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शारदा डैम में नहीं गूंजता मेहमान पक्षियों का कलरव

Sun, 15 Jan 2017 10:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा।
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा। Updated Sun, 15 Jan 2017 10:55 PM IST
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No echoes of birds chirp in Sarda dam
प्रवासी पक्षी - फोटो : अमर उजाला
साल दर साल घट रही है प्रवासी पक्षियों की संख्या
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माधोटांडा। तराई क्षेत्र के शारदा डैम में साइबेरिया, अलास्का आदि देशों से बहुतायत में प्रवासी पक्षी हर साल आते हैं। कुछ सालों से इन पक्षियों के आने की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसकी वजह ग्लोबल वार्मिंग और चारे की कमी माना जा रहा है।

प्रवासी पक्षियों को नहीं मिल पा रहा चारा
शारदा डैम में पाई जाने वाली छोटी मछलियां प्रवासी पक्षियों का मुख्य भोजन होती हैं, लेकिन मछलियों की ब्रीडिंग न होने से उनकी तादाद घटने लगी है। मछलियों की ब्रीडिंग न होने का एक कारण यह भी है कि डैम में गिरने वाली नहर के सामने का भाग सिल्ट से पट गया है, वहीं दूसरी गिरने वाली नहर में सिल्ट के साथ लोगबाग खेती करने लगे हैं। बताते हैं कि वर्ष 1972 में डैम की सफाई कराई गई थी। इसके बाद ऐसी सफाई नहीं कराई गई। इसके चलते प्रवासी पक्षियों को चारा नहीं मिल पा रहा है। 
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पक्षियों की संख्या घटने के कई अन्य कारण
पहले बड़ी तादाद में प्रवासी पक्षी डैम में आते थे, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों की संख्या घट रही है। चारे के कमी के चलते वह खुद को यहां असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और जहां चारा अधिक है वहां शिकारी शिकार में लगे हैं। एसएसबी का वाटर स्पोटर्स सेंटर भी पक्षियों के लिए बाधक बना हुआ है। डैम में उत्तराखंड के इलाके में आबादी बढ़ने के साथ ही इन पक्षियों का शिकार भी बढ़ा है। 
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साल दर साल घट रहीं मेहमान पक्षियों की संख्या
शारदा डैम में पहले प्रवासी पक्षियों की संख्या करीब एक लाख के आसपास थी, लेकिन वर्ष 2001 में टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी ने जब गणना की तो उन्होंने 45 हजार प्रवासी पक्षी होने का खुलासा किया। उसके बाद वर्ष 2005 में 37500 और वर्ष 2009 में की गई गणना में यह संख्या घटकर 11720 रह गई। जानकारों के मुताबिक वर्तमान में यह घटकर करीब पांच हजार के आसपास रह गई है। इससे जुड़े लोग बताते हैं कि जो पक्षी यहां आ रहे हैं, उनमें प्रवासी पक्षियों की संख्या नाममात्र की है। इसमें भारतीय पक्षी भी शामिल हैं, जो गर्मी के चलते यहां से अन्य जगहों पर चले जाते हैं।

 
  
जिले में शारदा सागर डैम व पसगवां पक्षी बिहार में हर साल प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं, लेकिन कुछ सालों से इनकी संख्या तेजी से घटी है। डैम में चारे की कमी व बाहरी दखलंदाजी इसका एक कारण है। दूसरी ओर मनरेेगा के तहत गांवों में तालाब खोदे गए हैं। इन तालाबों में कुछ प्रवासी पक्षी पहुंच रहे हैं। प्रवासी पक्षियों की कम संख्या के कारण तलाशना जरूरी है।    
- टीएन खान, पर्यावरणविद
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