फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   How long will it continue to be dirty?

आखिर कब तक गंदा होता रहेगा देवहा और गोमती का दामन

Sat, 15 Jul 2017 07:54 PM IST
पीलीभीत।
पीलीभीत। Updated Sat, 15 Jul 2017 07:54 PM IST
विज्ञापन
How long will it continue to be dirty?
आखिर कब तक गंदा होता रहेगा देवहा और गोमती का दामन - फोटो : आखिर कब तक गंदा होता रहेगा देवहा और गोमती का दामन
एनजीटी ने गंगा नदी को शुद्ध और स्वच्छ रखने के लिए कानून बना दिया है, लेकिन जिले की दो पवित्र नदियों के दामन को साफ सुथरा बनाने के लिए शासन प्रशासन कब जागेगा। कई प्रयासों के बाद भी अब तक इस पर कार्रवाई नहीं हो रही है। शहर का गंदा नाला और दिनभर का कूड़ा देवहा में डाला जा रहा है, वहीं गोमती की जमीन पर कब्जे कर खेती की जा रही है।
विज्ञापन

तराई के इस जनपद में यूं तो देवहा, गोमती, शारदा, खकरा, कैलाश, कटना, अप्सरा, माला, खन्नौत सहित 10 नदियां बहती हैं। इनमें शहर के पश्चिमी किनारे पर बहने वाली देवहा नदी का महत्व सर्वाधिक है। हिमालय के नन्दौर से निकलकर पीलीभीत हुए यह नदी 112 किमी सफर तय करती हुई हरदोई के निकट बिलग्राम में रामगंगा में मिल जाती है लेकिन नदी की सबसे ज्यादा दुर्दशा शहर क्षेत्र में है। शहर के उत्तरी छोर पर चंदोई गांव के निकट खकरा नदी इसमें मिलती। इसके अलावा चंदोई के अलावा शहर का मुख्य नाला भी इसमें गिरता है, लेकिन तमाम योजनाओं के बाद भी इस नाले का नदी में गिरना नहीं रोका गया। दरअसल शहर की बसावट और अब तक बने नाले नालियों को देखते हुए भी नाले का मार्ग परिवर्तित करना मुश्किल है।
विज्ञापन

कूड़े ने बढ़ाई नदी की दुर्दशा
देवाहुति गंगा के नाम से जाने वाली देवहा नदी के ब्रह्मचारी घाट जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं, वहीं इससे कुछ आगे बढ़ने पर नदी का किनारा डलावघर के रूप में बदलता जा रहा है। शहर से प्रतिदिन निकलने वाला लगभग 100 टन कूड़ा देवहा नदी के किनारे ही डाला जा रहा है। इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है और यही जल आगे जाकर रामगंगा के माध्यम से गंगा नदी में मिलकर उसे भी प्रदूषित कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कैसे बहे गोमती की धारा, जमीन पर कब्जे
देवहा के साथ ही जिले में गोमती नदी का भी धार्मिक महत्व है। माधोटांडा स्थित उद्गम स्थल पर इसका अस्तित्व तालाब के रूप में रह गया है। हालांकि नदी की अविरल धारा बहाने को नहर से एक नाला इसमें मिलाया गया है, लेकिन उद्गम स्थल से आगे की जमीन पर कब्जे होने के चलते नदी का बहाव संभव ही नहीं पा रहा है।
सिर्फ कागजी कार्रवाई तक प्रशासन
देवहा नदी में पड़ रहे कूड़े के निस्तारण वर्षों से प्रयास चल रहे है लेकिन अब हकीकत से ज्यादा कागजी घोड़े ही अधिक दौड़ाए गए हैं। एनजीटी को गंगा के साथ इसमें मिलने वाली नदियों पर भी अपने आदेश को लागू करना चाहिए।

नदियों की वर्तमान स्थिति के साथ कम से कम 100 मीटर तक के क्षेत्र को ग्रीनलैंड की तरह निर्माण के लिए प्रतिबंधित किया जाना चाहिए साथ ही प्रशासन को कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था करनी चाहिए।
लक्ष्मीकांत शर्मा, डीएनए क्लब
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed