{"_id":"57585c864f1c1b1f349c5317","slug":"millions-on-disposal-not-increased-capacity","type":"story","status":"publish","title_hn":"करोड़ों ठिकाने लगाने पर भी नहीं बढ़ी क्षमता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करोड़ों ठिकाने लगाने पर भी नहीं बढ़ी क्षमता
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Wed, 08 Jun 2016 11:34 PM IST
विज्ञापन
सिल्ट सफाई की हकीकत।
- फोटो : pilibhit, beureu
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश के पौन दर्जन जनपदों में सिंचाई को पानी मुहैय्या को वाली हरदोई ब्रांच में सिल्ट सफाई के नाम पर सोलह करोड़ रुपये ठिकाने लगा दिए गए, लेकिन नहर में पानी की क्षमता ज्यों की त्यों है। वहीं अभियंता भी पूरी क्षमता से पानी रिलीज करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
शारदा मुख्य नहर एवं हरदोई ब्रांच प्रदेश की कृषि फसलों की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण नहरें मानी जाती हैं। ब्रिटिश काल में बनाई गई इन नहरों से जनपद सहित शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली आदि के हजारों किसानों की लाखों एकड़ कृषि फसलों की सिंचाई की जाती है। प्रदेश सरकार ने दो माह पूर्व हरदोई ब्रांच की पानी की क्षमता बढ़ाने को सिल्ट सफाई व मरम्मत के नाम पर 16 करोड़ रुपया एवं शारदा मुख्य नहर की मरम्मत को साढ़े पांच करोड़ रुपया लगाकर कार्य कराया था।
मरम्मत पूरी होने के बाद भी कटने लगी थी नहर
नहरों में मरम्मत कार्य के बाद हरदोई ब्रांच में पहले 3500 क्यूसेक, फिर 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इतना पानी मरम्मत से पहले भी नहर में छोड़ा जाता रहा है। इन सबके बावजूद नहर पर खतरे मंडरा रहे हैं। सफाई के बाद जब पहली बार पानी छोड़ा गया तो 13 मील के आगे नहर की बाई पटरी कटने लगी थी। सहायक अभियंता ने टीम के साथ रात में पहुंचकर मरम्मत कराई थी।
विज्ञापन
रात में होगी बाउलिंग तो बढ़ सकती थी मुसीबत
करीब चार दिन पूर्व जब नहर में हेड से 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो डगा गांव के निकट बाई पटरी पर पानी बाउलिंग होकर निकलने लगा। अभियंताओं का कहना था कि चूहों के बिल या वन्य जंतुओं के बिलों से यह स्थिति पैदा हुई। बाउलिंग को मोरंग और बजरी डालकर बंद करा दिया गया है। यदि बाउलिंग रात को होती है तो स्थिति खराब हो सकती है।
अब 27 करोड़ की लागत से स्वीकृत किए प्रोजेक्ट
दोनों नहरों पर हाल ही में 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उधर, अब पुन: 27 करोड़ रुपये के टेंडर निकाले गए हैं। यह कार्य भी सत्ता से जुड़े ठेकेदार को देने की तैयारी चल रही है, जिसके तहत हरदोई ब्रांच में एक लॉट व शारदा मुख्य नहर में चार प्रोजेक्टों की मात्र एक लॉट बना दी गई।
ऑटोमेटिक गेट और उसमें लगी आधुनिक मशीनें गायब
हरदोई ब्रांच में 16 करोड़ खर्च करने के बाद फिलहाल पानी की क्षमता बढ़ी नहीं दिखाई दे रही है। नहर के ऑटोमेटिक गेट और उसमें लगी आधुनिक मशीनें गायब हो चुकी हैं। मात्र हेड पर एक गेट बनाया है। उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं बताई जा रही है। अभिलेखों में यहां 4000 क्यूसेक पानी देना दर्शाया जा रहा है। वहीं सबसीडरी ब्रांच के माध्यम से 13 मील के आगे एक हजार क्यूसेक पानी दिया जा रहा है।
नहर में 4800 क्यूसेक हो रहा रिलीज
हरदोई ब्रांच में सफाई के बाद पानी की क्षमता बढ़ी है। मरम्मत कार्य होने के बाद चूहों की बिलों से बाउलिंग होने का खतरा रहता है। इसलिए एक डेढ़ माह तक सतर्कता बरतनी पड़ती है। मौजूदा समय में हरदोई ब्रांच में 4800 क्यूसेक पानी दे रहा है।
- पीके तिवारी, सहायक अभियंता, हेडवर्क्स खंड
विज्ञापन
शारदा मुख्य नहर एवं हरदोई ब्रांच प्रदेश की कृषि फसलों की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण नहरें मानी जाती हैं। ब्रिटिश काल में बनाई गई इन नहरों से जनपद सहित शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली आदि के हजारों किसानों की लाखों एकड़ कृषि फसलों की सिंचाई की जाती है। प्रदेश सरकार ने दो माह पूर्व हरदोई ब्रांच की पानी की क्षमता बढ़ाने को सिल्ट सफाई व मरम्मत के नाम पर 16 करोड़ रुपया एवं शारदा मुख्य नहर की मरम्मत को साढ़े पांच करोड़ रुपया लगाकर कार्य कराया था।
विज्ञापन
मरम्मत पूरी होने के बाद भी कटने लगी थी नहर
नहरों में मरम्मत कार्य के बाद हरदोई ब्रांच में पहले 3500 क्यूसेक, फिर 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इतना पानी मरम्मत से पहले भी नहर में छोड़ा जाता रहा है। इन सबके बावजूद नहर पर खतरे मंडरा रहे हैं। सफाई के बाद जब पहली बार पानी छोड़ा गया तो 13 मील के आगे नहर की बाई पटरी कटने लगी थी। सहायक अभियंता ने टीम के साथ रात में पहुंचकर मरम्मत कराई थी।
विज्ञापन
रात में होगी बाउलिंग तो बढ़ सकती थी मुसीबत
करीब चार दिन पूर्व जब नहर में हेड से 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया तो डगा गांव के निकट बाई पटरी पर पानी बाउलिंग होकर निकलने लगा। अभियंताओं का कहना था कि चूहों के बिल या वन्य जंतुओं के बिलों से यह स्थिति पैदा हुई। बाउलिंग को मोरंग और बजरी डालकर बंद करा दिया गया है। यदि बाउलिंग रात को होती है तो स्थिति खराब हो सकती है।
अब 27 करोड़ की लागत से स्वीकृत किए प्रोजेक्ट
दोनों नहरों पर हाल ही में 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। उधर, अब पुन: 27 करोड़ रुपये के टेंडर निकाले गए हैं। यह कार्य भी सत्ता से जुड़े ठेकेदार को देने की तैयारी चल रही है, जिसके तहत हरदोई ब्रांच में एक लॉट व शारदा मुख्य नहर में चार प्रोजेक्टों की मात्र एक लॉट बना दी गई।
ऑटोमेटिक गेट और उसमें लगी आधुनिक मशीनें गायब
हरदोई ब्रांच में 16 करोड़ खर्च करने के बाद फिलहाल पानी की क्षमता बढ़ी नहीं दिखाई दे रही है। नहर के ऑटोमेटिक गेट और उसमें लगी आधुनिक मशीनें गायब हो चुकी हैं। मात्र हेड पर एक गेट बनाया है। उसकी गुणवत्ता भी ठीक नहीं बताई जा रही है। अभिलेखों में यहां 4000 क्यूसेक पानी देना दर्शाया जा रहा है। वहीं सबसीडरी ब्रांच के माध्यम से 13 मील के आगे एक हजार क्यूसेक पानी दिया जा रहा है।
नहर में 4800 क्यूसेक हो रहा रिलीज
हरदोई ब्रांच में सफाई के बाद पानी की क्षमता बढ़ी है। मरम्मत कार्य होने के बाद चूहों की बिलों से बाउलिंग होने का खतरा रहता है। इसलिए एक डेढ़ माह तक सतर्कता बरतनी पड़ती है। मौजूदा समय में हरदोई ब्रांच में 4800 क्यूसेक पानी दे रहा है।
- पीके तिवारी, सहायक अभियंता, हेडवर्क्स खंड