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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Seeing the delay in the rescue of the tigress, a cage was put up, a goat was tied.

Pilibhit News: बाघिन के रेस्क्यू में देरी को देख लगाया पिंजरा, बांधी बकरी

Wed, 17 Jan 2024 11:00 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jan 2024 11:00 PM IST
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Seeing the delay in the rescue of the tigress, a cage was put up, a goat was tied.
पिंजरा लगवाते डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल । संवाद
कलीनगर। निगरानी के दावों के बीच बाघिन देवहा नदी से सटे इलाके में लगातार चहलकदमी कर रही है। नौगवां गांव के लोगों का कहना है कि मंगलवार रात बाघिन गांव की सीमा में देखी गई। रेस्क्यू के हालात न बनते देख विभाग की ओर से बुधवार को इस्लामनगर क्षेत्र में पिंजरा लगाने के साथ चार कैमरे लगवाकर निगरानी बढ़ा दी गई है।
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कलीनगर के गांव अटकोना के एक घर से रेस्क्यू हुई बाघिन अपने स्वभाव को लेकर काफी सुर्खियों में रही थी। एक जनवरी को कॉलर आईडी लगाकर बाघिन को पीटीआर के जंगल में छोड़ दिया गया था। चंद दिनों में ही बाघिन ने जंगल से दूरी बनाकर फिर रिहायशी इलाकों को चुन लिया। छह दिन पूर्व से बाघिन की शहर के पांच किलोमीटर दायरे में मौजूदगी देखी जा रही है।
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सड़िया गांव के नजदीक देवहा नदी के क्षेत्र में डेरा जमाए बाघिन दो किलोमीटर के क्षेत्र में घूम रही है। बाघिन को लेकर विभाग की ओर से गंभीरता बरतने के दावे किए जा रहे हैं। स्थिति को देख रेस्क्यू करने की अनुमति भी ले ली गई, लेकिन नदी का क्षेत्र रेस्क्यू के लिए सही न होने की बात कही जा रही है।
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मंगलवार रात को बाघिन के नौगवां पकड़िया क्षेत्र की ओर चहलकदमी करने की बात ग्रामीणों द्वारा कही गई। हालांकि बुधवार को बाघिन की सड़िया गांव के निकट देवहा नदी के क्षेत्र में ही लोकेशन मिली। सामाजिक वानिकी और पीटीआर की संयुक्त टीम निगरानी में जुटी रही। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि सही समय मिलते ही बाघिन का रेस्क्यू किया जाएगा।

डिप्टी डायरेक्टर ने परखे हालात, दिए निर्देश
पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर स्थिति को परखा। निगरानी में जुटी टीम से जानकारी जुटाई। रेस्क्यू में देरी को देख पिंजरा लगाने के निर्देश दिए। इस्लामनगर क्षेत्र की सीमा में देवहा नदी के किनारे पिंजरा लगवाकर उसमें बकरी को बांधा गया। इसके अलावा डब्ल्यूटीआई के सहयोग से क्षेत्र में चार कैमरे लगाकर निगरानी बढ़ा दी गई। इस दौरान रेंजर पीयूष मोहन भी मौजूद रहे। इधर, ग्रामीणों का कहना है कि बाघिन कमजोर भी हो गई। चहलकदमी करते हुए वीडियो बनाया गया। जिसमें बाघिन कमजोर दिख रही है।


कॉलर आईडी से हर एक घंटे में मिलती है लोकेशन
कॉलर आईडी लगाने के बाद हर एक घंटे में वन्यजीव की लोकेशन मिलती रहती है। सेटेलाइट तकनीक के जरिया लोकेशन को ट्रेस किया जाता है। बाघिन के गले में पड़ी काॅलर आईडी की हर एक घंटे में लोकेशन उच्चअफसरों के पास पहुंच रही है। इसकी बैटरी की क्षमता एक से डेढ़ साल तक की बताई जा रही है।

पिंजरा लगवाते डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल । संवाद

पिंजरा लगवाते डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल । संवाद

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