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किसानों ने मौत का मंजर सुना तो आंखों में आए आंसू और चेहरे पर आक्रोश
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लखविंदर सिंह।
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। तिकुनिया से लौटे किसानों ने जब मौत के मंजर का पूरनपुर में आंखों देखा हाल सुनाया तो सैकड़ों किसानों के चेहरे आक्रोश से भर आए। आंखें नम हो गईं। आंखों से आंसू आ गए। आक्रोश के चलते तिकुनिया की घटना के बाद से ही किसान रविवार को शाम पूरनपुर में सड़कों पर उतर आए हैं। अन्नदाता किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मनप्रीत सिंह ने जब 400-500 किसानों के बीच मौत का खौफनाक मंजर बयां किया तो शायद ही कोई ऐसा रहा हो जिसकी आंखें नम न हुईं हों। किसानों ने सरकार को आड़े हाथ लिया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग भी उठाई।
आपको बताते चलें कि किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को रात 12 बजे से 12.20 बजे पूरनपुर में सड़क पर धरना दे रहे किसानों के बीच रहे। रात में ही उन्होंने किसानों से कहा था कि वे अपने-अपने घरों को चले जाएं लेकिन कोई भी किसान घर के लिए नहीं गया। राकेश टिकैत ने यह भी कहा था कि वह सोमवार को सुबह अगले आंदोलन के विषय में बताएंगे लेकिन किसानों ने कह दिया कि वह तभी सड़क से हटेंगे जब किसानों को रौंदने के आरोप से घिरे मंत्री के बेटे पर कार्रवाई हो जाए। किसानों के तेवर तीखे थे और कई किसानों ने बताया कि रात 11 बजे जब से उन्होंने मौत का वह मंजर सुना तब से दोषियों पर कार्रवाई के लिए वह डटे हुए हैं।
सत्ता के नशे में चूर नेताओं ने किसानों को कुचलवाया
जब हमारे किसानों को कार से कुचला गया उस वक्त मैं और किसान नेता तजिंद्र सिंह बिर्क अपनी-अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ रहे थे। क्योंकि मंत्री का रूट प्रशासन ने डायवर्ट कर दिया था। इसलिए काले झंडे दिखाने का कार्यक्रम लगभग समाप्त होने की ओर था, लेकिन सत्ता के नशे में चूर नेताओं की दो गाड़ियां अचानक आईं और सड़क के किनारे पर खड़े किसानों को कुचलती हुई आगे बढ़ती चलीं। जो असंतुलित होकर पलट गईं। मेरे साथ मौजूद बिर्क को भी जबरदस्त टक्कर लगी। वे गिर गए। कई और किसान भी घायल हुए। लवप्रीत सिंह की मौत मेेरे सामने ही हुई। वह अपनी दो बहनों का अकेला भाई था। जब मैंने तिकुनिया से लौटकर रात 11 बजे पूरनपुर में किसानों को यह मंजर सुनाया तो अधिकतर की आंखें नम हो गईं। गुस्से के आंसू निकल पकड़े। किसानों का कहना था कि मंत्री और उसके बेटे पर कार्रवाई की जाए। किसानों ने कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं होती तब तक हम घर नहीं लौटेंगे।
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- मनप्रीत सिंह, जिलाध्यक्ष, अन्नदाता किसान यूनियन
फिल्मी तर्ज पर किसानों को गाड़ियों से रौंदा गया
जैसे हम फिल्मों में देखते हैं, उसी तर्ज पर किसानों के ऊपर गाड़ियां चढ़ाईं गईं। उत्तराखंड के किसान नेता तेजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हुए। मैं उनके साथ ही था। जैसे ही हमने देखा कि वह गिर गए हैं तो उन्हें उठाया और एक मीडियाकर्मी की गाड़ी से उन्हें इलाज के लिए ले चलने को तैयार हुए लेकिन मुख्य रास्ते प्रशासन ने बेरिकेडिंग करके बंद कर दिए थे। इसलिए हमें 40-45 किलोमीटर के स्थान पर करीब 80 किलोमीटर के सफर के बाद सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहां पर भी इलाज की जरूर सुविधाएं नहीं थीं। इसलिए हम किसान नेता को लेकर रुद्रपुर गए। हालत गंभीर होने की वजह से अब मेदांता ले जाया गया है।
- लखविंदर सिंह
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आपको बताते चलें कि किसान नेता राकेश टिकैत रविवार को रात 12 बजे से 12.20 बजे पूरनपुर में सड़क पर धरना दे रहे किसानों के बीच रहे। रात में ही उन्होंने किसानों से कहा था कि वे अपने-अपने घरों को चले जाएं लेकिन कोई भी किसान घर के लिए नहीं गया। राकेश टिकैत ने यह भी कहा था कि वह सोमवार को सुबह अगले आंदोलन के विषय में बताएंगे लेकिन किसानों ने कह दिया कि वह तभी सड़क से हटेंगे जब किसानों को रौंदने के आरोप से घिरे मंत्री के बेटे पर कार्रवाई हो जाए। किसानों के तेवर तीखे थे और कई किसानों ने बताया कि रात 11 बजे जब से उन्होंने मौत का वह मंजर सुना तब से दोषियों पर कार्रवाई के लिए वह डटे हुए हैं।
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सत्ता के नशे में चूर नेताओं ने किसानों को कुचलवाया
जब हमारे किसानों को कार से कुचला गया उस वक्त मैं और किसान नेता तजिंद्र सिंह बिर्क अपनी-अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ रहे थे। क्योंकि मंत्री का रूट प्रशासन ने डायवर्ट कर दिया था। इसलिए काले झंडे दिखाने का कार्यक्रम लगभग समाप्त होने की ओर था, लेकिन सत्ता के नशे में चूर नेताओं की दो गाड़ियां अचानक आईं और सड़क के किनारे पर खड़े किसानों को कुचलती हुई आगे बढ़ती चलीं। जो असंतुलित होकर पलट गईं। मेरे साथ मौजूद बिर्क को भी जबरदस्त टक्कर लगी। वे गिर गए। कई और किसान भी घायल हुए। लवप्रीत सिंह की मौत मेेरे सामने ही हुई। वह अपनी दो बहनों का अकेला भाई था। जब मैंने तिकुनिया से लौटकर रात 11 बजे पूरनपुर में किसानों को यह मंजर सुनाया तो अधिकतर की आंखें नम हो गईं। गुस्से के आंसू निकल पकड़े। किसानों का कहना था कि मंत्री और उसके बेटे पर कार्रवाई की जाए। किसानों ने कहा कि जब तक कार्रवाई नहीं होती तब तक हम घर नहीं लौटेंगे।
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- मनप्रीत सिंह, जिलाध्यक्ष, अन्नदाता किसान यूनियन
फिल्मी तर्ज पर किसानों को गाड़ियों से रौंदा गया
जैसे हम फिल्मों में देखते हैं, उसी तर्ज पर किसानों के ऊपर गाड़ियां चढ़ाईं गईं। उत्तराखंड के किसान नेता तेजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हुए। मैं उनके साथ ही था। जैसे ही हमने देखा कि वह गिर गए हैं तो उन्हें उठाया और एक मीडियाकर्मी की गाड़ी से उन्हें इलाज के लिए ले चलने को तैयार हुए लेकिन मुख्य रास्ते प्रशासन ने बेरिकेडिंग करके बंद कर दिए थे। इसलिए हमें 40-45 किलोमीटर के स्थान पर करीब 80 किलोमीटर के सफर के बाद सरकारी अस्पताल पहुंचे। वहां पर भी इलाज की जरूर सुविधाएं नहीं थीं। इसलिए हम किसान नेता को लेकर रुद्रपुर गए। हालत गंभीर होने की वजह से अब मेदांता ले जाया गया है।
- लखविंदर सिंह

मनप्रीत सिंह।- फोटो : PILIBHIT