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पिता का सपना साकार कर शाने अली राजनीति में आते तो देता साथ
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पीलीभीत। पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद के दामाद और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पति मोहम्मद आरिफ ने ससुर की राजनीति विरासत पर दावा ठोकते हुए कहा की सदर विधानसभा से सपा उन्हें ही टिकट देगी। कहा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद का सपना अपने पुत्र शाने अली को डॉक्टर बनाना था। मगर उनकी मौत के बाद शाने अली ने वह सपना अधूरा छोड़ दिया है। पिता का सपना पूरा करने के बाद अगर शाने अली राजनीति में आते, तो बड़े भाई की हैसियत से मैं उनका साथ देता। जबकि हमें राजनीति में वह आगे बढ़ता देखना चाहते थे। इससे लिए सदर विधानसभा से टिकट के लिए आवेदन किया है।
शहर के एक होटल में शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए मोहम्मद आरिफ ने कहा कि सपा को 1998 में ज्वॉइन किया था। इसके बाद लगातार पार्टी में वफादारी से काम कर रहे है। पार्टी के सभी आंदोलनों में प्रतिभाग किया। 2005 में पीलीभीत आया। इसके बाद 2006 में पूर्व कैबिनेट की पुत्री रुकैय्या से शादी हुई। पूर्व कैबिनेट मंत्री (ससुर) अपनी पुत्री रुकैय्या और दामाद को राजनीति में आगे बढ़ाने में लगे हुए थे। रुकैय्या जिला पंचायत अध्यक्ष भी चुनी गई थीं। हमने भी पार्टी में बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया। कोरोना संक्रमण के दौरान ससुर (पूर्व कैबिनेट मंत्री) और उनकी पत्नी को मौत हो गई। जबकि पूर्व कैबिनेट मंत्री अपने पुत्र (शाने अली) को डॉक्टर बनाने का सपना देख रहे थे। मगर क्या परिस्थितियां रहीं कि शाने अली ने पिता का सपना पूरा करने के बजाय, राजनीति में कदम रख दिया है। हम आज भी परिवार के साथ हैं और हमारी जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं हैं। अगर वह डॉक्टर बनने के बाद राजनीति में आते, तो उनका पूरा समर्थन किया जाता। पार्टी में वफादारी से काम किया है। इससे सदर विधानसभा से टिकट भी पार्टी हमें देगी। इससे लिए पार्टी हाईकमान को टिकट के लिए आवेदन कर दिया है।
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शहर के एक होटल में शुक्रवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए मोहम्मद आरिफ ने कहा कि सपा को 1998 में ज्वॉइन किया था। इसके बाद लगातार पार्टी में वफादारी से काम कर रहे है। पार्टी के सभी आंदोलनों में प्रतिभाग किया। 2005 में पीलीभीत आया। इसके बाद 2006 में पूर्व कैबिनेट की पुत्री रुकैय्या से शादी हुई। पूर्व कैबिनेट मंत्री (ससुर) अपनी पुत्री रुकैय्या और दामाद को राजनीति में आगे बढ़ाने में लगे हुए थे। रुकैय्या जिला पंचायत अध्यक्ष भी चुनी गई थीं। हमने भी पार्टी में बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया। कोरोना संक्रमण के दौरान ससुर (पूर्व कैबिनेट मंत्री) और उनकी पत्नी को मौत हो गई। जबकि पूर्व कैबिनेट मंत्री अपने पुत्र (शाने अली) को डॉक्टर बनाने का सपना देख रहे थे। मगर क्या परिस्थितियां रहीं कि शाने अली ने पिता का सपना पूरा करने के बजाय, राजनीति में कदम रख दिया है। हम आज भी परिवार के साथ हैं और हमारी जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं हैं। अगर वह डॉक्टर बनने के बाद राजनीति में आते, तो उनका पूरा समर्थन किया जाता। पार्टी में वफादारी से काम किया है। इससे सदर विधानसभा से टिकट भी पार्टी हमें देगी। इससे लिए पार्टी हाईकमान को टिकट के लिए आवेदन कर दिया है।
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