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ओपीडी पहुंचे 875 मरीज, 379 लोग बुखार से पीड़ित
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पीलीभीत। मौसम में बदलाव के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। शनिवार को जिला अस्पताल में 875 की ओपीडी रही। जिसमें करीब 379 मरीज बुखार और जुकाम से पीड़ित थे। डेंगू को लेकर भी अब सावधानी बरतना शुरू कर दी गई है। फिलहाल अभी तक कोई भी डेंगू का केस नहीं आया है। अधिकांश मरीज वायरल फीवर से ही ग्रस्त हैं।
मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। डेंगू मरीजों के मिलने की संभावना भी प्रबल हो गई है। अन्य जिलों में डेंगू के मरीज मिलने से शासन ने सभी जिलों में अलर्ट जारी किया है। अस्पतालों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के साथ ही बुखार के मरीजों की डेंगू की जांच कराने के आदेश हैं। जिला अस्पताल में इन दिनों रोजाना करीब 800 से 900 तक की ओपीडी हो रही है। इनमें 40 फीसदी मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, सर्दी के सामने आ रहे हैं। रोजाना अस्पताल में सुबह नौ बजे से ही भीड़ लगना शुरू हो जा रही है। डॉक्टरों के चैंबर से लेकर दवा काउंटर तक भीड़-भीड़ दिख रही है। शनिवार को भी जिला अस्पताल में 875 की ओपीडी रही। जिसमें करीब 379 मरीज बुखार और वायरल के थे। सबसे बड़ी दिक्कत रही है कि कमरा नंबर चार में बैठने वाले डॉ. रमाकांत सागर के अवकाश पर जाने के बाद मरीजों को दिक्कत बढ़ गई है। ऐसे में डॉ. महावीर सिंह के चैंबर में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ के चैंबर भी फुल नजर आ रहे थे। इसके अलावा बुखार न उतरने पर डॉक्टर मरीजों की डेंगू और मलेरिया समेत विभिन्न प्रकार की जांचे कर रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल की पैथोलॉजी भी ओवरलोड चल रही है। प्रतिदिन 300 से अधिक लोगों की जांच हो रही हैं। दोपहर डेढ़ बजे तक जिला अस्पताल में भीड़ लगी रही।
डेंगू के लक्षण
ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार चढ़ना। मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द होना। आंखों के पिछले भाग में दर्द होना जो आंखों को दबाने और हिलाने पर और बढ़ता है। अत्यधिक कमजोरी लगना। भूख में कमी व जी मिचलाना। मुंह का स्वाद का खराब और गले में हल्का दर्द होना। शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना, चेहरे, गर्दन व छाती पर दाने हो सकते हैं। डेंगू बुखार का इलाज होने पर पांच से सात दिन में मरीज ठीक हो जाता है।
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बचाव के उपाय
डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें। इस बीमारी में डिस्प्रिल व एस्प्रिन कभी न लें। बुखार 102 डिग्री से अधिक है तो बुखार को कम करने के लिए हाइड्रोथेरेपी करें। सामान्य रूप से भोजन देना शुरू रखें। बुखार की स्थिति में शरीर को और अधिक भोजन की आवश्यकता होती है। घर व आसपास सफाई रखें। किसी बर्तन व स्थान पर पानी न जमा होने दें।
वायरल फीवर का मौसम है। बरसात के बाद अचानक तेज धूप की वजह से बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ ही पेट संबंधी बीमारियां शुरू हो जाती हैं। इसका कारण मच्छर और जलजनित बीमारियां होती हैं। वायरल फीवर से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें और पानी उबालकर पीएं। खान-पान में सावधानी बरतें, पूरे शरीर के कपड़े पहनें। धूप से आने पर तत्काल ठंडी चीजें अथवा बारिश से आने पर तत्काल गरम चीजों का सेवन करने से बचें तो वायरल फीवर से बच सकते हैं। - डॉ. रतनपाल सिंह समुन, सीएमएस जिला अस्पताल
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मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। डेंगू मरीजों के मिलने की संभावना भी प्रबल हो गई है। अन्य जिलों में डेंगू के मरीज मिलने से शासन ने सभी जिलों में अलर्ट जारी किया है। अस्पतालों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के साथ ही बुखार के मरीजों की डेंगू की जांच कराने के आदेश हैं। जिला अस्पताल में इन दिनों रोजाना करीब 800 से 900 तक की ओपीडी हो रही है। इनमें 40 फीसदी मरीज बुखार, खांसी, जुकाम, सर्दी के सामने आ रहे हैं। रोजाना अस्पताल में सुबह नौ बजे से ही भीड़ लगना शुरू हो जा रही है। डॉक्टरों के चैंबर से लेकर दवा काउंटर तक भीड़-भीड़ दिख रही है। शनिवार को भी जिला अस्पताल में 875 की ओपीडी रही। जिसमें करीब 379 मरीज बुखार और वायरल के थे। सबसे बड़ी दिक्कत रही है कि कमरा नंबर चार में बैठने वाले डॉ. रमाकांत सागर के अवकाश पर जाने के बाद मरीजों को दिक्कत बढ़ गई है। ऐसे में डॉ. महावीर सिंह के चैंबर में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ के चैंबर भी फुल नजर आ रहे थे। इसके अलावा बुखार न उतरने पर डॉक्टर मरीजों की डेंगू और मलेरिया समेत विभिन्न प्रकार की जांचे कर रहे हैं। ऐसे में जिला अस्पताल की पैथोलॉजी भी ओवरलोड चल रही है। प्रतिदिन 300 से अधिक लोगों की जांच हो रही हैं। दोपहर डेढ़ बजे तक जिला अस्पताल में भीड़ लगी रही।
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डेंगू के लक्षण
ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार चढ़ना। मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द होना। आंखों के पिछले भाग में दर्द होना जो आंखों को दबाने और हिलाने पर और बढ़ता है। अत्यधिक कमजोरी लगना। भूख में कमी व जी मिचलाना। मुंह का स्वाद का खराब और गले में हल्का दर्द होना। शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना, चेहरे, गर्दन व छाती पर दाने हो सकते हैं। डेंगू बुखार का इलाज होने पर पांच से सात दिन में मरीज ठीक हो जाता है।
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बचाव के उपाय
डॉ. महावीर सिंह ने बताया कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें। इस बीमारी में डिस्प्रिल व एस्प्रिन कभी न लें। बुखार 102 डिग्री से अधिक है तो बुखार को कम करने के लिए हाइड्रोथेरेपी करें। सामान्य रूप से भोजन देना शुरू रखें। बुखार की स्थिति में शरीर को और अधिक भोजन की आवश्यकता होती है। घर व आसपास सफाई रखें। किसी बर्तन व स्थान पर पानी न जमा होने दें।
वायरल फीवर का मौसम है। बरसात के बाद अचानक तेज धूप की वजह से बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ ही पेट संबंधी बीमारियां शुरू हो जाती हैं। इसका कारण मच्छर और जलजनित बीमारियां होती हैं। वायरल फीवर से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें और पानी उबालकर पीएं। खान-पान में सावधानी बरतें, पूरे शरीर के कपड़े पहनें। धूप से आने पर तत्काल ठंडी चीजें अथवा बारिश से आने पर तत्काल गरम चीजों का सेवन करने से बचें तो वायरल फीवर से बच सकते हैं। - डॉ. रतनपाल सिंह समुन, सीएमएस जिला अस्पताल