फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Emergency of District Hospital: You suffer here for hours and still do not get treatment

ये जिला अस्पताल की इमरजेंसी है...यहां दर्द में घंटों तड़पो फिर नहीं मिलता इलाज

Thu, 28 Apr 2022 10:51 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 28 Apr 2022 10:51 PM IST
विज्ञापन
Emergency of District Hospital: You suffer here for hours and still do not get treatment
इमरजेंसी में निरीक्षण के दौरान मरीज के परिजन से जानकारी लेते सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा। फाइल फोट - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। खून से लथपथ एक महिला जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में घंटों इलाज के लिए तड़पती रही। उसका इलाज करने के बजाए बिना प्राथमिक उपचार के बरेली रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों की लापरवाही यही नहीं रुकी, बुधवार को भी एक परिवार हादसे में घायल हुुआ और इमरजेंसी इलाज के लिए भेजा गया, लेकिन घायलों को समय पर उपचार नहीं मिला। ये हालात तब हैं जब बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दम भरा जा रहा है। चिकित्सा के नाम करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तीन डॉक्टरों की तैनाती है। इसमें डॉ. पीके अग्रवाल स्थायी हैं। डॉ. नितिन मलिक और डॉ. आरएस यादव संविदा पर तैनात हैं। ये डॉक्टर अक्सर इमरजेंसी में नहीं मिलते। पीके अग्रवाल और डॉ. नितिन बरेली में रहते हैं। मंगलवार को पूरनपुर क्षेत्र की रहने वाली शांति देवी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उनके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं थीं। रात आठ बजे उनको इमरजेंसी वार्ड में लाया गया। डॉ. आरएस यादव की ड्यूटी थी। वह मौके पर नहीं थे। डॉ. मलिक को आना था, लेकिन वह भी बरेली थे। जब डॉ. पीके अग्रवाल से बात की गई तो वह भी बरेली थे। दर्द में तड़प रही महिला को प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया गया। इसी दौरान अपर प्रमुख सचिव चिकित्सा अमित मोहन प्रसाद तक सूचना पहुंची। उन्होंने सीएमओ डॉ. आलोक शर्मा को सूचना दी जिसके बाद सीएमओ इमरजेंसी पहुंचे। महिला की हालत ज्यादा गंभीर थी तो उसे बरेली रेफर कर दिया गया। सीएमओ को यहां कोई डॉक्टर नहीं मिला। उन्होंने जब इमरजेंसी में भर्ती बाकी मरीजों का हाल जाना तो वह दंग रहे गए। एक मरीज के सर में चोट थी लेकिन उसका ठीक से इलाज नहीं किया गया। एक मरीज के कूल्हे में चोट थी। उसे भी डॉक्टरों ने ठीक से नहीं देखा। मरीजों का कहना था कि डॉक्टर समय पर देखने नहीं आते। बुधवार सुबह गजरौला में एक परिवार हादसे का शिकार हो गया। पांच लोग घायल हुए जिसमें एक बच्चे की हालत नाजुक थी। इलाज के लिए उनको इमरजेंसी लाया गया। यहां दो घंटे तक उनको प्राथमिक उपचार नहीं मिला।
विज्ञापन

दो डॉक्टरों का वेतन रोका गया
मामला शासन तक पहुंचने के बाद डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई है। सीएमओ ने डॉ. पीके अग्रवाल और डॉ. नितिन मलिक का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही भविष्य में ऐसा करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सीएमएस ने भी इन डॉक्टरों को बिना अनुमति मुख्यालय न छोड़ने की हिदायत दी है। उनको रहने के लिए कमरे आवंटित किए गए हैं। अब डॉक्टर बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ पाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

आए दिन लगते हैं वसूली के आरोप
जिला अस्पताल चाहें पुरुष अस्पताल हो या महिला, दोनों में अवैध वसूली का खेल जमकर चलता है। मरीजों से पैसे लेने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। पिछले दिनों ही महिला अस्पताल में प्रसव के नाम पर दस हजार रुपये मांगने के दो मामले सामने आए। इसके अलावा पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी में भी इलाज के नाम पर तीमारदारों से वसूली की शिकायतें आई हैं। कुछ शिकायतें राज्य मंत्री तक पहुंची।
सीएम की सौ दिन की कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में भी उठा था मामला
पिछले दिनों गांधी सभागार में हुई सीएम की सौ दिन की कार्ययोजना की समीक्षा बैठक में भी जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का मामला उठा था। राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार ने सीएमओ को निर्देश दिए थे कि इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों की सूची जारी की जाए। आए दिन इलाज न मिलने की शिकायतें उन तक पहुंचती हैं।
पहले भी सामने आ चुकी हैं डॉक्टरों की लापरवाही
केस एक : नौ अप्रैल को गजरौला में एक करीब छह साल की बच्ची सड़क हादसे का शिकार हो गई थी। एंबुलेंस नहीं पहुंची। परिजन बाइक से अस्पताल लाए। तीन घंटे तक बच्ची दर्द से कराहती रही। उसे इलाज नहीं मिला। निरीक्षण को पहुंचे सीएमओ ने बच्ची का इलाज किया।
केस दो: 13 अप्रैल को न्यूरिया हुसनैपुर में एक व्यक्ति सड़क हादसे में शिकार हो गया था। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में उसे भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजन का आरोप था कि डॉक्टरों ने उसे ठीक से देखा ही नहीं। इलाज के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई।
केस तीन: 21 अप्रैल को बीसलपुर की एक महिला को सांड़ ने सींग मारकर घायल कर दिया था। उसको गहरे घाव हो गए थे। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में शाम करीब चार बजे उसे लाया गया। रात के नौ बजे तक उसे इलाज नहीं मिला। एक स्थानीय नेता ने जब सीएमओ को अवगत कराया तब वह खुद वहां पहुंचे और घायल महिला का इलाज किया।
डॉक्टरों की घोर लापरवाही है। मुझे जैसे ही जानकारी मिली तुरंत इमरजेंसी पहुंचा। तब तक महिला को रेफर किया जा चुका था। मौके पर दो अन्य मरीज मिले। उनका भी इलाज ठीक से नहीं हो रहा था। दो डॉक्टरों का वेतन रोकने करने के निर्देश दिए हैं।

-डॉ. आलोक कुमार शर्मा, सीएमओ
डॉक्टरों को सख्त चेेतावनी जारी की गई है। वह मुख्यालय पर नहीं रुकते हैं। उनको कमरा आवंटित कराया गया है। अब वह बिना अनुमति से मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। ऑन ड्यूटी डॉक्टर से स्पष्टीकरण मांगा है। अब ऐसा मामला संज्ञान में आया तो कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. वीके तिवारी, सीएमएस जिला पुरुष अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed