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अब नहीं तो कब किसानों का हाल जानेंगी सांसद
घुंघचाई/पीलीभीत।
Updated Fri, 17 Apr 2015 11:53 PM IST
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अधिकांश किसानों की करीब 60 प्रतिशत तक फसल नुकसान हो जाने के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। पीड़ित किसानों बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की बर्बादी का क्या आलम होगा इसका अंदाजा सांसद आदर्श गांव गुलड़िया को देखकर लगाया जा सकता है। को न तो सहायता मिल सकी है न ही उनकी बर्बादी का सर्वे ही हो पाया है। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने भी गुलड़िया गांव की बर्बादी का जायजा लेने की जहमत नहीं उठाई है। यह हाल तब है जब इस आदर्श गांव को खुद सांसद मेनका संजय गांधी ने भी गोद लिया है।
सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पूरनपुर तहसील के गांव गुलडिया भूपसिंह को गोद लेकर आदर्श गांव घोषित किया था। इससे गांव में विकास की उम्मीद जगी थी और सीधे सांसद से जुड़े होने के चलते लोगों को जनसुविधाएं जल्द मिलने की उम्मीद भी थी, लेकिन पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि और बारिश के बाद हुई फसलों की तबाही के बाद यहां के लोग काफी आहत हैं।
सांसद गोद लिए अपने गांव के किसानों की दशा देखने व उन्हें सहायता दिलाना तो दूर कुदरत की मार से बेहाल हुए किसानों के घावों पर मरहम तक लगाने गांव नहीं पहुंची। गांव के अधिकांश किसानों की फसले तबाह हो चुकी हैं। लोगों को उम्मीद थी कि विपदा की इस घड़ी में सांसद उनका हाल जानने पहुंचेंगी लेकिन डेढ़ माह बाद भी न तो सांसद पहुंची और न उनका कोई प्रतिनिधि गांव का हाल देखने आया।
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गांव के सूरते हाल पर एक नज़र
छह हजार की आबादी वाले इस गांव में लगभग 550 हेक्टेअर जमीन है। जिसमें 100 हेक्टेअर में गन्ना व अन्य फसलें जबकि बाकी 450 हेक्टेअर में गेहूं की फसल थी। बारिश से गांव में 60 फीसदी से अधिक फसल बर्बाद हुई। स्वयं ग्राम प्रधान की 15 एकड़ में मात्र 40 क्विंटल गेहूं निकला है। गांव में टूटा खड़ंजा व नाली, निकास अभाव में नालियों का सड़क पर बहता गंदा पानी, टटिया के बने शौचालय व जहां-तहां सफाई अभाव में बजबजाती नालियां गांव की दशा की खुद कहानी बयां करने के लिए काफी हैं।
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बारिश और ओलावृष्टि के बाद सांसद के प्रतिनिधि कमलकांत ने फोन से नुकसान की जानकारी ली थी लेकिन अभी कोई अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि गांव का हाल लेने नहीं पहुंचा।
शांतीदेवी, प्रधान
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मैं किसानों के दर्द से वाकिफ हैं। किसानों को मुआवजा मिले इसका प्रयास दिल्ली में कर रहीं हूं। मेरे लिए सिर्फ गांव गुलड़ियाभूप सिंह ही नहीं सभी वह आदर्श गांव एक जैसे हैं जहां किसानों का नुकसान हुआ है। मैं दो बार पहले गांव जा चुकी हैं। मेरे करीब 100 कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों का दुख दर्द पूछ रहे हैं।
मेनका संजय गांधी, सांसद
न सर्वे हुआ न मिला मुआवजा
मेरी तीन एकड़ गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। अब तक न सर्वे हुआ न ही कोई सहायता मिली। सांसद व उनका कोई नुमाइंदा भी गांव नहीं आया।
बृजेश मिश्रा, कृषक
छह माह हो गए विकास की बाट जोहते
गांव आदर्श हुए छह माह बीत गए। अभी तक गांव में कोई विकास नहीं हुआ। छह एकड़ गेहूं की फसल बर्बाद हुई। एक बार लेखपाल आया था। एक स्थान पर बैठ कुछ लोगों के नाम नोट कर चला गया। उसके बाद कोई नहीं आया। अभी तक कोई सहायता भी नहीं मिली।
शैलेंद्र सिंह, कृषक
कैसा आदर्श गांव
तीन एकड़ बोई गेहूं की फसल बारिश व ओलावृष्टि से नष्ट हो गई। सूचना के बाद भी कोई भी राजस्वकर्मी उनके खेत का जायजा लेने नहीं पहुंचा। विकास के नाम पर यहां सर्वे तो कई बार हुआ लेकिन विकास नहीं। मकदूम बरकाती, कृषक
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छह माह हुए आदर्श गांव हुए। 35 साल से वह गांव में कच्चे आवास में रह रहे हैं। आज तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली।
सेवन रजा,
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नवंबर में आदर्श गांव की घोषणा के साथ लोगों को विकास की उम्मीद जगी थी। सांसद भी आईं थीं। लंबे चौड़े विकास के वादे किए थे। डोर टू डोर सर्वे भी कराया गया, लेकिन विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। सारी घोषणाएं खोखली साबित हुईं।
महेश मिश्रा, कृषक
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सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पूरनपुर तहसील के गांव गुलडिया भूपसिंह को गोद लेकर आदर्श गांव घोषित किया था। इससे गांव में विकास की उम्मीद जगी थी और सीधे सांसद से जुड़े होने के चलते लोगों को जनसुविधाएं जल्द मिलने की उम्मीद भी थी, लेकिन पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि और बारिश के बाद हुई फसलों की तबाही के बाद यहां के लोग काफी आहत हैं।
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सांसद गोद लिए अपने गांव के किसानों की दशा देखने व उन्हें सहायता दिलाना तो दूर कुदरत की मार से बेहाल हुए किसानों के घावों पर मरहम तक लगाने गांव नहीं पहुंची। गांव के अधिकांश किसानों की फसले तबाह हो चुकी हैं। लोगों को उम्मीद थी कि विपदा की इस घड़ी में सांसद उनका हाल जानने पहुंचेंगी लेकिन डेढ़ माह बाद भी न तो सांसद पहुंची और न उनका कोई प्रतिनिधि गांव का हाल देखने आया।
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गांव के सूरते हाल पर एक नज़र
छह हजार की आबादी वाले इस गांव में लगभग 550 हेक्टेअर जमीन है। जिसमें 100 हेक्टेअर में गन्ना व अन्य फसलें जबकि बाकी 450 हेक्टेअर में गेहूं की फसल थी। बारिश से गांव में 60 फीसदी से अधिक फसल बर्बाद हुई। स्वयं ग्राम प्रधान की 15 एकड़ में मात्र 40 क्विंटल गेहूं निकला है। गांव में टूटा खड़ंजा व नाली, निकास अभाव में नालियों का सड़क पर बहता गंदा पानी, टटिया के बने शौचालय व जहां-तहां सफाई अभाव में बजबजाती नालियां गांव की दशा की खुद कहानी बयां करने के लिए काफी हैं।
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बारिश और ओलावृष्टि के बाद सांसद के प्रतिनिधि कमलकांत ने फोन से नुकसान की जानकारी ली थी लेकिन अभी कोई अधिकारी अथवा जनप्रतिनिधि गांव का हाल लेने नहीं पहुंचा।
शांतीदेवी, प्रधान
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मैं किसानों के दर्द से वाकिफ हैं। किसानों को मुआवजा मिले इसका प्रयास दिल्ली में कर रहीं हूं। मेरे लिए सिर्फ गांव गुलड़ियाभूप सिंह ही नहीं सभी वह आदर्श गांव एक जैसे हैं जहां किसानों का नुकसान हुआ है। मैं दो बार पहले गांव जा चुकी हैं। मेरे करीब 100 कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों का दुख दर्द पूछ रहे हैं।
मेनका संजय गांधी, सांसद
न सर्वे हुआ न मिला मुआवजा
मेरी तीन एकड़ गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। अब तक न सर्वे हुआ न ही कोई सहायता मिली। सांसद व उनका कोई नुमाइंदा भी गांव नहीं आया।
बृजेश मिश्रा, कृषक
छह माह हो गए विकास की बाट जोहते
गांव आदर्श हुए छह माह बीत गए। अभी तक गांव में कोई विकास नहीं हुआ। छह एकड़ गेहूं की फसल बर्बाद हुई। एक बार लेखपाल आया था। एक स्थान पर बैठ कुछ लोगों के नाम नोट कर चला गया। उसके बाद कोई नहीं आया। अभी तक कोई सहायता भी नहीं मिली।
शैलेंद्र सिंह, कृषक
कैसा आदर्श गांव
तीन एकड़ बोई गेहूं की फसल बारिश व ओलावृष्टि से नष्ट हो गई। सूचना के बाद भी कोई भी राजस्वकर्मी उनके खेत का जायजा लेने नहीं पहुंचा। विकास के नाम पर यहां सर्वे तो कई बार हुआ लेकिन विकास नहीं। मकदूम बरकाती, कृषक
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छह माह हुए आदर्श गांव हुए। 35 साल से वह गांव में कच्चे आवास में रह रहे हैं। आज तक किसी ने उनकी सुध नहीं ली।
सेवन रजा,
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नवंबर में आदर्श गांव की घोषणा के साथ लोगों को विकास की उम्मीद जगी थी। सांसद भी आईं थीं। लंबे चौड़े विकास के वादे किए थे। डोर टू डोर सर्वे भी कराया गया, लेकिन विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। सारी घोषणाएं खोखली साबित हुईं।
महेश मिश्रा, कृषक