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बाढ़ से बेखबर थे लोग, सोते समय पानी ने घेरा, प्रशासन ने पहले नहीं किया था अलर्ट
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पीलीभीत। प्रशासनिक अधिकारियों ने जितनी तेजी बाढ़ आने के बाद दिखाई अगर पहले सजगता भर दिखाते तो इतनी तबाही नहीं मचती। न ही किसानों को रेस्क्यू करने के लिए हेलीकॉप्टर मंगाना पड़ता।
बारिश के चलते सीमावर्ती राज्य उत्तराखंड में अलर्ट जारी हो चुका था लेकिन पीलीभीत में न तो कोई अलर्ट जारी किया गया और न ही बाढ़ से बचाव के इंतजाम पुख्ता किए गए। शारदा नदी के क्षेत्र में रहने वाले लोग बाढ़ के अंदेशे से पूरी तरह बेखबर थे। इसीलिए जब सोमवार को रात में बाढ़ का पानी गांवों तक घुसने लगा तब अधिकतर लोग सो रहे थे। मंगलवार को दोपहर तक बाढ़ ने तमाम लोगों की जान पर संकट खड़ा कर दिया। लोगों को घर गृहस्थी का सामान छोड़कर आसपास के उन स्थानों पर शरण लेनी पड़ी जहां बाढ़ से बच सकें। बाढ़ प्रभावित लोगों से जब बातचीत की गई तो उनका कहना था कि मंगलवार सुबह छह बजे जब चौतरफा पानी ही पानी दिख रहा था तब उन्हें तहसील के राजस्व कर्मचारी बाढ़ के खतरे से आगाह कर रहे थे। पहले से कोई अलर्ट नहीं किया गया।
बाढ़ प्रभावित लोगों ने कहा कि जब शारदा नदी का जल स्तर बढ़ रहा था तब क्यों नहीं अलर्ट किया गया। जो किसान खेतों में फंसे थे उनका खुद कहना था अगर उन्हें पता होता कि बाढ़ का पानी आ सकता है तो वह समय रहते खेतों से लौट आते। रात मे वहां कतई नहीं रुकते। उन्हें तो बाढ़ के बारे तब पता लगा जब चौतरफा पानी ने घेर लिया। जब इस विषय में जिलाधिकारी पुलकित खरे से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें सोमवार को रात दो बजे उन्हें जल स्तर बढ़ने के विषय में जानकारी मिली थी। तत्काल लोगों को अलर्ट करने के निर्देश अधीनस्थ अधिकारियों को दिए गए थे।
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बारिश के चलते सीमावर्ती राज्य उत्तराखंड में अलर्ट जारी हो चुका था लेकिन पीलीभीत में न तो कोई अलर्ट जारी किया गया और न ही बाढ़ से बचाव के इंतजाम पुख्ता किए गए। शारदा नदी के क्षेत्र में रहने वाले लोग बाढ़ के अंदेशे से पूरी तरह बेखबर थे। इसीलिए जब सोमवार को रात में बाढ़ का पानी गांवों तक घुसने लगा तब अधिकतर लोग सो रहे थे। मंगलवार को दोपहर तक बाढ़ ने तमाम लोगों की जान पर संकट खड़ा कर दिया। लोगों को घर गृहस्थी का सामान छोड़कर आसपास के उन स्थानों पर शरण लेनी पड़ी जहां बाढ़ से बच सकें। बाढ़ प्रभावित लोगों से जब बातचीत की गई तो उनका कहना था कि मंगलवार सुबह छह बजे जब चौतरफा पानी ही पानी दिख रहा था तब उन्हें तहसील के राजस्व कर्मचारी बाढ़ के खतरे से आगाह कर रहे थे। पहले से कोई अलर्ट नहीं किया गया।
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बाढ़ प्रभावित लोगों ने कहा कि जब शारदा नदी का जल स्तर बढ़ रहा था तब क्यों नहीं अलर्ट किया गया। जो किसान खेतों में फंसे थे उनका खुद कहना था अगर उन्हें पता होता कि बाढ़ का पानी आ सकता है तो वह समय रहते खेतों से लौट आते। रात मे वहां कतई नहीं रुकते। उन्हें तो बाढ़ के बारे तब पता लगा जब चौतरफा पानी ने घेर लिया। जब इस विषय में जिलाधिकारी पुलकित खरे से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें सोमवार को रात दो बजे उन्हें जल स्तर बढ़ने के विषय में जानकारी मिली थी। तत्काल लोगों को अलर्ट करने के निर्देश अधीनस्थ अधिकारियों को दिए गए थे।
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