फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Five democracies, trapped in the investigation, paused pension

जांच में फंसे पांच लोकतंत्र सेनानी, पेंशन रोकी 

Wed, 08 Mar 2017 11:28 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Wed, 08 Mar 2017 11:28 PM IST
विज्ञापन
जिले में संगीन अपराधों में लिप्त कई लोगों को तत्कालीन प्रशासन की ओर से आनन-फानन में भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर न सिर्फ लोकतंत्र सेनानी घोषित कर दिया गया, बल्कि उन्हें हर माह 15,000 रुपये की पेंशन रकम भी दी जा रही थी। अमर उजाला में इसके खुलासे के बाद हरकत में आए प्रशासन ने जांच शुरू की तो शुरुआती दौर में ही पांच लोग प्रथम दृष्ट्या अपात्र पाए गए। जिसके बाद प्रशासन ने उन सभी की पेंशन पर अग्रिम कार्रवाई तक रोक लगा दी है। जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से ऐसे लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। जिले के घोषित लोकतंत्र सेनानियों में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जो कभी गंभीर प्रकृति के अपराधों में संलिप्त रहे थे तो कुछ पर जमाखोरी का मुकदमा चल चुका है। कुछ समय पहले असल लोकतंत्र सेनानियों ने इस पर ऐतराज भी जताया, लेकिन प्रशासन ने उनकी बातों को नजरंदाज करता रहा। संज्ञान में आने पर अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो आनन-फानन में प्रशासन ने जांच शुरू की। इसी कड़ी में प्रशासन ने जिले के खुफिया विभाग के अधिकारियों से भी रिपोर्ट मंगाई। जिसके आधार पर अलाउद्दीन, मोहम्मद अब्दुल वली खां, अखिलेश मिश्र, कौशल कुमार और चंद्रप्रकाश प्रारंभिक जांच में अपात्र पाए गए। एसपी कार्यालय के माध्यम से खुफिया विभाग ने यह रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय में भेज दी है। एडीएम अजयकांत सैनी ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या अपात्र पाए मिले उपरोक्त सभी पांच लोगों की पेंशन अग्रिम कार्रवाई तक रोक दी गई है। उन्होंने बताया कि मामले की गहनता से जांच के लिए उन अभिलेखों की भी पड़ताल की जा रही है जिनके आधार पर तत्कालीन प्रशासन ने इन्हें लोकतंत्र सेनानी घोषित किया था। उन्होंने बताया कि डीएम मासूम अली सरवर के निर्देश पर जिले के अन्य सभी लोकतंत्र सेनानियों की भी गहनता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने पर यदि कोई अपात्र पाया जाता है तो उससे बकाया राजस्व की भांति वसूली की जाएगी।
विज्ञापन

इन्हें बनना था लोकतंत्र सेनानी
वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लागू किया था। इस दौरान तत्कालीन सरकार ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं को डीआईआर (डिफेंस इंडियन रूल्स) व मीसा के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। उस दौरान जिले से भी कांग्रेसी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले कई नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। यह तत्कालीन जनसंघ, आरएसएस तथा सोशलिस्ट पार्टी आदि से जुड़े नेता व कार्यकर्ता थे। इन्हें ही लोकतंत्र घोषित किया जाना था।
विज्ञापन

ऐसे हुई चूक
2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इमरजेंसी के दौरान बंद विभिन्न दलों के इन लोगों को राजनीतिक बंदियों का सम्मान देते हुए पेंशन देने का निर्णय लिया। शासन ने आननफानन में सभी जिलों से डीआईआर के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजे गए राजनीतिक बंदियों की सूची मांगी। प्रशासन ने आपाधापी में जो सूची शासन को भेजी उसमें करीब आधा दर्जन से अधिक नाम ऐसे चले गए जो राजनीतिक बंदी नहीं बल्कि की चेन स्नेचर, गंभीर अपराध करने वाले और जमाखोर थे और इन्हीं अपराधों के चलते डीआईआर में बंद किया गया था। सूची बनाने में यह गलती महज इसलिए हुई क्योंकि प्रशासन ने जेल से मिले आधे-अधूरे रिकार्ड के आधार पर उन सभी लोगों के नाम भेज दिए जो डीआईआर/मीसा में जेल में बंद रहे। एलआईयू और थानों से पूरी रिपोर्ट नहीं मंगाई। जिले में करीब 161 लोगों को यह पेंशन मिल रही है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

इन आरोपों में घिरे है 
सूची में शामिल नामों में दो जमाखोरी, एक चेन स्नेचर, एक गंभीर अपराध और एक बलात्कार व गुंडई के चलते डीआईआर में बंद किए गए थे। इन सभी के रिकार्ड एलआईयू व थाना पुलिस के पास मौजूद है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed