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Pilibhit News: मई में एक्सपायर हो गया था ग्लूकोज, स्वास्थ्यकर्मियों ने हटाना भी जरूरी नहीं समझा
Wed, 29 Jan 2025 01:18 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Wed, 29 Jan 2025 01:18 AM IST
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पीलीभीत। जिला महिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में नवजात को जिस बोतल से ग्लूकोज चढ़ाया गया, उस पर एक्सपायरी डेट मई 2024 दर्ज है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जो दवा आठ माह पहले एक्सपायर हो गई, उसे हटाया क्यों नहीं गया?
अब अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह ग्लूकोज स्टॉक में है ही नहीं, ऐसे में बोतल वार्ड में कैसे पहुंची यह जांच का विषय है। दोनों ही जांच टीमों की पड़ताल में इन सब सवालों के जवाब मिलने के उम्मीद है। इसके बाद संबंधित के खिलाफ कारवाई भी की जा सकेगी।
गांव गायबोझ निवासी अमन सिंह की पत्नी राधा सिंह ने एक दिन पूर्व घर पर ही बच्चे को जन्म दिया। बताते हैं कि कुछ समय के बाद जब बच्चे ने दूध पीना बंद कर दिया तो परिजन घबरा गए। उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल लाने पर उसे एक्सपायरी डेट का ग्लूकोज चढ़ा दिया गया। तबीयत बिगड़ने पर उसे लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया।
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लखनऊ जाते समय रास्ते में एक निजी अस्पताल के सामने एंबुलेंस रुकवाकर परिजन जब जांच कराने के लिए उसे ले गए तो डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आरोप : कर्मचारियों ने बोतल छीनने की कोशिश की
परिजनों ने बताया कि जब वह बच्चे का शव लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने बोतल छीनने की कोशिश की। परिजनों के विरोध के बाद कर्मचारी पीछे हट गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बोतल को सील कर दिया।
पहले भी सामने आ चुके हैं लापरवाही के मामले
जिला हो या महिला अस्पताल आए दिन लापरवाही के मामले सामने आते हैं। जिम्मेदार टीम गठित कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेते हैं। कार्रवाई के नाम पर सिफर ही रहता है। करीब 10 माह पूर्व जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड के सामने बेंच पर ही महिला का प्रसव हो गया था। इसके बाद नवजात की मौत हो गई। जांच टीम गठित की गई। बाद में कार्रवाई के नाम पर लीपापोती हो गई। महिला अस्पताल में गर्भवती का प्रसव न कराने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई की है।
दिखे न नाकामी, एसएनसीयू वार्ड में जाने पर पाबंदी
अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बजाय नाकामी छिपाने पर अधिक ध्यान दे रहा है। इसके लिए अपने हिसाब से नियम-कानून भी बना रखे हैं। परिजनों को एसएनसीयू वार्ड से दूर ही रखा जाता है। घटना के बाद पहुंचे मीडियाकर्मियों को भी कर्मचारियों ने वार्ड से दूर रहने के लिए कहा। बताया कि अधिकारियों के निर्देश हैं।
वर्जन
मामले में सीएमओ से बात हुई है। जांच टीम गठित की गई है। जांच में जो भी दोषी मिलेगा कार्रवाई की जाएगी। - संजय कुमार सिंह, डीएम
ये दवा स्टॉक में नहीं है। किस स्वास्थ्य कर्मी ने यह दवा मंगाई यह जांच का विषय है। - राजेश कुमार, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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अब अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह ग्लूकोज स्टॉक में है ही नहीं, ऐसे में बोतल वार्ड में कैसे पहुंची यह जांच का विषय है। दोनों ही जांच टीमों की पड़ताल में इन सब सवालों के जवाब मिलने के उम्मीद है। इसके बाद संबंधित के खिलाफ कारवाई भी की जा सकेगी।
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गांव गायबोझ निवासी अमन सिंह की पत्नी राधा सिंह ने एक दिन पूर्व घर पर ही बच्चे को जन्म दिया। बताते हैं कि कुछ समय के बाद जब बच्चे ने दूध पीना बंद कर दिया तो परिजन घबरा गए। उपचार के लिए जिला महिला अस्पताल लाने पर उसे एक्सपायरी डेट का ग्लूकोज चढ़ा दिया गया। तबीयत बिगड़ने पर उसे लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया।
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लखनऊ जाते समय रास्ते में एक निजी अस्पताल के सामने एंबुलेंस रुकवाकर परिजन जब जांच कराने के लिए उसे ले गए तो डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
आरोप : कर्मचारियों ने बोतल छीनने की कोशिश की
परिजनों ने बताया कि जब वह बच्चे का शव लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने बोतल छीनने की कोशिश की। परिजनों के विरोध के बाद कर्मचारी पीछे हट गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बोतल को सील कर दिया।
पहले भी सामने आ चुके हैं लापरवाही के मामले
जिला हो या महिला अस्पताल आए दिन लापरवाही के मामले सामने आते हैं। जिम्मेदार टीम गठित कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर लेते हैं। कार्रवाई के नाम पर सिफर ही रहता है। करीब 10 माह पूर्व जिला अस्पताल के आपातकालीन वार्ड के सामने बेंच पर ही महिला का प्रसव हो गया था। इसके बाद नवजात की मौत हो गई। जांच टीम गठित की गई। बाद में कार्रवाई के नाम पर लीपापोती हो गई। महिला अस्पताल में गर्भवती का प्रसव न कराने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई की है।
दिखे न नाकामी, एसएनसीयू वार्ड में जाने पर पाबंदी
अस्पताल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बजाय नाकामी छिपाने पर अधिक ध्यान दे रहा है। इसके लिए अपने हिसाब से नियम-कानून भी बना रखे हैं। परिजनों को एसएनसीयू वार्ड से दूर ही रखा जाता है। घटना के बाद पहुंचे मीडियाकर्मियों को भी कर्मचारियों ने वार्ड से दूर रहने के लिए कहा। बताया कि अधिकारियों के निर्देश हैं।
वर्जन
मामले में सीएमओ से बात हुई है। जांच टीम गठित की गई है। जांच में जो भी दोषी मिलेगा कार्रवाई की जाएगी। - संजय कुमार सिंह, डीएम
ये दवा स्टॉक में नहीं है। किस स्वास्थ्य कर्मी ने यह दवा मंगाई यह जांच का विषय है। - राजेश कुमार, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल