फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Killer tiger escaped defying siege

घेराबंदी को धता बता निकल भागा खूनी टाइगर

Tue, 29 Nov 2016 10:31 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Tue, 29 Nov 2016 10:31 PM IST
विज्ञापन
Killer tiger escaped defying siege
घेराबंदी को धता बता निकल भागा खूनी टाइगर - फोटो : पीलीभ्‍ाीत/उत्‍ततर प्रदेश्‍ा

विज्ञापन
गन्ने में छिपे बाघ को पकड़ने को वन विभाग की तैयारियां धरी रह गईं। खूनी बाघ वन विभाग की घेराबंदी और झांसे को धता बताकर सोमवार रात को ही निकल भागा। सुबह होने पर वन कर्मियों ने पहले ड्रोन कैमरा और बाद में दुधवा से पहुंचे हाथियों की मदद से गन्ने के खेत की तलाशी की, लेकिन उसमें बाघ नहीं मिला। बाघ के निकल जाने की सूचना पर ग्रामीणों ने इसे वन विभाग की लापरवाही बताकर विरोध जताया। नाराज ग्रामीण वनकर्मियों को घेरे में लेने पर आमादा हो गए। इस पर सीओ पूरनपुर के साथ पुलिस को सख्ती करनी पड़ी। जिसके बाद लोग शांत हुए। 
पिपरिया संतोष गांव में सोमवार सुबह लगभग चार बजे किसान बाबूराम को मारने के बाद बाघ गन्ने के खेत में ही छिपा रहा। वन कर्मियों ने नाराज ग्रामीणों को शांत कराने के लिए गन्ने के खेत के चारों ओर जाल लगाया था। साथ ही एक ओर पिंजरा लगाकर बकरी बांधी थी। इसके साथ ही दुधवा से दो हाथी और ट्रैक्यूलाइज गन के साथ एक्सपर्ट को बुलाया था। देरशाम तक ग्रामीण और अधिकारी दुधवा से टीम आने का इंतजार करते रहे। रात करीब आठ बजे डॉ. उत्कर्ष शुक्ला तो पहुंचे लेकिन हाथी नहीं पहुंच सके थे। इस पर वन एवं पुलिस कर्मी गन्ने के खेत के चारों ओर जाल लगाकर तथा खेत के पास एक बकरी बंधा पिंजरा लगा कर खेत के पास आग जलाकर पूरी रात बाघ की निगरानी करते रहे। सुबह होने पर वनकर्मियों व पुलिस को खेत के एक ओर का जाल गिरा हुआ मिला। इससे बाघ के निकल भागने का अंदेशा हुआ। कुछ दूर तक पदचिन्ह भी देखे गए लेकिन विभाग ने बाघ के निकलने की संभावनाओं की जांच के लिए पहले पुलिस विभाग से मिले ड्रोन कैमरें से खेत की जांच की। इसके बाद दुधवा से आई हथिनी गंगाकली पर डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ट्रैक्यूलाइज गन लेकर और दूसरी हथनी पुष्पाकली पर डीएफओ कैलाश यादव व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के नरेश कुमार ने बैठकर गन्ने में बाघ की तलाशी ली। चार बीघा खेत में करीब आधे घंटे तक तलाशी में कुछ न मिलने पर दोनों हाथिनियों को वापस कर दिया गया। वन विभाग के अफसरों ने खेत के चारों ओर देखा तो एक स्थान से बाघ के पदचिन्ह खेत से बाहर दूर तक दिखाई दिए। इसके बाद गन्ने के खेत में बाघ के न होने और उसके रात में ही निकल जाने की घोषणा वन कर्मियों ने कर दी। इसके साथ वन विभाग की टीम भी लौट गई।
विज्ञापन

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
बाघ के निकल भागने की जानकारी पर ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप था कि वनकर्मियों ने जानबूझ कर बाघ को निकलने का मौका दिया। आरोप लगाया कि बाघ के निकलने की जानकारी भी विभाग को रात में ही हो गई थी, लेकिन गांव वालों को गुमराह करने के लिए सुबह तलाशी का नाटक किया गया। नाराज ग्रामीणों ने वनकर्मियों को घेरने का प्रयास किया। इस पर वहां मौजूद सीओ पूरनपुर जगतराम जोशी को माइक से एनाउंस करने के साथ सख्ती बरतनी पड़ी जिसपर भीड़ घटना स्थल से हट सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रात 8.30 बजे कुटिया के निकट देखा बाघ
पिपरिया संतोष के बाबूराम को मारने के बाद जिस खेत में बाघ छिपा था वहां से करीब एक किमी दूर खटीमा हाइवे पर स्थित एक कुटिया में रह रहे बाबा शंकरलाल ने बताया कि रात करीब 8.30 बजे वह कुटिया के बाहर खाना बना रहे थे। उस समय बाघ कुटिया के पीछे से निकलकर गया। उन्होंने इसके पदचिन्ह भी दिखाए। कुटिया के पिछले बाघ के पदचिन्ह साफ नजर आए।
सुबह 9.30 पर खत्म हो गया ऑपरेशन
गन्ने में घुसे बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग ने यूं तो सोमवार सुबह से ही हाथ पैर मारने शुरू कर दिए थे। जाल लगाने के साथ पिंजरा भी लगाया गया। मंगलवार सुबह हाथियों के पहुंचने पर पहले आठ बज ड्रोन कैमरा और बाद में हाथियों से तलाशी की गई। दोनों सर्च आपरेशन में बाघ के न मिलने पर विभाग ने 9.30 बजे सर्च आपरेशन खत्म कर दिया।
जंगल ओर जाने का इशारा कर रहे पदचिन्ह
गन्ने के खेत के बाहर करीब एक किमी से अधिक दूरी तक बाघ के पदचिन्ह देखें गए हैं। कुछ लोगों के अनुसार वह बाघिन है और उसके साथ बच्चा भी है, लेकिन विभागीय अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। खेत से निकले पदचिन्ह अन्य खेत व बाग में होते हुए गन्ना क्रय केंद्र के बराबर से जंगल तक देखे गए हैं। डब्ल्यूडब्लयूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि पदचिन्हों के आधार पर बाघिन होना पाया गया है, लेकिन उसके साथ कोई शावक नहीं है। पदचिन्ह जंगल तक मिले हैं। जिससे उसके जंगल में जाने की पुष्टि होती है।
दोबारा खेत में दिखने की अफवाह पर हड़कंप
बाघ के निकल भागने की पुष्टि और वन कर्मियों के वापस जाने के बाद करीब छह घंटे बाद लगभग तीन बजे पूर्व की घटना से करीब दो किमी दूर जगदीश के खेत में बाघ मौजूद होने की अफवाह उड़ गई। आग की तरह क्षेत्र में फैली खबर से बड़ी संख्या में ग्रामीण  जमा हो गए साथ ही मुस्तफाबाद गेस्ट हाउस में मौजूद वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी व एक्सपर्ट मौके पर पहुंचे लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला। वनाधिकारियों ने लोगों को समझाकर बुझाकर शांत कराया।
विभाग को खली तारा की कमी
टाइगर रिजर्व बनने से पहले पीलीभीत वन प्रभाग की बराही रेंज में तारा नाम की हाथिनी हुआ करती थी। मैनाकोट में करीब 10 वर्ष बाघ के हमले की घटनाओं में उसकी मदद ली गई थी, लेकिन कुछ साल पूर्व उसकी मौत हो गई। सोमवार को बाघ तलाशने के लिए हाथी की जरूरत पड़ी। जिसपर उस समय के मौजूद वनकर्मियों को तारा की याद आई। वनकर्मियों का कहना था कि यदि बराही रेंज में तारा होती तो आज बहुत काम आती।
पुलिस को निकलवाना पड़ा खेत से पिंजरा
बाघ तलाशी का ऑपरेशन खत्म होने के बाद अधिकारी हवा की तरह गायब हो गए। खेत में पिंजरा लगा रह गया। इसे निकालने जब वनविभाग का ट्रैक्टर पहुंचा तो नाराज ग्रामीणों ने उसे घेर लिया और पिंजरा नहीं ले जाने देने की जिद करने लगे। इस पर सीओ पूरनपुर के निर्देश पर माधोटांडा थाने के सिपाही सतेंद्र सिंह आगे बढ़कर स्वयं ट्रैक्टर की सीट संभाली और भीड़ के बीच से पिंजरा निकालकर लाए।

बाघ देखने की हसरत पर बुजुर्ग पेड़ पर चढे
बाघ देखने की हशरत में एक बुजुर्ग ने नायाब तरीका निकाला। उम्र को दरकिनार कर गन्ने के ख्ेात के निकट यूकेलिप्टिस के पेड़ पर करीब 20 फिट ऊंचाई पर चढ़ गए। घंटों पेड़ पर बैठकर वह नजारा देखते रहे।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed