{"_id":"65aad31af86252ba2f0a0f84","slug":"munendra-had-seen-the-structure-of-babri-masjid-collapsing-pilibhit-news-c-121-1-sbly1029-10957-2024-01-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pilibhit News: मुनेंद्र ने ढहते देखा था बाबरी मस्जिद का ढांचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pilibhit News: मुनेंद्र ने ढहते देखा था बाबरी मस्जिद का ढांचा
विज्ञापन
बीसलपुर के मुनेंद्र प्रमाण दिखाते । संवाद
बीसलपुर। मोहल्ला बख्तावरलाल निवासी रामभक्त मुनेंद्र कुमार ने बताया कि जिस दिन अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था, उस दिन वह मौके पर ही मौजूद थे। उस समय उनकी आयु 16 वर्ष की थी। मस्जिद का ढांचा गिरते ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा था। उन्हें ऐसा लग रहा था, जैसे उनकी मुंह मांगी मुराद पूरी हो गई हो।
बीसलपुर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर बदायूं की जेल में भेजा था। जेल में वह लगभग एक महीने तक रहे थे। उनके पास जेल में एक माह रहने का प्रमाण पत्र भी है। बदायूं जेल प्रशासन ने एक माह बाद उन्हें बिना जमानत कराए ही रिहा कर दिया था। उस समय वह विहिप के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उसके बाद जब अटल बिहारी बाजपेई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर स्वयं को किसी सरकारी विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नौकरी दिलाने की मांग की थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय से आए पत्र के आधार पर पीलीभीत प्रशासन के तत्कालीन अधिकारियों ने उन्हें नौकरी देने में असमर्थता जताते हुए कोई धंधा करने के लिए एक से दस लाख तक ऋण दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। उसके बाद नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने उन्हें भी पत्र भेजकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नौकरी दिलाने की मांग की। प्रधानमंत्री कार्यालय से आए पत्र के आधार पर पीलीभीत के जिला सेवायोजन अधिकारी ने उन्हें अपने कार्यालय बुलाकर उनका पूरा बायोडाटा तो लिख लिया था, लेकिन उन्हें नौकरी अब तक नहीं मिल पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बीसलपुर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर बदायूं की जेल में भेजा था। जेल में वह लगभग एक महीने तक रहे थे। उनके पास जेल में एक माह रहने का प्रमाण पत्र भी है। बदायूं जेल प्रशासन ने एक माह बाद उन्हें बिना जमानत कराए ही रिहा कर दिया था। उस समय वह विहिप के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उसके बाद जब अटल बिहारी बाजपेई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर स्वयं को किसी सरकारी विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नौकरी दिलाने की मांग की थी।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री कार्यालय से आए पत्र के आधार पर पीलीभीत प्रशासन के तत्कालीन अधिकारियों ने उन्हें नौकरी देने में असमर्थता जताते हुए कोई धंधा करने के लिए एक से दस लाख तक ऋण दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। उसके बाद नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने उन्हें भी पत्र भेजकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नौकरी दिलाने की मांग की। प्रधानमंत्री कार्यालय से आए पत्र के आधार पर पीलीभीत के जिला सेवायोजन अधिकारी ने उन्हें अपने कार्यालय बुलाकर उनका पूरा बायोडाटा तो लिख लिया था, लेकिन उन्हें नौकरी अब तक नहीं मिल पाई है।
विज्ञापन