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Pilibhit News: साक्ष्य के अभाव में मारपीट के चार आरोपी बरी
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पीलीभीत। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट राम किशोर ने मारपीट के बाद ग्रामीण की मौत के मामले में साक्ष्य के अभाव में चार आरोपियों को बरी कर दिया। वादी के खिलाफ मिथ्या साक्ष्य देने पर नोटिस जारी करने और एससी/एसटी एक्ट के तहत राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान राशि वापस जमा कराने का आदेश दिया।
थाना बरखेड़ा के गांव प्रताप डांडी निवासी श्री कृष्ण ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि गांव निवासी गंगा प्रसाद व सुरेंद्र कुमार और राम निवास उसके भाई सीताराम के साथ गाली-गलौज कर रहे थे। गाली देने से मना करने पर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। मारपीट में उसे काफी गंभीर चोटें आईं, जिससे वह बेहोश हो गया। शोर शराबा स सुनकर वह लोग उसे बचा कर लाए। पुलिस की तहरीर के मुताबिक, तीन नवंबर 2024 को आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। उसी दिन उपचार के दौरान बरेली के एक निजी अस्पताल में घायल सीताराम की मौत हो गई।
पुलिस ने आरोपियों को पकड़ कर न्यायालय के समक्ष पेश किया। वहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने वाद विवेचना आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध नहीं कर पाया। अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद चारों आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही वादी श्रीकृष्ण के विरुद्ध अदालत में मिथ्या साक्ष्य देने पर दांडिक प्रकीर्ण वाद दायर कर नोटिस जारी करने और अनुसूचित जाति जनजाति के तहत दर्ज मामले में सरकार की ओर से मिलने वाली अनुदान राशि वापस लौटाने का आदेश दिया है। संवाद
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थाना बरखेड़ा के गांव प्रताप डांडी निवासी श्री कृष्ण ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि गांव निवासी गंगा प्रसाद व सुरेंद्र कुमार और राम निवास उसके भाई सीताराम के साथ गाली-गलौज कर रहे थे। गाली देने से मना करने पर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। मारपीट में उसे काफी गंभीर चोटें आईं, जिससे वह बेहोश हो गया। शोर शराबा स सुनकर वह लोग उसे बचा कर लाए। पुलिस की तहरीर के मुताबिक, तीन नवंबर 2024 को आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। उसी दिन उपचार के दौरान बरेली के एक निजी अस्पताल में घायल सीताराम की मौत हो गई।
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पुलिस ने आरोपियों को पकड़ कर न्यायालय के समक्ष पेश किया। वहां से सभी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने वाद विवेचना आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध नहीं कर पाया। अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद चारों आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही वादी श्रीकृष्ण के विरुद्ध अदालत में मिथ्या साक्ष्य देने पर दांडिक प्रकीर्ण वाद दायर कर नोटिस जारी करने और अनुसूचित जाति जनजाति के तहत दर्ज मामले में सरकार की ओर से मिलने वाली अनुदान राशि वापस लौटाने का आदेश दिया है। संवाद
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