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भरा पचपेड़ा गोशाला: गंदगी में रहने को मजबूर गोमाता, खाने को हरा चारा न इलाज को दवाएं
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अमरिया। अभी कुछ दिन पहले ही डीएम ने समस्त गोशालाओं में साफ-सफाई और गोवंशीय पशुओं के खाने और इलाज की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश मातहतों को दिए थे। इसे लेकर कुछ गोशालाओं में अधीनस्थ अधिकारियों ने निरीक्षण कर हालात भी परखे। मगर अब भी इंतजाम बेहतर नहीं हो सके हैं। तहसील क्षेत्र की भरा पचपेड़ा गोशाला में गोवंशीय पशु कीचड़ में रखे जा रहे हैं। यहीं नहीं एक पशु को मरने के बाद कीचड़ में ही छोड़ दिया। पोस्टमार्टम कराने की भी जहमत नहीं उठाई गई।
मझोला-बिस्टी मार्ग पर स्थित भरा पचपेड़ा गोशाला में वर्तमान में 155 गोवंशीय पशु हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी एक मुनीम समेत पांच लोगों पर है। परिसर में समस्त व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा किया जाता है। मगर जब अमर उजाला की टीम ने वहां जाकर देखा तो अव्यवस्थाओं का भंडार था। गोशाला का परिसर कीचड़ से भरा है। उसी में गोवंशीय पशु बैठने को मजबूर हैं। पशुओं को खाने के लिए सूखा भूसा दिखा, उसमें भी काफी गंदगी थी। हरा चारा गोशाला में था ही नहीं। भूसे की नांद की सफाई की बात करें तो काई जम चुकी थी। पेड़-पौधे भी उग चुके थे। गोवंश को पीने को साफ पानी भी नहीं मिल रहा था। बदइंतजामी का आलम यह था कि गोशाला परिसर में एक पशु की मौत हो गई थी। उसका शव पोस्टमार्टम कराकर दफन कराने के बजाय कीचड़ में ही सड़ने को डाल रखा था। टीम के पहुंचने के बाद जब सवाल उठाए गए तो इसे लेकर सुध ली गई। बीमार पशुओं के इलाज की व्यवस्था भी गोशाला में नहीं दिखी। दवाओं का स्टॉक के नाम पर एक गोली तक नहीं थी। कर्मचारियों ने बताया कि पशु चिकित्सक चेकअप करने के लिए आते हैं, मगर रोज नहीं।
डीएम बोले- कराई जाएगी जांच
गोशालाओं में साफ-सफाई से लेकर पशुओं के खाने और इलाज के इंतजाम दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर गंभीरता से काम कराएंगे। इस मामले की जांच कराई जाएगी। - पुलकित खरे, डीएम
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मझोला-बिस्टी मार्ग पर स्थित भरा पचपेड़ा गोशाला में वर्तमान में 155 गोवंशीय पशु हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी एक मुनीम समेत पांच लोगों पर है। परिसर में समस्त व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा किया जाता है। मगर जब अमर उजाला की टीम ने वहां जाकर देखा तो अव्यवस्थाओं का भंडार था। गोशाला का परिसर कीचड़ से भरा है। उसी में गोवंशीय पशु बैठने को मजबूर हैं। पशुओं को खाने के लिए सूखा भूसा दिखा, उसमें भी काफी गंदगी थी। हरा चारा गोशाला में था ही नहीं। भूसे की नांद की सफाई की बात करें तो काई जम चुकी थी। पेड़-पौधे भी उग चुके थे। गोवंश को पीने को साफ पानी भी नहीं मिल रहा था। बदइंतजामी का आलम यह था कि गोशाला परिसर में एक पशु की मौत हो गई थी। उसका शव पोस्टमार्टम कराकर दफन कराने के बजाय कीचड़ में ही सड़ने को डाल रखा था। टीम के पहुंचने के बाद जब सवाल उठाए गए तो इसे लेकर सुध ली गई। बीमार पशुओं के इलाज की व्यवस्था भी गोशाला में नहीं दिखी। दवाओं का स्टॉक के नाम पर एक गोली तक नहीं थी। कर्मचारियों ने बताया कि पशु चिकित्सक चेकअप करने के लिए आते हैं, मगर रोज नहीं।
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डीएम बोले- कराई जाएगी जांच
गोशालाओं में साफ-सफाई से लेकर पशुओं के खाने और इलाज के इंतजाम दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर गंभीरता से काम कराएंगे। इस मामले की जांच कराई जाएगी। - पुलकित खरे, डीएम
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