपावली जैसे पर्व पर भी अपशिष्ट की मात्रा रोजाना की तुलना में दो गुनी हो जाती है। अमर उजाला ने शनिवार को खकरा नदी में गिरने वाले वाले एक अकेले नाले की पड़ताल की तो जो सच सामने आया, वह हैरान कर देने वाला है। पेश है खकरा नदी में गिरने वाले एक नाले की रिपोर्ट-
यूं तो खकरा नदी का उद्गम पहाड़ी क्षेत्र माना गया है। पीलीभीत में यह करीब 25 किमी का लंबा सफर तय कर ब्रह्मचारी घाट के समीप देवहा नदी में मिलती है। इस नदी में शहर के दो नालों से अवजल गिरते हैं। एक नाला शाहजी मियां की मजार के सामने से होकर करीब एक किमी लंबा सफर तय कर खकरा नदी मेें गिरता है। इस नाले के जरिए करीब 4500 आबादी का गंदा पानी व अपशिष्ट पदार्थ भी कई सालों से नदी में बहाया जा रहा है।
विज्ञापन
नाले में चार मोहल्लों का जा रहा अवजल
खकरा नदी में गिरने वाले इस नाले से शहर के मोहल्ला मुनीर खां, कबीर खां, भूरे खां आंशिक व आवास विकास कॉलोनी आंशिक जुड़े हैं। इन चारों मोहल्लों में रहने वाली करीब 4500 आबादी का पौने सात लाख लीटर दूषित पानी रोजाना ही खकरा में जा रहा है। इस नाले में मल की खुली नालियां, अपशिष्ट पदार्थ समेत मलबा आदि बरसों से खकरा नदी में जा रहा है। ईद, बकरीद, होली, दीपावली जैसे पर्व पर अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा सामान्य दिनों की तुलना में दो गुनी हो जाती है। लेकिन जिम्मेदारों को इसकी परवाह नहीं है। वाले मियां के मजार तक पहुंचते-पहुंचते यह नाला विकराल रूप धारण कर लेता है। मलबे से पटा होने के चलते इसकी दुर्गंध से लोग परेशान रहते हैं। मोहल्ला भूरे खां की बुजुर्ग नसीबन कहती हैं कि पहले ऐसा कुछ नहीं था। उनके देखते देखते नालों का गंदा पानी खकरा में डालकर उसे और मैला किया जा रहा है। यही पानी हम प्रयोग में ला रहे हैं। किसी को इसकी चिंता नहीं है। यही वजह है कि लोग अब ज्यादा बीमार रहने लगे हैं। मुनीर खां में नाले के किनारे बसे कुछ परिवार के लोगों ने बताया कि नाले की गंदगी तो जीना दुश्वार किए हुए ही है, लेकिन बरसात में नाला जाम होने पर गंदा पानी घरों में घुस जाता है।
विज्ञापन
लाखों लीटर दूषित जल से खकरा का अस्तित्व संकट में
पालिका प्रशासन के मुताबिक शहर के 29 नालों के माध्यम से रोजाना करीब 17 मिलियन लीटर दूषित पानी देवहा व खकरा नदी में पहुंच रहा है। इसमें अकेले वाले मियां की मजार से होकर खकरा नदी में गिरने वाले नाले के जरिए पौने सात लाख लीटर दूषित पानी पहुंच रहा है। अब सालों से डाले जा रहे गंदे पानी से खकरा नदी का अस्तित्व क्या होगा? इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक नदी का पानी काला होने के साथ-साथ जहरीला भी होता जा रहा है। हालात यह है कि इसमें रहने वाले जलीय जीवजंतुओं की संख्या भी कम होती जा रही है।
जिला प्रशासन शासन स्तर पर करें पैरवी
देश की नदियां पवित्रता की पहचान हैं, लेकिन आज बड़ी बड़ी नदियां भी प्रदूषण का शिकार हैं। अपने छोटे से शहर का ही सारा गंदा पानी देवहा खकरा में डाला जा रहा है। जिला प्रशासन को चाहिए कि शासन स्तर पर पैरवी कर नदियों को गंदा होने से बचाए।
आरिफ हजरत खां
आने वाले दिनों में फैल सकती है महामारी
गंदा पानी सिर्फ नदियों को ही नहीं बल्कि आम जनता के लिए काफी खतरनाक है। इन नदियों का पानी ही नलों के माध्यम से हमारे घरों में पहुंचता है। ऐसे में यदि गंदा पानी डालकर नदियों को गंदा किया जाएगा तो आने वाले दिनों मेें महामारी फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता।
खाऊ कमाऊ नीति ने किया बेड़ा गर्क
नदियों में गंदा पानी बहाने के लिए शासन, प्रशासन और सरकारें ही दोषी है। सिर्फ खाऊ कमाऊ नीति के चलते शुरूआत में इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब नदियों का वजूद ही खत्म हो रहा है तो उन पर करोड़ों खर्च कर बड़ी रकम को डकराने के लिए प्लान बनाए जा रहे हैं।
अमृत योजना के तहत नदी होगी प्रदूषण मुक्त
देवहा व खकरा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए अमृत योजना के तहत खाका खींचा गया है। इसके तहत वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की कवायद चल रहा है। यह करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट है। इसको लेकर शासन स्तर पर जल्द बैठक भी होने वाली है।
सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
एसटीपी की जल्द होगी स्थापना
नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में तेजी से प्रयास चल रहा है। जिला प्रशासन के माध्यम से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का प्रोजेक्ट शासन को भेजा गया है। प्रोजेक्ट को जल्द स्वीकृति मिलने के आसार हैं। इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों की जांच कर उनसे प्रदूषण मुक्त का सर्टिफिकेट ले लिया गया है।
शीतल वर्मा, जिलाधिकारी