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आफीसर्स कॉलोनी तो ओडीएफ कराएं डीएम साहब
पीलीभीत, ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2016 11:31 PM IST
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कहावत चिराग तले अंधेरा की कहावत जिला प्रशासन और विकास भवन में काफी सटीक बैठती है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रशासन इन दिनों गांव को खुले में शौच बनाने के अभियान में जुटा है, लेकिन पूरे जिले में विकास योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले अधिकारियों के लिए बनी आफीसर्स कॉलोनी अभियान को मुंह चिढ़ा रही है। अधिकारियों की सेवा व सुरक्षा में लगे कर्मचारियों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
जिला स्तरीय अधिकारियों के रहने के लिए कलेक्ट्रेट के निकट ही आफीसर्स कॉलोनी बनाई गई है। करीब तीस आवासों की इस कॉलोनी में प्रशासनिक, विकास, पुलिस और न्यायपालिका सभी के अधिकारी रहते हैं। इन अधिकारियों की सेवा और सुरक्षा के लिए काफी संख्या में कर्मचारी तैनात हैं जो रात दिन साहब के बंगलों पर रहते हैं। लेकिन कॉलोनी में इन कर्मचारियों के शौचालय, लघुशंका के लिए कोई व्यवस्था नहीं है जिससे कर्मचारियों को दिक्कत हो रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत रात की ड्यूटी करने वालों के साथ है। सुबह के समय इन सभी कर्मचारियों को डिब्बा बोतल लेकर कॉलोनी के दक्षिण की ओर आवासों के पीछे जाते हुए देखा जा सकता है।
विकास भवन का भी है बुरा हाल
जिले की विकास की गंगा भले ही विकास भवन से बहती है लेकिन यहां का हाल काफी बुरा हाल है। तीनों तलों पर बने सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग तो दूर इनमें घुसना भी मुश्किल होता है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कक्ष में शौचालय अटैच होने के चलते शायद उनका ध्यान इस ओर नहीं जाता।
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आफीसर्स कॉलोनी में इस प्रकार की समस्या की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो कर्मचारियों के लिए व्यवस्था कराई जाएगी।
मासूम अली सरवर, डीएम
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जिला स्तरीय अधिकारियों के रहने के लिए कलेक्ट्रेट के निकट ही आफीसर्स कॉलोनी बनाई गई है। करीब तीस आवासों की इस कॉलोनी में प्रशासनिक, विकास, पुलिस और न्यायपालिका सभी के अधिकारी रहते हैं। इन अधिकारियों की सेवा और सुरक्षा के लिए काफी संख्या में कर्मचारी तैनात हैं जो रात दिन साहब के बंगलों पर रहते हैं। लेकिन कॉलोनी में इन कर्मचारियों के शौचालय, लघुशंका के लिए कोई व्यवस्था नहीं है जिससे कर्मचारियों को दिक्कत हो रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत रात की ड्यूटी करने वालों के साथ है। सुबह के समय इन सभी कर्मचारियों को डिब्बा बोतल लेकर कॉलोनी के दक्षिण की ओर आवासों के पीछे जाते हुए देखा जा सकता है।
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विकास भवन का भी है बुरा हाल
जिले की विकास की गंगा भले ही विकास भवन से बहती है लेकिन यहां का हाल काफी बुरा हाल है। तीनों तलों पर बने सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग तो दूर इनमें घुसना भी मुश्किल होता है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कक्ष में शौचालय अटैच होने के चलते शायद उनका ध्यान इस ओर नहीं जाता।
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आफीसर्स कॉलोनी में इस प्रकार की समस्या की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो कर्मचारियों के लिए व्यवस्था कराई जाएगी।
मासूम अली सरवर, डीएम